
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में हाल ही में आयोजित गीता पाठ कार्यक्रम में दो खाद्य विक्रेताओं पर हुए हमले को लेकर बृहस्पतिवार को भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि राज्य में इस तरह की धमकियों और धार्मिक विभाजन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बनर्जी ने कहा कि किसी को यह तय करने की इजाजत नहीं दी जाएगी कि लोगों को क्या खाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘‘यह पश्चिम बंगाल है, उत्तर प्रदेश नहीं.’’ साथ ही कहा कि इस घटना के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
नदिया जिले के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी आरोपियों को कुछ घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”उन्होंने गरीब ‘पैटी’ विक्रेताओं को पीटा. हमने कल रात सभी को गिरफ्तार कर लिया. हर जमावड़े में कुछ न कुछ बेचने वाले फेरीवाले होते हैं. तुमने एक गरीब फेरीवाले को पीटा है. गरीबों को परेशान करने वाले किसी व्यक्ति को मैं नहीं छोड़ूंगी.” इस घटना को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के नाम पर पैदा किए गए ‘‘भय के माहौल’’ से जोड़ते हुए, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘एसआईआर से लेकर गरीब विक्रेताओं के उत्पीड़न तक, सब कुछ चुनाव से पहले उनकी साजिश का हिस्सा है.’’ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य में सांप्रदायिक विभाजन की संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
भाजपा पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं सांप्रदायिक विभाजन में विश्वास नहीं करती. मैं सभी धर्मों का सम्मान करती हूं.
गीता पढ़ने के लिए सार्वजनिक सभा आयोजित करने की क्या आवश्यकता है? हम सभी गीता पढ़ते हैं. जो लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं या अल्लाह से दुआ मांगते हैं, वे अपने हृदय में ऐसा करते हैं.’’ राजनीति के लिए ‘गीता, गीता’ का जाप करने वालों पर तीखा प्रहार करते हुए बनर्जी ने कहा, ह्लमैं उनसे पूछना चाहती हूं कि श्रीकृष्ण ने धर्म के बारे में क्या कहा? धर्म का अर्थ है इरादों की पवित्रता, मानवता और शांति. धर्म का अर्थ घृणा या विभाजन नहीं है. हम सभी घर पर गीता का पाठ करते हैं. ईश्वर हमारे हृदय में निवास करते हैं.” भाजपा पर ‘‘बंगाल को बर्बाद’’ करने का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ‘‘वे राज्य पर कब्जा करना चाहते हैं और लोगों को बांग्ला बोलने से रोकना चाहते हैं.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में बंगाली लोगों को अपनी मातृभाषा बोलने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है.
बनर्जी ने कहा, ‘‘आपने बंगाल की पूरी तरह से उपेक्षा की है और बांग्ला बोलने वाले लोगों को प्रताड़ित किया है. ओडिशा में, नदिया के कुछ लोगों को बांग्ला बोलने के कारण अभी भी कैद में रखा गया है. उत्तर प्रदेश और दिल्ली में, सिर्फ बांग्ला बोलने के कारण लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और बांग्लादेश भेजा जा रहा है. एक गर्भवती महिला को सिर्फ बांग्ला बोलने के कारण बांग्लादेश भेज दिया गया.’’ बनर्जी ने बंगाल की हस्तियों की व्याख्या को लेकर भी भाजपा पर हमला बोला.
ममता ने कहा, ”वंदे मातरम् के लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को अब ‘बंकिम दा’ कहा जा रहा है, जैसे वे उनके साथ चाय पीते हों. मास्टर सूर्य सेन को मास्टर कहा जा रहा है.., वे दावा करते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय नेता नहीं हैं.” मुख्यमंत्री ने कहा, ” वे महात्मा गांधी का सम्मान नहीं करते. आज एक भाजपा नेता ने खुदीराम बोस को आतंकवादी कहा. राजा राम मोहन राय को ब्रिटिश एजेंट कहा जा रहा है. विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी गई. कल किसी ने कहा कि मातंगीनी हाजरा मुस्लिम थीं. क्या तुम बंगाल को जानते भी हो?ह्व बनर्जी ने दोहराया कि उनकी सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं की रक्षा करेगी और चेतावनी दी, ह्लयाद रखें, भाजपा मांसाहार को प्रतिबंधित करना चाहती है. यह आपका निर्णय है कि आप मांसाहार का सेवन करना चाहते हैं या नहीं. लेकिन मैं किसी को भी आदिवासियों, अल्पसंख्यकों या टापासिलियों (भूमिहीन मजदूरों) के मामलों में दखल देने नहीं दूंगी.ह्व मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनकी सरकार राज्य में निरुद्ध केंद्रों (डिटेंशन सेंटर) की इजाजत नहीं देगी.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”यह बंगाल है, उत्तर प्रदेश नहीं. हम यहां निरुद्ध केंद्रों की अनुमति नहीं देंगे. जब तक हम सत्ता में हैं, कोई भी ऐसा केंद्र यहां स्थापित नहीं होने देंगे. ” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता पुलिस ने सात दिसंबर को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित पांच लाख लोगों द्वारा गीता पाठ कार्यक्रम में दो खाद्य विक्रेताओं पर हमला करने के आरोप में बुधवार रात को तीन लोगों को गिरफ्तार किया. मैदान पुलिस थाने में दर्ज दो शिकायतों के आधार पर ये गिरफ्तारियां की गईं.
कोलकाता के टॉपसिया इलाके और हुगली जिले के आरामबाग के रहने वाले शिकायतकर्ता ‘चिकन पैटी’ बेचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर गए थे. आरोपियों ने कथित तौर पर उनका सारा सामान फेंक दिया और उन्हें कान पकड़कर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया.
