नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी को बृहस्पतिवार को फटकार लगाई और उन्हें सोशल मीडिया मंचों एवं राष्ट्रीय समाचार पत्रों में बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ ने कहा कि ललित मोदी कानून व संस्थान से ऊपर नहीं हैं और इस तरह के आचरण की पुनरावृत्ति को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा.
शीर्ष अदालत ने उन्हें माफी मांगने से पहले एक हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया, जिसमें कहा जाए कि भविष्य में ऐसी कोई टिप्पणी (पोस्ट) नहीं की जाएगी जो भारतीय न्यायपालिका की छवि को धूमिल करती हो. पीठ ने कहा, “हमने प्रतिवादी (ललित मोदी) द्वारा दायर जवाबी हलफनामे पर गौर किया है. हम दिए गए स्पष्टीकरण से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. हमारा विचार है कि स्पष्टीकरण भी न्यायपालिका की छवि को खराब करेगा.”
पीठ ने मामले को 24 अप्रैल को सुनवाई के लिए स्थगित करते हुए कहा, “प्रतिवादी के वकील ए एम सिंघवी ने बार में कहा है कि सभी सोशल मीडिया मंचों पर बिना शर्त माफी मांगी जाएगी, जहां उनके फॉलोवर हैं और दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, मद्रास और कोलकाता संस्करणों के प्रमुख समाचार पत्रों में भी माफी मांगी जाएगी.’’ अवमानना ??याचिका दायर करने वाले सी. यू. सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि ललित मोदी ने 30 मार्च, 2023 को एक ट्वीट किया था जिससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है.
सिंह ने कहा कि ललित मोदी ने न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की और यह माफी सजा से बचने के लिए है. उन्होंने दावा किया कि ललित मोदी के ट्विटर पर 30 लाख और इंस्टाग्राम पर 40 लाख फॉलोवर हैं तथा पूर्व क्रिकेट प्रशासक को सभी सोशल मीडिया मंचों पर अपनी माफी प्रकाशित करनी चाहिए. ललित मोदी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने जैसे ही अपनी दलीलें शुरू कीं, सर्वोच्च अदालत ने आईपीएल के पूर्व प्रमुख के खिलाफ तीखी टिप्पणियां कीं.
पीठ ने कहा, ”उनके इस बयान का क्या अर्थ है कि न्यायाधीश फलां की जेब में हैं? क्या उन्हें लगता है कि न्यायपालिका कमजोर है? अदालत से माफी कहां है? पहले आप बिना शर्त माफी मांगें. अन्यथा अवमानना मानी जाएगी. माफी सार्वजनिक रूप से मांगी जाए. उन्हें कहना चाहिए कि मुझे भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा है.’’
पीठ ने कहा, ‘‘हमें सिर्फ कागज पर अदालत में माफी पर विश्वास नहीं है. अगर इस तरह का बयान सार्वजनिक रूप से दिया गया है, तो जनता को जानकारी होनी चाहिए कि उसने माफी मांगी है. हर कोई सोचता है कि वह न्यायपालिका के खिलाफ आरोप लगाएगा और हम उसे सहन करेंगे.” सिंघवी ने कहा कि उन्होंने अदालत की बात स्पष्ट रूप से समझ ली है और पीठ को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल माफी मांगेंगे. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘उनकी यह धारणा रही होगी कि वह कुछ भी खरीद सकते हैं लेकिन वह कानून और संस्था से ऊपर नहीं हैं.’’