
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह सुझाव ”लोकतंत्र के लिए राहत” और ”सबसे बड़ी बात” है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है.
पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह उम्मीद भी जताई कि निर्वाचन आयोग शीर्ष अदालत के सुझाव पर अमल करेगा.
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग को बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जारी रखने की अनुमति देते हुए इसे ”संवैधानिक दायित्व” बताया.
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस कवायद के समय को लेकर सवाल भी उठाया और कहा कि बिहार में एसआईआर के दौरान आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर दस्तावेज के तौर पर विचार किया जा सकता है.
वेणुगोपाल ने संवाददाताओं को बताया, ”मुझे फ.ैसले की पूरी जानकारी नहीं है. बुनियादी रूप से यह लोकतंत्र के लिए राहत है. हालांकि अब इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है.” उन्होंने कहा, ”निर्वाचन आयोग ने सुझाव दिया है कि आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा हों. यह सबसे बड़ी बात है. न्यायालय ने अपने विचार व्यक्त किए हैं. मुझे लगता है कि निर्वाचन आयोग उच्चतम न्यायालय के सुझावों के मुताबिक कदम उठाएगा.”
वड़ोदरा में पुल ढहने और ऐसी दूसरी घटनाओं की एसआईटी जांच होनी चाहिए : कांग्रेस
कांग्रेस ने गुजरात के वडोदरा में एक पुल ढहने की घटना को लेकर बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा और कहा कि ऐसी 16 घटनाओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन होना चाहिए. पार्टी नेता जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि अगर एसआईटी का गठन नहीं होता है तो कांग्रेस सड़क पर उतरेगी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का इस्तीफा मांगेगी.
मेवाणी ने संवाददाताओं से कहा, ”गुजरात में भाजपा सरकार और उनके भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत के कारण प्रदेश भर में पिछले कुछ साल में कई दुर्घटनाएं हुई हैं. करीब तीन साल पहले मोरबी में सरकार की लापरवाही से 135 लोगों की जान चली गई. वडोदरा में नाव पलटने से बच्चों समेत 14 लोगों की मौत हो गई थी. कुछ महीने पहले डीसा की एक फैक्ट्री में आग लगने से करीब 22 लोगों की मौत हो गई थी.” उन्होंने कहा, ”गुजरात की भाजपा सरकार ने मानो तय कर लिया है कि गुजरात में दुर्घटना में जान गंवाइए और चार लाख रुपये का मुआवजा ले जाइए. यानी यहां आम जनता की जान की कीमत मात्र चार लाख रुपये है.” कांग्रेस नेता ने दावा किया कि गुजरात में जिन कंपनियों को पहले काली सूची में डाला गया था, उन्हें भाजपा को चंदा देने पर दोबारा ठेका मिल जाता है.
मेवाणी ने कहा, ”गुजरात में पिछले चार साल में कम से कम 16 बार पुल गिरने की दुर्घटनाएं हुई है, लेकिन एक भी आदमी ऐसे मामलों में जेल नहीं गया. हमारी मांग है कि एक एसआईटी बनाकर हाल में हुई घटना के साथ, पिछले 16 मामलों की जांच की जाए. इस एसआईटी में स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों को शामिल किया जाए.” वडोदरा में बुधवार सुबह लगभग चार दशक पुराने एक पुल का कुछ हिस्सा ढह जाने के कारण 15 लोगों की मौत हो गई.



