कांग्रेस ने भारत मंडपम में जलभराव का वीडियो साझा किया, कहा-सरकार के खोखले विकास की खुल गई पोल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 10 Sep 2023 08:35 PM
कांग्रेस ने भारत मंडपम में जलभराव का वीडियो साझा किया, कहा-सरकार के खोखले विकास की खुल गई पोल
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने जी20 शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए नवनिर्मित भारत मंडपम में जलभराव होने का एक वीडियो रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया, और कहा कि इससे मोदी सरकार के ‘खोखले विकास’ की पोल खुल गई है. वीडियो में, लोगों को जलभराव वाले एक रास्ते से गुजरते देखा जा सकता है.

कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में कहा, ”खोखले विकास की पोल खुल गई. जी20 के लिए भारत मंडपम तैयार किया गया…2,700 करोड़ रुपये लगा दिये गए. एक बारिश में पानी फिर गया….” पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ‘एक्स’ पर वीडियो साझा करते हुए कहा, ”मशीन की मदद से पानी निकालने की कोशिश की जा रही है. बारिश भी अंतरराष्ट्रीय राष्ट्र-विरोधी साजिश में शामिल है.” उन्होंने सवाल किया, ”कौन हैं ये भ्रष्ट लोग, जो इतना पैसा झटक कर इतना घटिया काम करते हैं.”

चुनावी राज्य राजस्थान के टोंक जिले के निवाई में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इस जलभराव को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज किया. उन्होंने कहा,”शायद, हमारे देशवासी डर से जो कह नहीं पा रहे हैं, भगवान ने कह दिया: अपना अहंकार कम करो, इस देश ने तुम्हें बनाया है…इस देश ने नेता बनाया है, इस देश को आगे रखो.. इस देश की जनता को सर्वोपरि बनाओ.” पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, ”मुझे अच्छी तरह याद है कि राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन से 15 दिन पहले खेल गांव के फ्लैटों के बेसमेंट में जलभराव होने के कारण हमारी सरकारों – राज्य (दिल्ली) और केंद्र दोनों – को आलोचना का सामना करना पड़ा था.” उन्होंने कहा, ”जी20 इंडिया 2023 कार्यक्रम के बीच में, भारत मंडपम में पानी भर गया, लेकिन मीडिया ने कोई हायतौबा नहीं मचाई.”

खेड़ा ने कहा, ”मोदी जी, आपने हमसे यह नहीं सीखा कि भारत पर शासन कैसे करना है, लेकिन हमें आपसे सीखना चाहिए कि मीडिया को कैसे नियंत्रित किया जाता है.” कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने तंज किया, ”लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से बने भारत मंडपम में आज जरा सी बारिश में ही ‘विकास’ तैरता हुआ दिखाई दिया.” उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,”भगवान से प्रार्थना है कि आज दिन में यहां ज्यादा बारिश ना हो, जी 20 शिखर सम्मेलन सही सलामत पूरा हो जाए.”

सुरजेवाला ने कहा, ”मोदी सरकार ने गरीबों को ‘पर्दे’ से ढक दिया, लेकिन कितनी भी तरकीब लगा कर अपनी करतूतों को नहीं ढक सकती. वैसे भी मोदी सरकार में कुछ भी इवेंट (कार्यक्रम) और उद्घाटन के बाद नहीं टिकता.” भारत मंडपम का वीडियो साझा करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के प्रमुख बी वी श्रीनिवास ने कहा, ”विकास तैर रहा है.” जी20 शिखर सम्मेलन शनिवार को यहां प्रगति मैदान में भारत मंडपम में आरंभ हुआ और यह रविवार को संपन्न होगा.

जी20 सम्मेलन में पर्यावरण पर प्रधानमंत्री की वैश्विक स्तर पर कथनी और उनकी सरकार की करनी एक-दूसरे के विपरीत

जी20 शिखर सम्मेलन में पर्यावरण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान को कांग्रेस ने रविवार को ‘सरासर पाखंड’ करार दिया और दावा किया कि वैश्विक स्तर पर उनकी कथनी(ग्लोबल टॉक) और स्थानीय स्तर पर उनकी सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम (लोकल वाक) एक-दूसरे के पूरी तरह विपरीत हैं. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर भारत के पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से खत्म करने और वनों पर निर्भर सबसे कमजोर समुदायों के अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया.

रमेश ने एक बयान में कहा, ”जी20 और वैश्विक स्तर पर अन्य शिखर सम्मेलनों में प्रधानमंत्री के बयान सरासर पाखंड हैं. भारत में वनों और जैव विविधता की सुरक्षा को नष्ट करके और आदिवासियों तथा वनवासी समुदायों के अधिकारों को कमजोर करके, वह पर्यावरण, जलवायु कार्रवाई और समानता की बात करते हैं.”

