मोदी को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार देने के लिए दायर याचिका पर विचार करने से न्यायालय का इनकार

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को छह साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य करार देने के अनुरोध वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ता से शिकायत के निवारण के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने को कहा.

पीठ ने कहा, ”क्या आपने अधिकारियों से संपर्क किया है? आदेश के लिए आपको पहले अधिकारियों से संपर्क करना होगा.”  चिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली और मामला वापस लिया गया मानते हुए इसे खारिज कर दिया गया. शीर्ष अदालत अधिवक्ता आनंद एस जोंधले के मार्फत फातिमा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मोदी को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने के वास्ते निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.

याचिका में आरोप लगाया गया था कि मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रचार अभियान में ”विभाजनकारी और नफरत भरे” बयान दिये हैं. याचिका में दावा किया गया है कि विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों ने निर्वाचन आयोग से शिकायतें की हैं लेकिन आयोग कोई प्रभावी कार्रवाई करने तथा मोदी को देवी-देवताओं एवं मंदिर के नाम पर वोट मांगने से रोक पाने में नाकाम रहा.

पीठ ने एक और याचिका खाारिज कर दी, जिसमें कथित ”नफरती भाषणों” के लिए मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई के लिए आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि वह इस सिलसिले में निर्वाचन आयोग को कोई निर्देश जारी करने की इच्छुक नहीं है.

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