एक खास परिवार को सत्ता में बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने संविधान की भावना को कई बार कुचला: शाह

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में आपातकाल लगाने के लिए मंगलवार को कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि विपक्षी दल ने ‘एक खास परिवार को सत्ता में बनाए रखने’ के लिए संविधान की भावना को कई बार कुचला.

साल 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल के 49 साल पूरे होने के मौके पर शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें पार्टी का ‘युवराज’ करार दिया और कहा कि वह भूल गए हैं कि उनकी दादी इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था और उनके पिता राजीव गांधी ने संसद में 23 जुलाई 1985 को कहा था कि आपातकाल में कुछ भी गलत नहीं था.

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”एक खास परिवार को सत्ता में बनाए रखने के लिये कांग्रेस ने हमारे संविधान की भावना को कई बार कुचला. इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान भारत के लोगों पर निर्मम अत्याचार किए.” उन्होंने कहा, ”राजीव गांधी ने तो यहां तक कहा था, अगर इस देश का कोई प्रधानमंत्री जो यह महसूस करता है कि इन परिस्थितियों में आपातकाल जरूरी है और फिर वह आपातकाल लागू नहीं करता है, तो वह इस देश का प्रधानमंत्री बनने के योग्य नहीं है. तानाशाही कृत्य पर गर्व करना यह दिखाता है कि कांग्रेस के लिए परिवार और सत्ता के अलावा कुछ भी प्रिय नहीं है.”

शाह ने इससे पहले एक अलग पोस्ट में कहा, ”देश में लोकतंत्र की हत्या और उस पर बार-बार आघात करने का कांग्रेस का लंबा इतिहास रहा है. साल 1975 में आज के ही दिन कांग्रेस द्वारा लगाया गया आपातकाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.” उन्होंने कहा कि अहंकार में डूबी, निरंकुश कांग्रेस सरकार ने एक परिवार के सत्ता सुख के लिए 21 महीनों तक देश में सभी प्रकार के नागरिक अधिकार निलंबित कर दिए थे, मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी थी, संविधान में बदलाव किए और न्यायालय तक के हाथ बांध दिए थे.

उन्होंने कहा, ”आपातकाल के खिलाफ संसद से सड़क तक आंदोलन करने वाले असंख्य सत्याग्रहियों, समाजसेवियों, श्रमिकों, किसानों, युवाओं व महिलाओं के संघर्ष को नमन करता हूं.” शाह के अलावा भाजपा के अन्य सभी वरिष्ठ नेताओं ने भी देश में आपातकाल लगाए जाने के 49 साल पूरे होने पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि विपक्षी दल द्वारा लोकतंत्र की हत्या करने और उसे बार-बार नुकसान पहुंचाने के लंबे इतिहास में यह सबसे बड़ा उदाहरण है.

भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जो लोग आज भारतीय लोकतंत्र के संरक्षक होने का दावा करते हैं, उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाई गई आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र में एक काला अध्याय है, जिसे चाह कर भी भुलाया नहीं जा सकता.

सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही का जिस तरह खुला खेल उस दौरान खेला गया, वह कई राजनीतिक दलों की लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.” उन्होंने कहा कि यदि आज इस देश में लोकतंत्र जीवित है तो उसका श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया, जेल गये और न जाने कितनी शारीरिक और मानसिक यातना से उन्हें गुज.रना पड़ा.

उन्होंने कहा, ”भारत की आने वाली पीढि.यां उनके संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके योगदान को याद रखेंगी.” भाजपा ने कांग्रेस की तीखी आलोचना ऐसे समय की है जब विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप लगा रहे हैं.

18वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू होने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्य संसद में संविधान की प्रतियां लेकर गए थे.
मोदी ने सोमवार को कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए आपातकाल लगाए जाने का भी जिक्र किया था और लोगों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया था कि ऐसा दोबारा न हो. भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि आपातकाल लागू करने के कांग्रेस के राजनीतिक रूप से प्रेरित फैसले ने लोकतंत्र के स्तंभों को हिला दिया क्योंकि उसने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान को रौंदने की कोशिश की थी.

उन्होंने कहा, ”इस अवधि के दौरान, उन लोगों ने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाई गई आवाजों को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जो आज भारतीय लोकतंत्र के संरक्षक होने का दावा करते हैं.” नड्डा ने कहा, ”मुझे गर्व है कि हमारी पार्टी उस परंपरा से संबद्ध है जिसने आपातकाल का जी-जान से विरोध किया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए काम किया.” साल 1975 में 25-26 जून की दरम्यानी रात से 21 मार्च 1977 तक (21 महीने) के लिए भारत में आपातकाल घोषित किया गया था.

तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक समय था. आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे और सभी नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था.

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