भारत ने अपने ‘रत्न’ रतन टाटा को भावभीनी विदाई दी, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी

रतन टाटा : दिग्गज उद्योगपति जो संत की तरह जीया

मुंबई/नयी दिल्ली. भारत की आर्थिक राजधानी ने अपने सबसे प्रतिष्ठित पुत्रों में से एक रतन टाटा को बृहस्पतिवार को भावभीनी विदाई दी और हजारों आम नागरिकों से लेकर दिग्गजों ने उनकी अंतिम यात्रा से पहले उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. प्रसिद्ध उद्योगपति एवं परोपकारी टाटा का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार शाम मध्य मुंबई स्थित एक शवदाह गृह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया. मुंबई पुलिस ने उन्हें श्रद्धांजलि और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. पद्म विभूषण से सम्मानित टाटा (86) का बुधवार रात शहर के एक अस्पताल में निधन हो गया. शवदाह गृह में मौजूद एक धर्म गुरु ने बताया कि अंतिम संस्कार पारसी परंपरा के अनुसार किया गया.

उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत उद्योगपति के दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित बंगले में तीन दिन तक अनुष्ठान किए जाएंगे. बुधवार देर रात उनके निधन के बाद, बृहस्पतिवार तड़के उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान पर ले जाया गया, तथा वहां से एक सांस्कृतिक केंद्र में ले जाया गया, ताकि आम जनता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सके. उद्योग जगत की हस्तियां, शीर्ष राजनीतिक नेता, खेल और फिल्म जगत की शख्सियतें तथा मुंबईवासी टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए.

जैसा कि महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही घोषणा की थी, अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ, जिसके तहत ताबूत को तिरंगा से लपेटा गया और मुंबई पुलिस ने बंदूकें चलाकर उन्हें सलामी दी. महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से दिग्गज उद्योगपति को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का आग्रह किया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय कला प्रदर्शन केंद्र (एनसीपीए) में पुष्पांजलि अर्पित की. सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी के नेतृत्व में अंबानी परिवार ने भी दिवंगत कारोबारी को श्रद्धांजलि अर्पित की.

क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर उन लोगों में शामिल थे जो टाटा के कोलाबा स्थित घर पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे, उसके बाद पार्थिव शरीर को एनसीपीए परिसर ले जाया गया. प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्थान में पहले से ही भीड़ उमड़ पड़ी थी. विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने आम लोगों के साथ मिलकर रतन टाटा को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की. एनसीपीए पहुंचे कारोबारी जगत के जाने-माने नामों में टाटा समूह के अध्यक्ष नटराजन चंद्रशेखरन, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, कुमार मंगलम बिड़ला और एलएंडटी के प्रमुख एस एन सुब्रह्मण्यन शामिल थे.

एनसीपीए पहुंचने वाले शीर्ष नेताओं में राकांपा (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आंध्र प्रदेश के उनके समकक्ष एन चंद्रबाबू नायडू, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस व अजित पवार, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे शामिल थे. फिल्म अभिनेता आमिर खान और उनकी पूर्व पत्नी किरण राव, निर्देशक मधुर भंडारकर और अभिनेता राजपाल यादव ने भी रतन टाटा को श्रद्धांजलि अर्पित की. धक्का-मुक्की के लिए बदनाम शहर में, कार्यक्रम स्थल (एनसीपीए) पर भीड़ बहुत अनुशासित रही. जाने-पहचाने नामों से ज़्यादा आम लोग, खासकर छात्र और युवा, एनसीपीए में दिग्गज को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े.

छात्र अभिषेक गभने (23) ने कहा, ह्लमुझे लगा कि मैंने अपने परिवार का कोई सदस्य खो दिया है. उन्होंने लोगों और देश के लिए बहुत कुछ किया.ह्व टाटा समूह के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. इनमें नमक से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने वाले वैश्विक समूह के तीसरी पीढ.ी के कर्मचारी सिद्धार्थ चंदनशिवे भी शामिल थे जिन्होंने समूह की उपलब्धियों का श्रेय रतन टाटा को दिया. जब एनसीपीए से वर्ली स्थित शवदाह गृह तक पांच किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए पार्थिव शरीर को ले जाने की तैयार की जा रही थी, तो एक बहुत ही मार्मिक दृश्य देखने को मिला. रतन टाटा का पालतू कुत्ता ‘गोवा’ पार्थिव शरीर के पास से हटने को राज.ी न था.

