चीन व कंबोडिया ने विवादास्पद नौसैन्य बंदरगाह विस्तार परियोजना की शुरुआत की

नोम पेन्ह. चीन और कंबोडिया के अधिकारियों ने विवादास्पद नौसैन्य बंदरगाह विस्तार परियोजना की बुधवार को शुरुआत की तथा अमेरिका की इन चिंताओं को खारिज किया कि थाईलैंड की खाड़ी में इस बंदरगाह का इस्तेमाल चीन नौसैन्य ठिकाने के तौर पर कर सकता है.

कंबोडिया के रक्षा मंत्री टी बान्ह, कंबोडिया में चीन के राजदूत वांग वेंतियान और अन्य अधिकारियों ने ‘रीम नेवल बेस’ की आधिकारिक ‘‘आधुनिकीकरण’’ परियोजना का उद्घाटन किया. इस परियोजना के तहत बंदरगाह में पोतों की मरम्मत के लिए एक सूखी गोदी, एक विस्तारित घाट, एक अस्पताल, एक कार्यशाला और एक ‘‘स्वागत भवन’’ बनाया जाएगा. ऐसा बताया जाता है कि कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने 2019 में चीन को रीम में सैन्य अड्डा बनाने का अधिकार दे दिया था, लेकिन वह लंबे समय से इस बात से इनकार करते रहे हैं. उनका कहना है कि कंबोडिया का संविधान विदेशी सैन्य सुविधाओं की अनुमति नहीं देता.

उद्घाटन के मौके पर बान्ह ने अमेरिकी अधिकारियों समेत मेहमानों से कहा, ‘‘कृपया रीम अड्डे को लेकर बहुत अधिक चिंतित न हों.’’ इस परियोजना को ‘पीपुल्स रिपब्लिक आॅफ चीन’ (पीआरसी) की वित्तीय मदद से बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘यह बंदरगाह अब भी बहुत छोटा है और इसके उन्नयन के बाद भी यह किसी देश के लिए खतरा नहीं हो सकता.’’ बान्ह ने कहा कि उन्होंने अमेरिका और अन्य विदेशी प्रतिनिधियों को इसलिए आमंत्रित किया ताकि वे स्वयं देख सकें कि ‘‘यहां कुछ नहीं है.’’ बहरहाल, उन्होंने कहा कि एक बार निर्माण पूरा हो जाने के बाद यह केंद्र एक प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र बन जाएगा, जहां अन्य देशों को पहुंच नहीं होगी.

समारोह के बाद नोम पेन्ह में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी चिंताओं को दोहराया कि ‘‘रीम में चीनी सैन्य मौजूदगी कंबोडिया की स्वायत्तता के लिए खतरा हो सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती है.’’ अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता स्टेफनी अर्जेट ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को भेजे एक ईमेल में कहा, ‘‘अमेरिका और क्षेत्र के अन्य देशों ने इस परियोजना के इरादे, प्रकृति और दायरे में पारर्दिशता की कमी के साथ-साथ इसके निर्माण में और निर्माण के बाद उसके उपयोग में पीआरसी की भूमिका को लेकर चिंता व्यक्त की है.’’ इससे पहले, कंबोडिया सरकार के मुख्य प्रवक्ता फे सिफान ने कहा था कि रीम नौसेना ठिकाने का विस्तार ‘‘चीन और कंबोडिया के सहयोग’’का प्रतीक है.

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