दिल्ली में कथित ‘संवैधानिक संकट’ को लेकर भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

नयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और मुख्यमंत्री अरंिवद केजरीवाल के जेल जाने के मद्देनजर कथित ‘‘संवैधानिक संकट’ का हवाला देते हुए दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

भाजपा पर निशाना साधते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने उस पर संविधान के प्रति कोई सम्मान नहीं रखने और राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव होने से पहले ही हार स्वीकार करने का आरोप लगाया। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और औपचारिक रूप से उनसे दिल्ली में जारी संवैधानिक संकट में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की तथा ‘आप’ सरकार के कामकाज को लेकर ंिचता जताई।

ज्ञापन में कहा गया है कि ‘आप’ सरकार ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री अरंिवद केजरीवाल भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में चार महीने से अधिक समय से जेल में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘केजरीवाल ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जिससे अजीब स्थिति पैदा हो गई है।

दिल्ली में शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में देरी हो रही है और आवश्यक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिसका सीधा असर दिल्ली के नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है।’’ राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में ‘आप’ सरकार पर ‘‘महत्वपूर्ण संवैधानिक उल्लंघन’’ का आरोप लगाया गया।

ज्ञापन में सरकार में कथित भ्रष्टाचार और दिल्ली में केंद्र की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में बाधा डालने का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘इन संवैधानिक उल्लंघनों और शासन की विफलताओं के मद्देनजर हम, दिल्ली विधानसभा के सदस्य, विनम्र आग्रह करते हैं कि आप इस मामले का संज्ञान लें और दिल्ली सरकार को बर्खास्त करें।’’

भाजपा पर निशाना साधते हुए ‘आप’ ने कहा कि जहां भी भाजपा चुनाव नहीं जीत पाती, वहां वह निर्वाचित राज्य सरकार के काम में बाधा डालने के एकमात्र उद्देश्य से ‘‘समानांतर सरकार’’ चलाने का प्रयास करती है।
‘आप’ ने एक बयान में कहा, ‘‘अरंिवद केजरीवाल सरकार को बर्खास्त करने के लिए भाजपा द्वारा भारत की राष्ट्रपति के पास जाना दिखाता है कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही हार स्वीकार कर ली है।’’

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