जैसे ही शव यात्रा एनसीपीए से बाहर निकली, ‘अमर रहे’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगने लगे. फूलों से सजी एक वैन और कुछ पुलिस वाहनों का काफिला उत्तर की ओर बढ. रहा था. टाटा का विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया. भारी भीड़ के कारण लोगों को वहां प्रवेश से रोकना पड़ा. जैसे ही राजनीतिक नेताओं समेत महत्वपूर्ण हस्तियां शवदाह गृह से बाहर निकलीं, लोग अंदर की ओर दौड़ पड़े, लेकिन उन्हें करीब 100 मीटर दूर रोक दिया गया.

अंतिम संस्कार में मदद करने वाले धर्म गुरुओं में से एक पेरी खंबाटा ने बताया कि अंतिम संस्कार केवल पहला कदम है और टाटा के निवास पर तीन दिन तक अनुष्ठान किए जाएंगे. टाटा को 156 साल पुराने कारोबारी समूह को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध समूह बनाने का श्रेय है. महाराष्ट्र सरकार ने दिग्गज उद्योगपति के सम्मान में बृहस्पतिवार को राज्य में एक दिन का शोक घोषित किया. कई अन्य राज्यों ने भी एक दिन का शोक घोषित किया.

रतन टाटा : दिग्गज उद्योगपति जो संत की तरह जीया
दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल रतन टाटा अपनी शालीनता और सादगी के लिए मशहूर रहे लेकिन वह कभी अरबपतियों की किसी सूची में नजर नहीं आए. वह 30 से ज्यादा कंपनियों के कर्ताधर्ता थे जो छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में फैली हैं लेकिन उन्होंने अपना जीवन एक संत की तरह जीया. रतन नवल टाटा ने बुधवार की रात 86 वर्ष की आयु में मुंबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली.

सरल व्यक्तितत्व के धनी टाटा एक कॉरपोरेट दिग्गज थे, वहीं अपनी शालीनता और ईमानदारी के बूते वह एक संत की तरह जिए.
टाटा ने कभी शादी नहीं की. हालांकि, चार बार ऐसा हुआ जब उनकी शादी होने वाली थी. एक बार ऐसा तब हुआ जब वह अमेरिका में थे.
उनके निधन से टाटा ट्रस्ट्स के शीर्ष पद पर एक खालीपन आ गया है, जिसके पास समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस का 66 प्रतिशत हिस्सा है. रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा को उनके उत्तराधिकारी के रूप में एक मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है.
नोएल टाटा, स्टील और घड़ी कंपनी टाइटन के उपाध्यक्ष हैं. उनकी मां और रतन टाटा की सौतेली मां सिमोन टाटा इस समय ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और टाटा इंटरनेशनल की अध्यक्ष हैं.

रतन टाटा के छोटे भाई जिम्मी पारिवारिक उद्योग से नहीं जुड़े हैं और कोलाबार के एक दो कमरों के मकान में रहते हैं. रतन टाटा का जन्म 1937 में एक पारंपरिक पारसी परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता नवल और सूनी टाटा का तलाक होने के बाद उनकी दादी उन्हें अपने साथ ले आईं. उस समय रतन 10 वर्ष के थे.

रतन टाटा 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क से वास्तुकला में बी.एस. की डिग्री प्राप्त करने के बाद पारिवारिक कंपनी से जुड़ गए. वह कैलिफोर्निया में बसना चाहते थे लेकिन दादी की खराब सेहत की वजह से भारत लौट आए थे. उस समय उन्हें आईबीएम कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन टाटा संस के तत्कालीन अध्यक्ष और रतन टाटा के चाचा जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा ने उन्हें अपने समूह के लिए ही काम करने के लिए मनाया.

उन्होंने शुरुआत में टाटा समूह के कई व्यवसायों में अनुभव प्राप्त किया, जिसके बाद 1971 में उन्हें (समूह की एक फर्म) ‘नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी’ का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. एक दशक बाद वह टाटा इंडस्ट्रीज के चेयरमैन बने और उन्होंने 1991 में अपने चाचा जेआरडी टाटा से टाटा समूह के चेयरमैन का पदभार संभाला. जेआरडी टाटा पांच दशक से भी अधिक समय तक इस पद पर रहे थे. यह वह वर्ष था जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को खोला और 1868 में एक छोटे वस्त्र और व्यापार प्रतिष्ठान के रूप में शुरुआत करने वाले टाटा समूह ने शीघ्र ही खुद को एक वैश्विक उद्यम में बदल दिया, जिसका साम्राज्य नमक से लेकर इस्पात, कार से लेकर सॉफ्टवेयर, बिजली संयंत्र और एयरलाइन तक फैला गया था.

