राबड़ी के आवास के बाहर बैठे दिखे राजद प्रवक्ता, दावा किया- शीर्ष राजद नेताओं ने सुरक्षा ‘वापस’ कर दी

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता शक्ति यादव शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर बैठे नजर आए और उन्होंने दावा किया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा उन्हें प्रदान की गई सुरक्षा ”वापस” कर दी है।

पूर्व विधायक शक्ति यादव 10, सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी के आवास के गेट के बाहर बैठे नजर आये और आरोप लगाया कि उनकी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सरकार द्वारा ”बार-बार किए जा रहे अपमान” से आहत है, इसलिए पार्टी पदाधिकारी स्वयं उनकी (राजद नेताओं की) सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।

यह घटनाक्रम राज्य गृह विभाग द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री- राबड़ी देवी और लालू प्रसाद- तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा श्रेणी कमतर किए जाने के दो दिन बाद सामने आया। शक्ति यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, ”सरकार चाहती है कि हमारे नेताओं की हत्या हो जाए, लेकिन हम उनकी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करेंगे। हमारे नेताओं का बार-बार अपमान किया जा रहा है, चाहे वह सुरक्षा के नाम पर हो या आवास के नाम पर।”

उल्लेखनीय है कि राजद नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में यह कमी उस घटना के लगभग एक सप्ताह बाद की गई, जिसमें राबड़ी देवी के 10, सर्कुलर रोड स्थित आवास को भाजपा नेता एवं मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया था। इसके बाद राबड़ी देवी ने नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा था कि वह बंगले को ”जबरन” खाली कराकर दिखाएं, जहां वह दो दशकों से रह रही हैं।

इस बीच, राजग नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के निर्णय का ”सम्मान” किया जाना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री संजय सरावगी ने कहा, ”राज्य में एक सुरक्षा समिति गठित है जो खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा श्रेणियां तय करती है। राबड़ी देवी और लालू प्रसाद जी को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पात्रता के अनुसार सुरक्षा मिल रही है। क्या दिक्कत है?” जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि सुरक्षा का आवंटन खतरे के स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में किया जाता है। उन्होंने कहा, ”राबड़ी जी इस मामले में अपवाद नहीं हैं और उन्हें राज्य सरकार के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।”

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