बीएलओ ‘आत्महत्या’ मामले में मुख्यमंत्री के दावों की जांच की जानी चाहिए : राज्यपाल बोस

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में जारी ‘एसआईआर’ के दौरान बीएलओ द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने के मामले को लेकर उपजे विवाद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने रविवार को कहा कि जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए और मुख्यमंत्री की चिंताओं की विस्तृत रूप से समीक्षा की जानी चाहिए.
बनर्जी ने शनिवार को एक बीएलओ का “सुसाइड नोट” सोशल मीडिया पर साझा किया और दावा किया था कि मृतक ने इसके लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है.

राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में बोस ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर है. मुख्यमंत्री ने जो बात उठाई है, उसकी विस्तार से जांच करनी होगी.” राज्यपाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग का संतुलित दृष्टिकोण” है, और “इन सभी मुद्दों की सही तरह से जांच करके उपयुक्त समाधान निकाले जा सकते हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि बेहद सावधानीपूर्वक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

सत्तारू­ढ़ तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि चार नवंबर से जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बीएलओ समेत 30 से अधिक लोग मारे गए हैं. पार्टी ने निर्वाचन आयोग से इन मौतों की जिम्मेदारी लेने की मांग की है. बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”एक और बीएलओ, एक महिला पैरा-शिक्षक की मौत की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा है, जिसने आज कृष्णानगर में आत्महत्या कर ली. एसी-82 छपरा के भाग संख्या 201 की बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपने आवास पर आत्महत्या करने से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट (प्रतिलिपि संलग्न करते हुए) में निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है.” मुख्यमंत्री ने 19 नवंबर को दावा किया था कि जलपाईगुड़ी के माल इलाके में एक बूथ-स्तरीय अधिकारी शांति मुणि एक्का ने एसआईआर कार्य के “असहनीय दबाव” के कारण आत्महत्या कर ली थी.

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