
जोधपुर. राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाबालिग से बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को पुलिस हिरासत में महाराष्ट्र के एक आयुर्वेदिक अस्पताल में सात दिन तक इलाज कराने की मंगलवार को अनुमति दे दी. सितंबर 2013 में गिरफ्तार किए गए आसाराम (83) को हृदय संबंधी बीमारी के बाद दो दिन तक अखिल भारतीय आयुर्वज्ञिान संस्थान (एम्स) जोधपुर में भर्ती कराया गया था.
उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ के न्यायमूर्ति पी एस भाटी और न्यायमूर्ति मुन्नुरी लक्ष्मण ने निर्देश दिया कि आसाराम सात दिनों तक पुलिस हिरासत में अस्पताल में इलाज के लिए रहेगा. आसाराम ने आयुर्वेदिक उपचार पर जोर दिया था और अदालत से अनुरोध किया था कि उसे विशेष रूप से पुणे के माधवबाग मल्टीडिसिप्लिनरी कार्डियक केयर क्लीनिक एवं अस्पताल में उपचार की अनुमति दी जाए.
इससे पहले, इस साल मार्च में भी आसाराम ने 14 दिन के परोल के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. लेकिन पुणे पुलिस की रिपोर्ट के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी. पुलिस की रिपोर्ट में अस्पताल में आसाराम के रहने के दौरान कानून-व्यवस्था को संभावित खतरे की आशंका जताई गई थी.
इसके बाद आसाराम को जोधपुर के एक निजी अस्पताल में करीब एक पखवाड़े तक आयुर्वेदिक उपचार की अनुमति दी गई. स्वास्थ्य आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम की याचिका को पूर्व में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था.
आसाराम को 2013 में इंदौर में अपने आश्रम में एक किशोरी से कथित रूप से बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और 2018 में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत गठित विशेष अदालत ने उसे दोषी ठहराया था.
गुजरात की एक अदालत ने जनवरी 2023 में एक महिला शिष्या से जुड़े एक दशक पुराने यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. सूरत की रहने वाली पीड़िता ने आसाराम पर 2013 में अपने आश्रम में कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था.



