
कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने संसद परिसर में मीडिया पर प्रतिबंध को सोमवार को ”तानाशाही कृत्य” करार दिया. मीडियाकर्मी संसद भवन के प्रवेश और निकास द्वार के पास से ही सांसदों की टिप्पणियों को कैमरे पर रिकॉर्ड करते आ रहे हैं, लेकिन अब उन्हें एक घेरे तक ही सीमित कर दिया गया है.
बनर्जी ने कहा, ” यह निरंकुशता का कृत्य है… विपक्ष को इस तानाशाही कृत्य के खिलाफ एकजुट होना चाहिए.” इससे पहले, दिन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ओम बिरला से संसद परिसर के भीतर मीडिया पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया. इस पर बिरला ने राहुल गांधी को संसदीय प्रक्रियाओं से जुड़े नियमों की याद दिलाई और कहा कि ऐसे मुद्दों पर उनके साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा करनी चाहिए और सदन के पटल पर नहीं उठाना चाहिए.
गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं -तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया परिसर में मीडियार्किमयों से मुलाकात की. ओ’ब्रायन ने कहा, ”यह सेंसरशिप है. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है. हम इस लड़ाई में आपके साथ हैं.” बाद में, लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने पत्रकारों के एक समूह से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी सभी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और उन्हें अपने कर्तव्य के निर्वहन के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएंगी.



