चीन की सेना लड़ने और जीतने के लिए सैन्य प्रशिक्षण, लड़ाकू तैयारियां बढ़ाएगी: राष्ट्रपति चिनफिंग

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 16 Oct 2022 10:22 PM
चीन की सेना लड़ने और जीतने के लिए सैन्य प्रशिक्षण, लड़ाकू तैयारियां बढ़ाएगी: राष्ट्रपति चिनफिंग
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बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी चिनंिफग ने रविवार को कहा कि उनकी अगुवाई में चीन की सेना ‘रणनीतिक प्रतिरोध’ की मजबूत  प्रणाली बनाने के साथ ही ‘लड़ने और जीतने’ के लिए सैन्य प्रशिक्षण तथा लड़ाकू तैयारियों को तेज करेगी. शी ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की पांच साल में एक बार होने वाली कांग्रेस में अपनी कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए यह बात कही. कांग्रेस का सप्ताह भर चलने वाला सत्र रविवार को यहां शुरू हुआ.

उन्होंने कहा, ‘‘हम सैन्य प्रशिक्षण तेज करेंगे और हर स्तर पर लड़ाकू तैयारियों को बढ़ाएंगे ताकि हमारे सशस्त्र बल लड़ें और जीतें.’’ पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सर्वोच्च कमान केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) की अगुवाई करने वाले शी ने अपनी 63 पन्नों की रिपोर्ट में एक विशेष हिस्सा सेना को सर्मिपत किया है.

भारत .चीन सीमा पर, विशेषकर मई 2020 से पूर्वी लद्दाख में टकराव की स्थिति को देखते हुए शी की योजना भारतीय सैन्य बलों के लिहाज से भी गौर करने वाली लगती हैं. चीन की पीएलए की हमले वाली कार्रवाइयों के कारण मई 2020 में टकराव पैदा हुआ था जिसके बाद द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आ गया था.

दोनों पक्षों ने 16 दौर की वार्ता के माध्यम से कुछ मुद्दों का हल निकाला है और लंबित विषयों के समाधान के लिए और अधिक बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. शी ने स्थानीय जंग और सीमा मुद्दों का जिक्र करते हुए किसी देश विशेष का नाम नहीं लिया. हालांकि सीपीसी की कांग्रेस में चीन के सैन्य कमांडर की फबाओ पीएलए की ओर से शामिल 304 प्रतिनिधियों में शामिल थे. फबाओ जून 2020 में गल्वान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ संघर्ष में घायल हो गये थे.

शी और अन्य नेताओं के कार्यक्रम स्थल में ‘ग्रेट हॉल आॅफ पीपल’ पहुंचने से पहले वहां बड़ी स्क्रीनों पर पीएलए के गल्वान में हुए संघर्ष के वीडियो फुटेज के हिस्से चलाये गये जिसमें की फबाओ शामिल थे. अपनी रिपोर्ट में शी ने कहा कि 2027 में पीएलए के पूर्ण सत्र के लक्ष्यों को प्राप्त करना तथा चीन के सशस्त्र बलों को और अधिक तेजी से विश्वस्तरीय मानकों तक पहुंचाना एक आधुनिक समाजवादी देश के निर्माण के लिए रणनीतिक कार्य हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘हम रणनीतिक प्रतिरोध की मजबूत प्रणाली स्थापित करेंगे, नयी लड़ाकू क्षमताओं के साथ नये क्षेत्रीय बलों का अनुपात बढ़ाएंगे, मानवरहित एवं कुशाग्र लड़ाकू क्षमताओं के विकास को गति प्रदान करेंगे और नेटवर्क सूचना प्रणाली के समन्वित विकास और अनुप्रयोग को बढ़ावा देंगे.’’ शी ने कहा, ‘‘हम संयुक्त परिचालनों के लिए कमान प्रणाली को उन्नत करेंगे और निगरानी और त्वरित चेतावनी, संयुक्त हमलों, युद्ध क्षेत्रों में सहयोग एवं एकीकृत साजो-सामान समर्थन के लिए अपनी प्रणाली और क्षमता का विस्तार करेंगे.’’ संसाधन संपन्न ंिहद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य अभियानों के बीच शी के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रूनेई, मलेशिया और वियतनाम इसके हिस्सों पर अपना दावा करते हैं. बींिजग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाये हैं. चीन के पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ भी क्षेत्रीय विवाद चल रहा है.

