भोपाल: रावण दहन से पहले ही शरारती तत्वों ने एक पुतले को आग लगाई

भोपाल/उज्जैन. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बाग मुगलिया-आशिमा मॉल इलाके में दो अज्ञात लोग शाम को होने वाले रावण दहन से पहले ही बृहस्पतिवार सुबह उसके पुतले को आग के हवाले कर दिया और फरार हो गए. पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.
पुतले में आग लगने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. उसमें एक व्यक्ति यह दावा करते हुए सुना जा सकता है कि कथित तौर पर नशे में धुत एक पुरुष और एक महिला ने सुबह करीब छह बजे पुतले में आग लगा दी और फिर बिना नंबर प्लेट वाली लाल रंग की कार से दोनों भाग गए.

उसने दावा किया कि पुतला जलाने से पहले दोनों काफी देर से इलाके में घूम रहे थे.सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रजनीश कश्यप ने बताया कि पंडित अटल बिहारी वाजपेयी उत्सव समिति के अध्यक्ष आदित्य राम दुबे ने इस घटना के सिलसिले में मिसरोद थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.
यह धारा धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से संबंधित है.

दुबे ने अपनी शिकायत में कहा कि इस कृत्य से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. एसीपी ने बताया कि इस घटना में शामिल लोगों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में दशहरा की शाम को परंपरा के तहत रावण के पुतलों का दहन किया जाता है.

रावण दहन से पहले उज्जैन में गिरा पुतला

मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित दशहरा मैदान में बृहस्पतिवार शाम रावण दहन से कुछ देर पहले ही तेज हवा और बारिश के कारण दशानन का पुतला जमीन पर गिर गया. आयोजन समिति के एक सदस्य ने यह जानकारी दी. हालांकि इसके बावजूद रावण के पुतले का प्रतीक स्वरूप दहन किया गया और आतिशबाजी भी की गई.

रावण दहन देखने पहुंची रचना वाडिया नामक एक महिला ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ”जैसे ही हमलोग यहां पहुंचे, रावण गिर पड़ा. पहले सीधा खड़ा था. वह तीन हिस्सों में गिर गया. पहले सिर उसके बाद धड़ और फिर शेष हिस्सा गिर गया.” आयोजन समिति के सदस्य मनीष शर्मा ने कहा कि तेज हवा और आंधी की वजह से रावण का पुतला गिर गया. उन्होंने कहा,”प्राकृतिक घटना के कारण रावण स्वयं धराशाई हो गया.” उन्होंने कहा कि पूर्व की तैयारियों के हिसाब से रावण का दहन होगा और आतिशबाजी की जाएगी.
बाद में रावण के पुतले का प्रतीक स्वरूप दहन किया गया और आतिशबाजी भी की गई.

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