गोवा सरकार की डेरी क्षेत्र की योजनाएं रोजगार बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में सहायक

पणजी: गोवा सरकार द्वारा शुरू की गई डेरी फार्म सहायता योजनाएं बिचोलिम तालुका में ग्रामीणों के लिये रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक हो रही हैं और कई लाभार्थियों ने पारंपरिक खेती को व्यवहार्य वाणिज्यिक उद्यमों में बदलने में मवेशियों, उपकरणों तथा चारे के लिए अनुदान की भूमिका की सराहना की है।

पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री सुधारित कामधेनु योजना के साथ ही डेरी उपकरण और चारा सहायता योजनाएं ”स्वयंपूर्ण गोवा” कार्यक्रम के तहत दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए राज्य के प्रयासों को मजबूत कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को अधिक दूध देने वाली गायें, बाड़े में चारा खिलाने की व्यवस्था और दूध दुहने की आधुनिक मशीनों तक पहुंच प्रदान की जाती है, जिससे उत्पादकता, दूध की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों में सुधार करने में मदद मिलती है।

विभाग के डॉ. गायत्रीदास गौथंकर ने कहा कि 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर र्पिरकर के नेतृत्व में शुरू की गई कामधेनु योजना वर्तमान में बिचोलिम क्षेत्र में लगभग 170 से 180 लाभार्थी किसानों को सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा ‘जर्सी क्रॉस’, ‘होल्स्टीन-फ्रीसियन क्रॉस’ और स्वदेशी नस्लों सहित अधिकतम 10 दुधारू पशुओं को खरीदा जा सकता है, जिन पर प्रति पशु 70,000 रुपये की निर्धारित दर पर 90 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”इससे किसान का योगदान घटकर प्रति पशु लगभग 7,000 रुपये हो जाता है, जबकि परिवहन लागत और 42 महीने का बीमा विभाग द्वारा किया जाता है।” बिचोलिम के बोरदे गांव निवासी विशाल नाइक ने कहा कि उनके परिवार ने तीन पीढि़यों से इस परंपरा का पालन करने के बावजूद कम मुनाफे के कारण लगभग 20 साल पहले दुग्ध उत्पादन बंद कर दिया था।

उन्होंने कहा, ”इस योजना के बारे में जानने के बाद हमने 20 गायों को खरीदने के मकसद से सहायता के लिए आवेदन किया तथा 10 गायों को 90 प्रतिशत अनुदान और शेष 10 को 75 प्रतिशत अनुदान के साथ-साथ दूध उत्पादन पर प्रोत्साहन भी दिया गया।”

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