ममता ने शाह को ‘खतरनाक’ कहा; बंगाल में 1.5 करोड़ मतदाता हटाने का आरोप लगाया कृष्णानगर (प. बंगाल), 11 दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर हमला तेज करते हुए उन्हें ‘‘खतरनाक’’ करार दिया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों के एसआईआर का इस्तेमाल 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल के लाखों पात्र मतदाताओं के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाने के लिए कर रहे हैं.
नदिया जिले के कृष्णानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि शाह मतदाता सूचियों से ‘डेढ़ करोड़ नाम’ हटाने की कोशिशों को सीधे तौर पर निर्देशित कर रहे हैं. ममता ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देश का गृहमंत्री खतरनाक है. उनकी आंखों में यह साफ दिखता है. एक आंख में ‘दुर्योधन’ दिखता है, और दूसरी में ‘दु:शासन’.’’ बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले एसआईआर का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘वे वोटों के लिए इतने भूखे हैं कि उन्होंने अब एसआईआर शुरू कर दिया है. अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम कट जाता है तो मैं तब तक धरना दूंगी, जब तक नाम जुड़ नहीं जाता. पश्चिम बंगाल में कोई निरुद्ध केंद्र नहीं बनेगा.’’ बनर्जी ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान जिलाधिकारियों पर डेढ़ करोड़ नाम काटे जाने का दबाव बनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार में आपने ऐसा कर लिया होगा, लेकिन बंगाल में नहीं कर सकते.’’ मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मसौदा मतदाता सूचियां भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के कहने पर तैयार की जा रही हैं.
मुख्यमंत्री ने उन खबरों का हवाला दिया कि लोगों ने अपने दस्तावेजों के तौर पर दादा-दादी के नाम दिए थे, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा और उनका नाम सूची से हटाया जा सकता है.
उन्होंने कहा, ‘‘अब हम सुन रहे हैं कि जिन्होंने अपने दादा-दादी के नाम दिए हैं, उन्हें बुलाया जाएगा, और योजना यह है कि इन सुनवाइयों से सीधे नाम हटा दिए जाएं.’’ बनर्जी ने कहा कि उन्होंने खुद अभी तक अपना गणना प्रपत्र नहीं भरा है.
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘क्या अब मुझे दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत है?’’ गृह मंत्री शाह ने बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा था कि देश में एक भी घुसपैठिये को नहीं रहने दिया जाएगा और अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े लोग बंगाल से गायब हो जाएंगे.
इस पर ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को तीखा पलटवार किया.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास एक (केंद्रीय) गृह मंत्री हैं जो सभी बंगालियों को बांग्लादेशी करार देकर उन्हें निरुद्ध केंद्रों में भेजने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन हम किसी को भी पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे. अगर किसी को जबरन निकाला जाता है तो उसे वापस लाने का तरीका हम बखूबी जानते हैं.’’ मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए भाजपा से जुड़े अधिकारियों को तैनात कर रहा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को प्रभावित करने और एसआईआर की सुनवाइयों पर नजर रखने के लिए दिल्ली से ऐसे लोग भेजे जा रहे हैं.
उन्होंने दावा किया, ‘‘पश्चिम बंगाल में स्थिति पर नजर रखने के लिए दिल्ली से भाजपा सर्मिथत कुछ लोगों को भेजा जा रहा है. केवल भाजपा की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों हो रही है?’’ ममता ने लाखों नाम हटाने की भाजपा की शिकायत का ज़क्रि करते हुए कहा, ‘‘भाजपा ने शिकायत की है. वे चाहते हैं कि उनके नाम को छोड़कर बाकी सभी के नाम हटा दिए जाएं.’’ उन्होंने चुनावों से पहले मतदाताओं को बांटने के लिए सत्ताधारी पार्टी द्वारा पैसे के कथित इस्तेमाल पर भी निशाना साधा.
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी चुनाव आते हैं, भाजपा पैसे से मतदाताओं को बांटने की कोशिश करती है. अपने वोटों को बंटने न दें.’’ कई राजनीतिक जानकारों का मानना ??है कि यह मुर्शिदाबाद में निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर की हाल की गतिविधियों की ओर एक इशारा था.
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उन्होंने अपना एसआईआर गणना-प्रपत्र नहीं भरा है. उन्होंने घोषणा की कि वह ऐसा तभी करेंगी जब हर आम नागरिक का फॉर्म स्वीकार कर लिया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘‘एक बीएलओ मेरे आवास स्थित कार्यालय आए. लेकिन मैंने खुद कोई फॉर्म नहीं लिया है. क्या अब मुझे दंगा करने वालों की पार्टी के सामने अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?’’ निर्वाचन आयोग के अधिकारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि मौजूदा मुख्यमंत्री होने के नाते बनर्जी पहले से ही ‘चिह्नित मतदाता’ के तौर पर पंजीकृत हैं, जिस श्रेणी में प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पद पर बैठे लोग शामिल हैं, और कानूनी तौर पर उन्हें गणना-प्रपत्र जमा करने की ज़रूरत नहीं है.
एसआईआर का पहला चरण बृहस्पतिवार को खत्म हो रहा है. मतदाता सूची का मसौदा 16 दिसंबर को घोषित किया जाएगा और सुनवाई तथा सत्यापन दिसंबर और जनवरी के मध्य तक जारी रहेगा.
अंतिम मतदाता सूची फरवरी के मध्य में प्रकाशित की जा सकती है.



