किसान प्रदर्शन: उच्चतम न्यायालय ने अनिश्चितकालीन हड़ताल तोड़ने पर डल्लेवाल को ‘सच्चा नेता’ बताया

हिरासत में लिए गए पंजाब के किसान नेता पंधेर और कोहाड़ रिहा

नयी दिल्ली/चंडीगढ़. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि किसानों की विभिन्न मांगों के समर्थन में चार माह से जारी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर देने वाले 70-वर्षीय जगजीत सिंह डल्लेवाल ‘बिना किसी राजनीतिक एजेंडा वाले सच्चे नेता’ हैं.

पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ से कहा कि खनौरी एवं शंभू बॉर्डर से प्रदर्शनकारी किसानों को हटा दिया गया है और सभी अवरुद्ध सड़कों एवं राजमार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है.
शीर्ष अदालत ने डल्लेवाल की सराहना करते हुए उन्हें एक वास्तविक किसान नेता बताया, जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक एजेंडा के कृषक समुदाय के वास्तविक मुद्दों को उठाया.

न्यायालय ने कहा, ”हम जानते हैं कि कुछ लोग किसानों की शिकायतों का निपटारा नहीं चाहते. हम स्थिति से अनभिज्ञ नहीं हैं. हम सब कुछ जानते हैं.” पीठ ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से जमीनी हालात के बारे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा.
सिंह ने कहा कि दूसरी तरफ हरियाणा ने भी राजमार्ग से अवरोधक हटा दिये हैं, जिससे यातायात सुचारू हो गया है.

उन्होंने कहा, ”रोजाना यात्रियों को जो परेशानियां हो रही थीं उसका हमें भान था.” महाधिवक्ता ने कहा कि राजमार्गों से जाम हट जाने से अब लाखों लोगों को लाभ मिलेगा, क्योंकि पहले उन्हें काफी चक्कर लगाना पड़ता था. शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों के कारण लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में यातायात सुचारू रूप से चल रहा है.

सितंबर, 2024 में शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी किसानों की शिकायतों के सौहार्दपूर्ण समाधान के उद्देश्य से एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था. पीठ ने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस समिति को किसानों की शिकायतों पर गौर करने तथा अपनी अगली अनुपूरक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा. न्यायालय ने डल्लेवाल को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के शीर्ष अदालत के आदेश का पालन नहीं करने पर पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के खिलाफ शुरू की गयी अवमानना ??की कार्यवाही भी रोक दी.

संबंधित घटनाक्रम में, केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद हाल में पुलिस की कार्रवाई में हिरासत में लिये गए किसान नेताओं –सरवन सिंह पंधेर, अभिमन्यु कोहाड़ और काका सिंह कोटरा को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया. किसान मजदूर मोर्चा के नेता पंधेर को मुक्तसर जेल से छोड़ा गया, जबकि कोहाड़, कोटरा और अन्य किसान नेताओं को पटियाला केंद्रीय जेल से रिहा किया गया.

उन्नीस मार्च को चंडीगढ़ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद लौटते समय कई किसान नेताओं को पुलिस की कार्रवाई में हिरासत में लिया गया था. यह बैठक किसानों की मांगों, खासकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी. बैठक के बाद जैसे ही किसान मोहाली में दाखिल हुए, उन्हें भारी अवरोधकों का सामना करना पड़ा और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया गया.

पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर से प्रदर्शनकारी किसानों को हटा दिया और उनके अस्थायी ढांचों को भी हटा दिया. उसके बाद शंभू-अंबाला और संगरूर-जींद राजमार्गों पर वाहनों का आवागमन बहाल कर दिया गया. किसान नेताओं ने दावा किया कि डल्लेवाल को भी 19 मार्च को हिरासत में ले लिया गया था, लेकिन पंजाब सरकार ने कहा कि उन्हें उन्हीं की शर्तों पर पटियाला के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

डल्लेवाल संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के संयुक्त मंच के वरिष्ठ नेता हैं तथा पिछले साल 26 नवंबर से केंद्र पर अपनी मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने के वास्ते पंजाब और हरियाणा के बीच खनौरी सीमा पर अनिश्चितकालीन अनशन पर थे. डल्लेवाल ने पहले पंजाब सरकार द्वारा दी जाने वाली चिकित्सा सहायता लेने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई थी.