उन्होंने कहा, ”वैश्विक स्तर पर उनकी कथनी(ग्लोबल टॉक) और स्थानीय स्तर पर उनकी सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम (लोकल वाक) एक-दूसरे के पूरी तरह विपरीत हैं.” रमेश ने कहा कि वर्ष 2014 में दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों से बातीचत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था, ”जलवायु नहीं बदला है, हम बदल गए हैं.” उन्होंने आरोप लगाया , ”स्वयंभू विश्वगुरु पाखंड में बहुत आगे निकल गए हैं. प्रधानमंत्री ने पर्यावरण के महत्व के बारे में बड़े, खोखले बयान देने के लिए जी20 शिखर सम्मेलन का इस्तेमाल किया.” जी20 देशों ने शनिवार को कहा कि उनका लक्ष्य 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करना है और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप कोयला आधारित बिजली को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयासों में तेजी लाना है, लेकिन उन्होंने तेल और गैस सहित सभी प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की प्रतिबद्धता नहीं जताई.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जी20 पर्यावरण और जलवायु स्थिरता बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ह्लहम जैव विविधता संरक्षण, बहाली और संवर्धन पर कार्रवाई करने में लगातार आगे रहे हैं. धरती माता की सुरक्षा और देखभाल हमारी मौलिक जिम्मेदारी है.ह्व रमेश के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा, ”जलवायु कार्रवाई को अंत्योदय का पालन करना चाहिए… हमें समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान और विकास सुनिश्चित करना चाहिए.”

रमेश ने आरोप लगाते हुए कहा, ” सच्चाई यह है कि मोदी सरकार बड़े पैमाने पर भारत की पर्यावरण सुरक्षा को खत्म कर रही है और वनों पर निर्भर सबसे कमजोर समुदायों के अधिकारों को छीन रही है.” उन्होंने दावा किया कि जैव विविधता संरक्षण के प्रधानमंत्री के दावों के विपरीत वर्ष 2023 के जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम से 2002 में बना मूल कानून ‘बहुत कमजोर’ हो गया है. वर्ष 2023 के अधिनियम से आपराधिक प्रावधान को हटा दिया गया है, जो जैव विविधता को नष्ट करने वाले और वन संपदा के अनुचित दोहन में संलिप्त लोगों को बच निकलने की छूट देता है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए), जो पहले नियंत्रण और संतुलन स्थापित करने के लिए जरूरी शक्तियों वाला एक स्वतंत्र निकाय था, उसे अब पूरी तरह से पर्यावरण मंत्रालय के अधीन कर दिया गया है.” उन्होंने दावा किया कि अदालतों द्वारा जुर्माना लगाने के बजाय नया अधिनियम सरकारी अधिकारियों को दंड देने की जिम्मेदारी देता है.

राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने कहा कि वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम-2023 भारत में आदिवासियों और वनवासी समुदायों के लिए विनाशकारी होगा, क्योंकि यह 2006 के वन अधिकार अधिनियम को कमजोर करता है. रमेश ने कहा कि यह अधिनियम स्थानीय समुदायों की सहमति आदि आवश्यकताओं को खत्म करता है.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 2022 में इस पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने दावा किया कि पूर्वोत्तर में जनजातीय समुदाय विशेष रूप से असुरक्षित हैं, क्योंकि यह अधिनियम देश की सीमाओं के 100 किमी के भीतर जंगलों से सुरक्षा छीन लेगा. उन्होंने कहा कि राजग का शासन होने के बावजूद मिजोरम ने विधानसभा में अधिनियम के विरोध में एक प्रस्ताव पारित किया है और नगालैंड के भी जल्द ही ऐसा करने की उम्मीद है.

रमेश ने दावा किया, ”नया कानून 1996 के टीएन गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करते हुए, भारत के 25 प्रतिशत तक वन क्षेत्र की सुरक्षा के प्रावधान को खत्म करता है. यह केवल मोदी सरकार के लिए जंगलों का दोहन करने और उन्हें कुछ चुनिंदा मित्र पूंजीपतियों को सौंपने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है.” उन्होंने दावा किया कि ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने कोविड-19 महामारी की आड़ लेकर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत नियमों में 39 संशोधन पारित किया.

रमेश ने दावा किया, ”उच्चतम न्यायालय की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को अब मोदी सरकार ने निगल लिया है. सीईसी 2002 से उच्चतम न्यायालय के नियंत्रण में काम कर रही है, ताकि वह शीर्ष अदालत के पर्यावरणीय निर्णयों को लागू करने के बारे में उसे जानकारी दे सके और पर्यावरण संरक्षण के लिए सिफारिशें कर सके. इस महत्वपूर्ण निकाय में भर्ती, इसका नियंत्रण और वित्त पोषण पर्यावरण मंत्रालय को करना है. इसके कारण यह सरकार के आदेश पर की गई पर्यावरणीय तबाही पर रोक लगाने में असमर्थ है.”

रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को 2014 से लगातार कमजोर किया गया और वर्षों से रिक्तियां नहीं भरी गईं. रिक्त पद 2018 में कुल मिलाकर 70 प्रतिशत तक पहुंच गए और एनजीटी की चेन्नई स्थित पीठ को बंद कर दिया गया.
रमेश ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों का स्पष्ट कारण यह है कि प्रधानमंत्री के मित्रों ने भारत के समृद्ध और जैव विविधता वाले जंगलों का दोहन करने पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं और वे ‘पाम तेल’ के बागान स्थापित करने के लिए पूर्वोत्तर के समृद्ध जैव विविधता वाले जंगलों को साफ करना चाहते हैं.

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