
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता और टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते हुए उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए और हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार को 15 वर्षों के कथित अराजक शासन का परिणाम बताया।
15 साल के अराजक शासन का अंत – सुखेंदु शेखर राय
अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारी जनादेश देकर टीएमसी के 15 साल के शासन को समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन के दौरान व्यापक भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, उद्योगों की कमी, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति और रोजगार के अवसरों की कमी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं।
राज्यसभा के पद और टीएमसी दोनों से इस्तीफा
सुखेंदु शेखर ने कहा कि जनता के ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने राज्यसभा और टीएमसी दोनों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने नई भाजपा सरकार की भी सराहना की और कहा कि सरकार अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार पश्चिम बंगाल के विकास और पुनर्निर्माण के लिए कदम उठा रही है। सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और असंतोष की चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी के कई सांसद और विधायक नेतृत्व से नाराज हैं।
सुखेंदु शेखर राय ने आरजीकर हत्याकांड का किया जिक्र
राज्यसभा सांसद पद और टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद, सुखेंदु शेखर राय ने आरजी कर हत्याकांड और दुष्कर्म की घटना पर कहा, ‘सत्ता का नशा उनके (टीएमसी) सिर पर इस हद तक चढ़ गया था कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई उन्हें छू नहीं सकता’।