रतन टाटा दो दशक से अधिक समय तक समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ के चेयरमैन रहे और इस दौरान समूह ने तेजी से विस्तार करते हुए वर्ष 2000 में लंदन स्थित टेटली टी को 43.13 करोड़ डॉलर में खरीदा, वर्ष 2004 में दक्षिण कोरिया की देवू मोटर्स के ट्रक-निर्माण परिचालन को 10.2 करोड़ डॉलर में खरीदा, एंग्लो-डच स्टील निर्माता कोरस समूह को 11.3 अरब डॉलर में खरीदा और फोर्ड मोटर कंपनी से मशहूर ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर को 2.3 अरब डॉलर में खरीदा.

भारत के सबसे सफल उद्योगपतियों में से एक होने के साथ-साथ, वह अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए भी जाने जाते थे.
परोपकार में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी बहुत पहले ही शुरू हो गई थी. वर्ष 1970 के दशक में, उन्होंने आगा खान अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना की शुरुआत की, जिसने भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में से एक की नींव रखी.

साल 1991 में टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, टाटा के परोपकार संबंधी प्रयासों को नई गति मिली. उन्होंने अपने परदादा जमशेदजी द्वारा स्थापित टाटा ट्रस्ट को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया, ताकि महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. रतन टाटा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज जैसे उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की. साल 2008 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

ईमानदारी और शालीनता की प्रतिमूर्ति होने के बावजूद, रतन टाटा विवादों से भी अछूते नहीं रहे. यूं तो समूह का नाम 2008 में 2जी दूरसंचार लाइसेंसों के आवंटन में हुए घोटाले में सीधे तौर पर नहीं आया था, लेकिन लॉबीस्ट नीरा राडिया को किए गए उनके कथित फ.ोन कॉल की लीक हुई रिकॉर्डिंग के जरिए उनका नाम सामने आया. बहरहाल उनका नाम अंतत: किसी गलत काम से नहीं जुड़ा.
दिसंबर 2012 में रतन टाटा ने टाटा संस की जिम्मेदारी साइरस मिस्त्री को दे दी जो उस समय तक उनके सहायक थे. हालांकि टाटा समूह में स्वामित्व रखने वाले लोगों को टाटा परिवार से बाहर के पहले सदस्य मिस्त्री के कामकाज के तरीके से दिक्कतें होने लगीं और अक्टूबर 2016 में टाटा समूह की कमान मिस्त्री के हाथ से चली गई.

रतन टाटा उस समय कंपनी में शेयरधारक थे और कई परियोजनाओं पर वह मिस्त्री से असहमत थे. इनमें रतन टाटा की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘नैनो’ कार का उत्पादन बंद करने का मिस्त्री का फैसला भी शामिल था. मिस्त्री के हटने के बाद रतन ने अक्टूबर 2016 से कुछ समय के लिए अंतरिम चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी संभाली और जनवरी 2017 में नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा समूह का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए.

तब से वह टाटा संस के अवकाश प्राप्त चेयरमैन थे. इसी दौरान उन्होंने 21वीं सदी के कुछ युवा उद्यमियों की मदद की, अनेक प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों और स्टार्ट-अप में निवेश किया. टाटा ने व्यक्तिगत हैसियत से 30 से ज्यादा स्टार्ट-अप में निवेश किया, जिनमें ओला इले्ट्रिरक, पेटीएम, स्नैपडील, लेंसकार्ट और ज.विामे शामिल हैं.

कुछ ही महीने पहले की बात है. वो एक मानसून की भीगी-भीगी सी शाम थी. कुत्तों से बेहद प्रेम और स्नेह रखने वाले रतन टाटा ने अपने सभी सहयोगियों, कर्मचारियों से कह दिया कि मुंबई के आलीशान इलाके में स्थित टाटा समूह के मुख्यालय के दरवाजे लावारिस कुत्तों के लिए खोल दिए जाएं. टाटा समूह मुख्यालय में शरण लेने वाले बहुत से कुत्ते अपने मालिक रतन टाटा के स्नेह के चलते फिर वहीं के होकर रह गए. लेकिन अब उनसे स्नेह और प्रेम करने वाले रतन टाटा अनंत यात्रा पर चले गए हैं.

