बैंकर के लिए जमाकर्ताओं का धन सुरक्षित रखना मंदिर, गुरुद्वारे जाने से ज्यादा पुण्य का काम: दास

शहरी सहकारी बैंकों में NPA को लेकर रिजर्व बैंक 'सहज नहीं' : शक्तिकांत दास

मुंबई. बैंक जमाकर्ताओं की वजह से चलते हैं और एक बैंकर के लिए मध्यम वर्ग, गरीबों तथा सेवानिवृत्त लोगों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा किसी मंदिर या गुरुद्वारे में जाने से कहीं अधिक पुण्य का काम है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के निदेशकों को संबोधित करते हुए यह बात कही.

दास ने कहा कि यह बैंकों की ‘सबसे बड़ी जिम्मेदारी’ है और आरबीआई की भी यह जिम्मेदारी है कि वह जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंकों के साथ मिलकर काम करे. इसके लिए केंद्रीय बैंक लगातार नियामक और निगरानी के उपाय करता है.
उन्होंने कहा कि समग्र स्तर पर कुल तस्वीर अच्छी दिखती है. हालांकि, सकल गैर निष्पादित आस्तियां (जीएनपीए) और पूंजी पर्याप्तता पर स्थिति ”बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं” है.

उन्होंने कहा कि कुल गैर-निष्पादित संपत्तियां 8.7 प्रतिशत हो गई हैं. इसे आप अच्छा नहीं मान सकते. कुल मिलाकर यह संतोषजनक स्तर नहीं है. वाणिज्यिक बैंकों का जीएनपीए मार्च, 2023 में दशक के सबसे बेहतर स्तर 3.9 प्रतिशत पर था और व्यापक रूप से इसमें और सुधार होने का अनुमान है.

एनपीए संकट से बेहतर ढंग से निपटने के लिए दास ने सुझाव दिया कि बेहतर आकलन के साथ क्रेडिट जोखिम प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. यूसीबी में कुल 8.7 प्रतिशत गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) अनुपात को लेकर केंद्रीय बैंक ”सहज नहीं” है. उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों से इस अनुपात को बेहतर करने के लिए काम करने को कहा.

भारतीय रिज.र्व बैंक द्वारा देश की वित्तीय राजधानी में शहरी सहकारी बैंकों के निदेशकों से दास ने कहा, ”ऐसे ऋणदाताओं को काम करने के तरीके में सुधार करना चाहिए, संबंधित-पक्ष से लेनदेन से बचना चाहिए और अन्य बातों के अलावा कर्ज जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

यूसीबी क्षेत्र कई चुनौतियों से भरा हुआ है…जैसा कि हाल में पंजाब एंड महाराष्ट्र बैंक में भी देखा गया. उन्होंने कहा कि आरबीआई को हितों के टकराव या संबंधित पक्ष लेनदेन के मामलों को लेकर विवाद के बारे में पता चला है जिनसे बचने की जरूरत है. दास ने कहा कि इसी तरह ऐसे भी मामले हैं कि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले कई ऐसे व्यक्ति या व्यवसाय हैं जिनके पास भुगतान करने की क्षमता है.

उन्होंने कहा कि बकाया ऋण का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शीर्ष 20 इरादतन चूककर्ताओं का है. इसपर ध्यान केंद्रित करने से समग्र एनपीए में सुधार करने में मदद मिल सकती है. आरबीआई गवर्नर ने यूसीबी को परिसंपत्ति-देनदारी में विसंगतियों की निगरानी करने, पारदर्शी लेखांकन व्यवहार का पालन करने और आवश्यकताओं तथा खर्च करने की क्षमता के आधार पर लोगों की भर्ती करने को भी कहा.

शहरी सहकारी बैंकों में NPA को लेकर रिजर्व बैंक ‘सहज नहीं’ : शक्तिकांत दास

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) में कुल 8.7 प्रतिशत गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) अनुपात को लेकर केंद्रीय बैंक ”सहज नहीं” है. उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों से इस अनुपात को बेहतर करने के लिए काम करने को कहा.

