सीएए जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल राजनीतिक हथियार; खोदा पहाड़ निकला चूहा : सुष्मिता देव

सिलचर. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने दावा किया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) एक जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक हथियार है जिसकी ‘प्रभाव-शून्यता’ उजागर हो गई है. ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि जब सीएए संसद में पारित हुआ तो बहुत से हिंदू उत्साहित थे, लेकिन अब यह ‘खोदा पहाड़ निकला चूहा’ बन गया है क्योंकि लोगों से बांग्लादेश के स्कूल प्रमाणपत्र और पासपोर्ट जमा करने के लिए कहा जा रहा है.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान आरोप लगाया कि असम में सीएए विरोधी आंदोलन ‘झूठ पर आधारित’ है और जिन लोगों ने इसका नेतृत्व किया, उन्हें लोगों को जवाब देना होगा. सिलचर सीट से पूर्व लोकसभा सदस्य देव ने कहा, ”कानून लाने के बाद भाजपा नीत केंद्र सरकार ने इसे एक निष्प्रभावी कानून के रूप में चार साल तक लटकाए रखा और अब उन्होंने इसे इसके नियमों और विनियमों के कारण (लोगों के लिए) लगभग असंभव विकल्प बना दिया है.”

उन्होंने आरोप लगाया, ”असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अद्यतन करने के दौरान हम बंगाली हिंदुओं को भारतीय स्कूल का प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज जमा करके यह साबित करना पड़ा कि हम भारतीय हैं, लेकिन सीएए में हमें बांग्लादेश के दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जा रहा है.” देव ने कहा, ”इसलिए सीएए बेनकाब हो गया है… यह एक अत्यधिक इस्तेमाल किया गया राजनीतिक उपकरण है जिसका कोई भविष्य नहीं है.” 11 दिसंबर, 2019 को लागू होने के चार साल बाद 11 मार्च को सीएए नियमों को अधिसूचित किया गया था. यह कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए पीड़ित हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए है.

टीएमसी सांसद ने कहा कि चुनाव में महंगाई एक बड़ा मुद्दा है और लोग भय और अत्याचार की राजनीति से पूरी तरह तंग आ चुके हैं.
उन्होंने दावा किया, ”आप सोशल मीडिया पर स्वतंत्र रूप से नहीं लिख सकते, आप सरकार के खिलाफ नहीं बोल सकते… गुस्सा और हताशा बढ़ रही है. जो सर्वेक्षण सामने आए हैं, उनके विपरीत मेरा मानना ????है कि देश के लोग मौजूदा शासन से खुश नहीं हैं और पूरे देश में मंथन चल रहा है.” देव ने कहा कि भाजपा के लिए 400 सीट का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है क्योंकि ”भगवा पार्टी अपने ठहराव बिंदु पर पहुंच गई है.” उन्होंने कहा कि उनको नहीं लगता कि वे 200 का आंकड़ा पार कर पाएंगे.

देव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह सही हैं, अन्यथा देश खतरे में है. भाजपा पर दक्षिणी असम में बराक घाटी के बंगाली हिंदुओं और मुसलमानों को उपेक्षा के माध्यम से ‘व्यावहारिक रूप से खत्म’ करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी का नारा है, ”अपनी गरिमा के लिए लड़ो.” टीएमसी असम में सिलचर सहित चार लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है और देव ने जोर देकर कहा कि लोग एक विकल्प की तलाश में हैं. उन्होंने दावा किया कि सिलचर लोकसभा सीट पर भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर अधिक है और लोग टीएमसी को एक नए विकल्प के रूप में देख रहे हैं. लोकसभा की पूर्व सदस्य ने पिछला चुनाव हारने से पहले वर्ष 2014 से 2019 तक सिलचर सीट का प्रतिनिधित्व किया था.

वर्ष 2026 के असम विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की योजनाओं पर उन्होंने कहा, ”इस लोकसभा चुनाव में हम राज्य की 14 सीट में से केवल चार सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इसलिए हम इसे ‘ट्रेलर’ बता रहे हैं. अगर सब कुछ ठीक रहा, मैं अति आत्मविश्वास नहीं दिखाना चाहती, तो हमारा लक्ष्य विधानसभा की आधी से अधिक सीट पर उम्मीदवार खड़े करने का है.” असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल टीएमसी का प्रतिनिधित्व नहीं है.

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