रतन टाटा ने भारतीय उद्योग जगत को नई ऊंचाइयां दीं, उनकी कमी हमेशा खलेगी: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर बृहस्पतिवार को दुख जताया और कहा कि उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को नई ऊंचाइयां दीं तथा देश को उनकी कमी हमेशा खलेगी. प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”श्री रतन टाटा जी ने अपने अथक परिश्रम व प्रगतिशील दृष्टिकोण से भारतीय उद्योग जगत को नई ऊंचाइयां दीं. लोककल्याण व मानवता की सेवा के क्षेत्र में श्री रतन टाटा जी द्वारा गढ़ी गई अभूतपूर्व मिसाल सदियों तक प्रेरणा देती रहेगी.” उन्होंने कहा, ”देश को उनकी कमी हमेशा खलेगी. श्री रतन टाटा जी के परिजनों एवं प्रियजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. ईश्वर उन्हें श्रीचरणों में स्थान दें. ओम शांति.”

रतन टाटा का निधन एक युग का अंत: जयशंकर और शेखावत नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को शोक जताते हुए कहा कि उद्योग जगत की दिग्गज हस्ती रतन टाटा का निधन ‘एक युग का अंत’ है.
टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह 86 वर्ष के थे.
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि टाटा भारतीय उद्योग के आधुनिकीकरण से गहराई से जुड़े हुए थे.
उन्होंने कहा, ”रतन टाटा का निधन एक युग का अंत है. वह भारतीय उद्योग के आधुनिकीकरण के साथ गहराई से जुड़े थे. वह इसके वैश्वीकरण के साथ तो और भी अधिक जुड़े थे.” जयशंकर ने कहा, ”मुझे अनेक अवसरों पर उनसे बातचीत करने का सौभाग्य मिला था. मैं उनके दृष्टिकोण और अंतर्दृष्टि से लाभान्वित हुआ. उनके निधन पर शोक में राष्ट्र के साथ शामिल हूं. ओम शांति.” केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि टाटा ने भारत के कॉरपोरेट परिदृश्य पर एक ‘अमिट छाप’ छोड़ी है.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”एक युग का अंत! यह जानकर बहुत दुख हुआ कि श्री रतन टाटा जी अब हमारे बीच नहीं रहे. एक दूरदर्शी व्यवसायी और परोपकारी, जिन्होंने भारत के कॉरपोरेट परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी, उनकी नैतिकता, सहानुभूति और करुणा की विरासत हमेशा प्रेरित करेगी.” केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”संपूर्ण टाटा समूह परिवार और उन सभी लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं, जिनके जीवन को उन्होंने अपनी उदारता और दयालुता से प्रभावित किया. ओम शांति.”

रतन टाटा मेरे हीरो, उनकी प्रेरणा से ओला इले्ट्रिरक की स्थापना : भाविश अग्रवाल

ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि रतन टाटा ने उनमें इले्ट्रिरक वाहन (ईवी) को लेकर जुनून जगाया और इसी वजह से ओला इले्ट्रिरक की स्थापना हुई. अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर ‘रतन टाटा, मेरे हीरो’ शीर्षक से लिखा है कि कैसे टाटा ने ओला इले्ट्रिरक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

उन्होंने कहा, ”एक कहानी मैं आज साझा करना चाहता हूं. मेरी दूसरी कंपनी ओला इले्ट्रिरक की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. 2017 में एक दिन मुझे उनका फोन आया और उन्होंने मुझसे मुंबई आने के लिए कहा.” अग्रवाल ने लिखा, ”उन्होंने सिर्फ इतना कहा ”मैं भावी आपको कहीं ले जाने और कुछ रोमांचक चीजें दिखाना चाहता हूं.” उन्होंने कहा, ” …इले्ट्रिरक वाहन बनाने की उनकी निजी परियोजना को देखने के लिए हम उनके विमान से कोयंबटूर गये. वह इले्ट्रिरक वाहनों को लेकर बहुत उत्साहित थे. वह मुझे एक परीक्षण ट्रैक पर भी ले गये. उन्होंने इंजीनियरिंग स्तर पर कुछ सुधारों के बारे में भी सुझाव दिये.”