शी ने कहा, ‘‘हम नियमित आधार पर और विविध प्रकार से अपने सैन्य बलों को तैनात करने में सक्षम बनेंगे और हमारी सेना अपने अभियानों में दृढ़ और लचीला दोनों तरह का रुख रखेगी. यह हमें हमारे सुरक्षा अवस्थाओं को आकार देने, संकटों तथा संघर्षों का प्रतिरोध और प्रबंधन करने तथा स्थानीय युद्धों को जीतने में समर्थ बनाएगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सेना और सरकार के बीच तथा सेना और जनता के बीच एकता को मजबूत करेंगे.’’

चिनफिंग ने किया आगाह: ताइवान को मिलाने के लिए चीन बलप्रयोग का विकल्प नहीं छोड़ेगा

चीन की सत्ता में रिकॉर्ड तीसरी बार एवं संभवत: आजीवन रहने को तैयार राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रविवार को आगाह किया कि ताइवान को मुख्य भूभाग में फिर से मिलाने के लिए चीन ‘बल प्रयोग करने का विकल्प नहीं छोड़ेगा.’ इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकासात्मक हितों की रक्षा के लिए देश की सेना के आधुनिकीकरण को विश्व स्तर के मानकों के अनुरूप करने का संकल्प लिया.

ताइवान खुद को एक संप्रभु देश मानता है, लेकिन चीन इस स्वशासित द्वीप को अपने देश का ही एक अलग हुआ हिस्सा मानता है और चीन ने ताइवान को अपने भूभाग में मिलाने के लिए बल के संभावित इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है. चिनफिंग ने सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर कहा, ‘‘हम बल प्रयोग का विकल्प नहीं छोड़ेंगे और सभी अलगाववादी आंदोलनों को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेंगे.’’ ऐसी संभावना है कि चिनफिंग को छोड़कर, दूसरे नंबर के नेता एवं प्रधानमंत्री ली ंिक्वग सहित पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं को कांग्रेस के दौरान बदल दिया जाएगा या उनमें फेरबदल किया जाएगा, क्योंकि चिनफिंग के नेतृत्व वाला प्रशासन 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहा है.

हालांकि, ऐसी उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस चिनफिंग के रिकॉर्ड तीसरी बार पद पर बने रहने का समर्थन करेगी, क्योंकि उन्हें पहले ही पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के समान ‘मुख्य नेता’ घोषित किया जा चुका है. जिस वक्त चिनफिंग ने ताइवान को चीन के मुख्य भूभाग में विलय का संकल्प लिया, कांग्रेस में हिस्सा ले रहे 2,300 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि लंबे समय तक तालियां बजाते रहे.

सीपीसी के महासचिव चिनफिंग ने कहा कि पार्टी को ताइवान मुद्दे को सुलझाने के लिए अपनी रणनीति पर दृढ़ रहना चाहिए और ताइवान के चीन में विलय को लेकर दृढ़ संकल्पित होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ताइवान का मुद्दा चीन का मामला है. यह ऐसा मामला है, जिसे चीनियों को ही सुलझाना चाहिए.’’ अगस्त में अमेरिकी नेता नैन्सी पेलोसी की यात्रा के बाद चीन ने ताइवान द्वीप के इर्द-गिर्द गहन सैन्य अभ्यास किया और मिसाइलें दागीं, जिससे यह चिंता उत्पन्न हो गई थी कि चीन आक्रमण के लिए जमीन तैयार कर सकता है.

चिनफिंग ने कहा कि इतिहास का पहिया चीन के पुर्निमलन और चीनी राष्ट्र के कायाकल्प की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘हम जलडमरूमध्य के दोनों ओर के लोगों को चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने और घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.’’ चिनफिंग ने राष्ट्रीय रक्षा तथा सेना को और आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया. अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान, चिनफिंग ने सेना को मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं.