उच्चतम न्यायालय ने 20 दिसंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती के फैसला का दायित्व पंजाब सरकार के अधिकारियों और चिकित्सकों पर डाला था. समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कृषि संकट के विभिन्न कारणों को चिह्नित किया, जिनमें स्थिर उपज, बढ़ती लागत, कर्ज और अपर्याप्त विपणन प्रणाली आदि थे.

इस समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नवाब सिंह के अलावा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बी एस संधू, कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा, प्रोफेसर रंजीत सिंह घुमन और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री डॉ सुखपाल सिंह शामिल हैं. एसकेएम और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान पिछले साल 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा पर डेरा डाले हुए थे, जब सुरक्षा बलों ने उनके दिल्ली कूच को रोक दिया था.

हिरासत में लिए गए पंजाब के किसान नेता पंधेर और कोहाड़ रिहा

केंद्र के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद हाल में पुलिस की कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए किसान नेताओं सरवन सिंह पंधेर, अभिमन्यु कोहाड़ और काका सिंह कोटड़ा को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि किसान मजदूर मोर्चा के नेता पंधेर को मुक्तसर जेल से रिहा किया गया जबकि कोहाड़, कोटड़ा और कुछ अन्य किसान नेताओं को पटियाला केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया.

पंधेर ने एक वीडियो संदेश जारी कर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ की गई पंजाब पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर इन स्थलों पर किसान एक साल से अधिक समय से डेरा डाले हुए थे. पुलिस ने 19 मार्च को कई किसान नेताओं को उस समय हिरासत में ले लिया था जब वे चंडीगढ़ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाले एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद लौट रहे थे.

यह बैठक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत किसानों की मांगों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी. बैठक के बाद किसान जैसे ही मोहाली में दाखिल हुए, उन्हें भारी अवरोधकों का सामना करना पड़ा और कुछ किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों और वहां स्थापित अस्थायी ढांचों को हटा दिया. इसके बाद शंभू-अंबाला और संगरूर-जींद राजमार्गों पर वाहनों का आवागमन फिर से शुरू हो गया.

प्रदर्शनकारी किसानों ने उन्हें शंभू एवं खनौरी बॉर्डर से हटाने और किसान नेताओं को हिरासत में लेने के लिए पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की आलोचना की थी. पंधेर ने शुक्रवार को रिहाई के बाद पटियाला में पत्रकारों से कहा कि किसानों के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए अब यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार ”दिल्ली में ‘आप’ नेताओं को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की कार्रवाई से बचाने” के लिए केंद्र के साथ मिली हुई है.

पंधेर ने कहा कि पंजाब सरकार कहेगी कि किसानों का आंदोलन केंद्र के खिलाफ है लेकिन अब उसकी अपनी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और अवरोधक हटा दिए. उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री भगवंत मान को बताना चाहिए कि राजमार्गों को किसने अवरुद्ध किया था – क्या वे किसान थे या हरियाणा के अधिकारी थे जिन्होंने अवरोधक लगाए थे?” उन्होंने कहा, ”हम केवल अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक दिल्ली जाना चाहते थे. हम सड़कों को अवरुद्ध करने के पक्ष में कभी भी नहीं थे.” पंधेर ने कहा कि पंजाब सरकार को खनौरी और शंभू में विरोध स्थलों से किसानों को जबरन हटाए जाने के कारण खोए उनके सामान के लिए उन्हें मुआवजा देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) आंदोलन के भविष्य की दिशा तय करेंगे. इस बीच, पंजाब सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने शुक्रवार की सुबह पानी पीकर अनशन समाप्त कर दिया. किसान नेताओं ने दावा किया था कि डल्लेवाल को 19 मार्च को भी हिरासत में लिया गया था लेकिन पंजाब सरकार ने कहा कि उन्हें उनकी इच्छा के अनुसार पटियाला के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button