भारतीय रिज.र्व बैंक द्वारा देश की वित्तीय राजधानी में आयोजित सम्मेलन में यूसीबी के निदेशकों को संबोधित करते हुए दास ने आग्रह किया कि ऐसे ऋणदाताओं को काम करने के तरीके में सुधार करना चाहिए, संबंधित-पक्ष से लेनदेन से बचना चाहिए और अन्य बातों के अलावा कर्ज जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

यूसीबी क्षेत्र कई चुनौतियों से भरा हुआ है…जैसा कि हाल में पंजाब एंड महाराष्ट्र बैंक में भी देखा गया. दास ने यूसीबी के निदेशकों से कहा कि बैंक जमाकर्ताओं पर चलते हैं और मध्यम वर्ग, गरीबों तथा सेवानिवृत्त लोगों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा किसी मंदिर या गुरुद्वारे में जाने से कहीं अधिक पवित्र है.

उन्होंने कहा कि समग्र स्तर पर कुल तस्वीर अच्छी दिखती है. हालांकि, जीएनपीए और पूंजी पर्याप्तता पर स्थिति ”बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं” है. उन्होंने कहा कि कुल गैर-निष्पादित संपत्तियां (जीएनपीए) 8.7 प्रतिशत हो गई हैं. इसे आप अच्छा नहीं मान सकते. कुल मिलाकर यह संतोषजनक स्तर नहीं है.

वाणिज्यिक बैंकों का जीएनपीए मार्च, 2023 में दशक के सबसे बेहतर स्तर 3.9 प्रतिशत पर था और व्यापक रूप से इसमें और सुधार होने का अनुमान है. एनपीए संकट से बेहतर ढंग से निपटने के लिए दास ने सुझाव दिया कि बेहतर आकलन के साथ क्रेडिट जोखिम प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आरबीआई को हितों के टकराव या संबंधित पक्ष लेनदेन के मामलों को लेकर विवाद के बारे में पता चला है जिनसे बचने की जरूरत है. दास ने कहा कि इसी तरह ऐसे भी मामले हैं कि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले कई ऐसे व्यक्ति या व्यवसाय हैं जिनके पास भुगतान करने की क्षमता है.

उन्होंने कहा कि बकाया ऋण का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शीर्ष 20 इरादतन चूककर्ताओं का है. इसपर ध्यान केंद्रित करने से समग्र एनपीए में सुधार करने में मदद मिल सकती है. आरबीआई गवर्नर ने यूसीबी को परिसंपत्ति-देनदारी में विसंगतियों की निगरानी करने, पारदर्शी लेखांकन व्यवहार का पालन करने और आवश्यकताओं तथा खर्च करने की क्षमता के आधार पर लोगों की भर्ती करने को भी कहा.

बड़े वाणिज्यिक बैंकों के बोर्ड में एक या दो सदस्यों का ‘अत्यधिक दबदबा’ : दास
रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पाया है कि बड़े वाणिज्यिक बैंकों के निदेशक मंडल (बोर्ड) में एक या दो सदस्यों का ‘अत्यधिक दबदबा’ रहता है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को यह बात कही. साथ ही उन्होंने बैंकों से इस चलन को ठीक करने के लिए कहा. दास ने यहां आरबीआई द्वारा आयोजित एक बैठक में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के निदेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि बोर्ड में चर्चा स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ”बोर्ड के एक या दो सदस्यों, चेयरमैन या वाइस-चैयरमैन का अत्यधिक प्रभाव या दबदबा नहीं होना चाहिए. हमने ऐसा बड़े वाणिज्यिक बैंकों में भी देखा है… जहां भी हमने ऐसा देखा, हमने बैंक से कहा कि यह सही तरीका नहीं है.” उन्होंने कहा कि सभी निदेशकों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए और किसी मामले पर किसी विशेष निदेशक की बात अंतिम नहीं होनी चाहिए. दास ने एक अच्छी तरह से काम करने वाले बोर्ड के महत्व का जिक्र करते हुए यह बात कही. हालांकि, उन्होंने इसके बारे में अधिक विस्तार से नहीं बताया.

Related Articles

Back to top button