चिनफिंग ने सीपीसी कांग्रेस में कहा: चीन एकपक्षवाद का विरोध करता है, कुछ विशिष्ट समूह खास देशों के खिलाफ

चीन ने क्वाड जैसे समूहों का पुरजोर विरोध जारी रखने का संकेत देते हुए रविवार को कहा कि यह सभी प्रकार के एकपक्षवाद और विशेष राष्ट्रों के खिलाफ लक्षित गुटों और विशेष समूहों के गठन का विरोध करता है. राष्ट्रपति शी चिनंिफग ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में सौंपी गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की सप्ताह भर चलने वाली 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस आज यहां शुरू हुई. पार्टी के महासचिव चिनंिफग ने हर पांच साल में एक बार आयोजित होने वाली सीपीसी कांग्रेस में एक कार्य रिपोर्ट सौंपी.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से कहा गया है कि चीन संयुक्त राष्ट्र और इसके मूल में स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने के लिए कृत संकल्प है. चीन का मानना है कि इसके मूल में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों तथा सिद्धांतों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंड शामिल हैं.

आॅस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के गठजोड़ (एयूकेयूएस) के अलावा चीन क्वाड गठबंधन का विरोध करता है, जिसमें अमेरिका, भारत, आॅस्ट्रेलिया और जापान शामिल है. चीन का कहना है कि इन समूहों का उद्देश्य चीन के उभार को रोकना है. चीन के बढ़ते सैन्य युद्धाभ्यास की पृष्ठभूमि में क्वाड इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र, मुक्त और संपन्न हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने की आवश्यकता की वकालत करता है. अमेरिका ने कहा था कि एयूकेयूएस प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के खिलाफ ‘निवारक’ के रूप में कार्य करेगा.

चीन लगभग सम्पूर्ण विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम सभी इसके कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं. बींिजग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं. चीन का पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ समुद्री क्षेत्रीय विवाद भी है.

सीपीसी कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए चिनंिफग ने कहा कि चीन सभी प्रकार के आधिपत्य और सत्ता की राजनीति, शीत युद्ध की मानसिकता, अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और दोहरे मापदंड के खिलाफ मजबूती से खड़ा है.
सीपीसी कांग्रेस में उन्होंने कहा कि चीन कभी भी आधिपत्य या विस्तारवाद की नीति में शामिल नहीं होगा. उन्होंने कहा कि चीन अन्य देशों के साथ मित्रता और सहयोग आगे बढ़ाने में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों का पालन करता है. चिनंिफग ने कहा कि चीन एक नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने, समानता, खुलेपन और सहयोग के आधार पर वैश्विक साझेदारी को गहरा और विस्तारित करने तथा अन्य देशों के साथ साझे हितों को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

चीन संरक्षणवाद और अलगाववाद का विरोध करता है : शी चिनंिफग
चीन के राष्ट्रपति शी चिनंिफग ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि उनका देश संरक्षणवाद और अलगाववाद का विरोध करता है. उन्होंने यहां सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के एक महत्वपूर्ण अधिवेशन में कहा कि चीन आर्थिक वैश्वीकरण के सही रास्ते पर चलता है.

सप्ताह भर चलने वाले कम्युनिस्ट पार्टी के 20वें अधिवेशन में शी को रिकॉर्ड तीसरी बार पांच साल के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित किया जा सकता है. शी ने कहा कि चीन व्यापार व निवेश, उदारीकरण व सेवाओं को प्रोत्साहित करने, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापक आर्थिक समन्वय नीति को बढ़ावा देने का प्रयास करता है.

उन्होंने कहा कि चीन संरक्षणवाद, बाड़बंदी और अवरोधकों के निर्माण, अलगाववाद, औद्योगिक व आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, एकतरफा प्रतिबंध और अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति का विरोध करता है. शी ने कहा कि चीन अन्य देशों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि विकास के लिए अनुकूल अंतरराष्ट्रीय वातावरण को बढ़ावा दिया जा सके और वैश्विक विकास के लिए नए संचालक तैयार किए जा सकें.

अमेरिका ने दूरसंचार उपकरण कंपनी हुआवेई सहित कई चीनी उच्च प्रौद्योगिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. चीन का आरोप है कि इसका उद्देश्य इसके विकास को रोकना है. शी ने कहा कि चीन वैश्वीकरण के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है क्योंकि यह दुनिया में माल का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है, जिसने इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि देश आधुनिक अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.

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