राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे, जो जनवरी 2025 से इस पद पर बने हुए थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा छह राज्यों में किए गए राज्यपालों के व्यापक फेरबदल और नई नियुक्तियों का हिस्सा है। ये सभी नियुक्तियां पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।
राष्ट्रपति भवन द्वारा घोषित अन्य फेरबदल के तहत, वर्तमान में सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, सुधा यादव को कर्नाटक और ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
झारखंड से ताल्लुक रखने वाले ब्रज मोहन राम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख दलित नेता हैं और धोबी समुदाय से आते हैं। एक कृषक परिवार में जन्मे ब्रज मोहन राम का विधायी और सामाजिक सेवा का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। उन्होंने अविभाजित बिहार में विधायक के रूप में कार्य किया और इसके बाद पलामू संसदीय क्षेत्र से तीन बार (1996, 1998 और 1999) लोकसभा सांसद चुने गए।
राजनीतिक जीवन के अलावा, उन्होंने राज्य अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई है और धोबी महासंघ से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने चंदवा क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी यह नियुक्ति जमीनी नेतृत्व, दलित समुदाय के सशक्तिकरण और दशकों के विधायी व सामाजिक कार्यों के प्रति उनके योगदान का सम्मान है।
ओडिशा के निवर्तमान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण किया था। वह लगभग एक वर्ष और नौ महीने तक ओडिशा के राज्यपाल पद पर रहे।
ब्रज मोहन राम के नए राज्यपाल बनने से ओडिशा के प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। उनके समृद्ध विधायी अनुभव और सामाजिक सरोकारों का लाभ राज्य को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।