
नयी दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में ‘एल्डरमैन’ नामित करने के उपराज्यपाल के अधिकार को बरकरार रखने संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले से ”सम्मानपूर्वक असहमति” व्यक्त करती है और यह निर्णय भारत के लोकतंत्र के लिए एक ”बड़ा झटका” है. आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला उपराज्यपाल को जनता द्वारा चुनी गई सरकार की अनदेखी करने का अधिकार देता है. उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली की आप सरकार को बड़ा झटका देते हुए सोमवार को कहा कि उपराज्यपाल के पास एमसीडी में ‘एल्डरमैन’ नामित करने का अधिकार है.
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने दिल्ली सरकार की यह दलील खारिज कर दी कि उपराज्यपाल एमसीडी में ‘एल्डरमैन’ नामित करने के संबंध में मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं.
न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने एक बयान में कहा, ”यह भारत के लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका है. निर्वाचित सरकार की अनदेखी कर, आप उपराज्यपाल को सभी शक्तियां दे रहे हैं, ताकि वह दिल्ली की सरकार चले सकें.” राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”यह लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए अच्छा नहीं है. हम उच्चतम न्यायालय के फैसले के प्रति सम्मानपूर्वक असहमति जताते हैं.” उन्होंने कहा कि यह फैसला ”दुर्भाग्यपूर्ण” और ”लोकतंत्र की भावना के खिलाफ” है. उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर करीब 15 महीने तक फैसला सुरक्षित रखा.
सिंह ने कहा, ”अदालत का फैसला इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों द्वारा की गई टिप्पणियों से पूरी तरह अलग है. दूसरे राज्यों में, राज्यपाल, निर्वाचित सरकार की सलाह पर मनोनीत सदस्यों के नामों को स्वीकृति देते हैं.” आप नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा कि पार्टी इस लिखित आदेश का अध्ययन करेगी. आतिशी ने कहा, ” हम इस फैसले से सम्मानपूर्वक असहमति जताते हैं, क्योंकि यदि निर्वाचित सरकार की अनदेखी की जाती है, जनादेश को दरकिनार किया जाता है, एमसीडी के बहुमत को बदल दिया जाता है और एक नामित व्यक्ति निर्णय लेता है, तो मुझे लगता है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरा है.” एमसीडी में 250 निर्वाचित और 10 नामित सदस्य हैं.
दिसंबर 2022 में ‘आप’ ने नगर निगम चुनाव में 134 वार्ड में जीत के साथ एमसीडी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया था. भाजपा ने 104 सीट जीती थीं, जबकि कांग्रेस नौ सीट के साथ तीसरे स्थान पर रही थी.