अग्रवाल ने कहा, ”यही वह दिन था जब ओला इले्ट्रिरक वास्तव में शुरू हुई थी. क्योंकि उसने मेरे अंदर इले्ट्रिरक वाहनों और कारों के लिए जुनून जगाया.” उन्होंने कहा, ”उसके बाद, हमने जिस भी उत्पाद की परिकल्पना की और डिजाइन किया, मैं उनके पास जाकर उन्हें दिखाता था. वह मेरी बातों को ध्यान और पूरे धीरज के साथ सुनते और अपनी राय देते थे.” अग्रवाल ने कहा, ”टाटा का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है. अन्य लोगों की तरह वह मेरे लिए भी हीरो थे… टाटा के साथ मेरा रिश्ता 2008 में शुरू हुआ. मैं आईआईटी बॉम्बे से स्नातक कर रहा था और वह हमारे दीक्षांत समारोह में अतिथि वक्ता के रूप में आये थे. मैं उस समय युवा था लेकिन देश की सेवा को लेकर उनकी कही बातें मेरे मन में बस गयी.”

उन्होंने कहा, ”2015 में, मुझे टाटा से मिलने का मौका मिला और उन्होंने ओला में निवेश करने का फैसला किया. लेकिन उनके साथ मेरी बातचीत यहीं खत्म नहीं हुई. वह तो बस शुरू ही हुए थे. टाटा का व्यक्तित्व अलग था, मैं जिनसे भी मिला, वह सब उद्योगपतियों से बल्कुल अलग थे.” टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन टाटा का बुधवार रात निधन हो गया. वह 86 साल के थे.

….जब सुबह की सैर पर किया वादा निभाया रतन टाटा ने
बात 1992 की है. मुंबई के यूनाइटेड र्सिवसेस क्लब में कुछ दूरी से ‘हाय कैप्टन’ के अभिवादन की आवाज आती थी और उद्योगपति रतन टाटा तथा सेना के युवा कैप्टन विनायक सुपेकर साथ-साथ टहलते हुए गुफ्तगू करते थे, अपने किस्से साझा करते थे. उस घटनाक्रम के 32 साल बाद जब देश रतन टाटा के निधन पर शोक मना रहा है, कर्नल सुपेकर (सेवानिवृत्त) उनके साथ अपनी बातचीत को याद करते हैं. सुपेकर उस समय महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजरन जनरल बी जी शिवले के एड-डि-कैंप (सहायक) थे. सुपेकर बताते हैं कि उन्होंने समुद्र किनारे क्लब के रास्ते पर चहलकदमी करने के दौरान टाटा के साथ एक बातचीत में अपने एक सहयोगी के बेटे का विषय उठाया था.

सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी अब पुणे में रहते हैं. उन्होंने पुणे से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ”मैंने सर (रतन टाटा) से कहा कि एक साथी सैन्य अधिकारी का बेटा कमर से नीचे से विकलांग है और उसे नौकरी की जरूरत है. ” उन्होंने कहा, ”महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र के मुख्यालय में मेरे तत्कालीन सहयोगी लेफ्टिनेंट कर्नल बी एस बिष्ट का बेटा विजय विष्ट एक घोड़े से गिरकर बुरी तरह घायल हो गया था और उसके पैरों में गंभीर चोट आई थीं. मुझे पता चला था कि वह नौकरी की तलाश कर रहा है.” सुपेकर के मुताबिक टाटा ने कहा कि जो भी जरूरी होगा, करेंगे. उन्होंने कहा, ”अगली सुबह विजय को दक्षिण मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बंबई हाउस से फोन आया और प्रशासनिक सेक्शन में काम पर आने को कहा गया.” रतन टाटा ने इस घटना के एक साल पहले ही अपने चाचा जेआरडी टाटा से टाटा समूह की कमान संभाली थी.

सुपेकर ने कहा, ”कोलाबा में सेना का एक पशु चिकित्सालय था और रतन टाटा अपने कुत्ते को नियमित जांच के लिए वहां ले जाते थे. एक बार, एक साथी सैन्य अधिकारी ने टाटा को धैर्यपूर्वक कतार में अपनी बारी का इंतजार करते देखा. अधिकारी, जो मेरे एक दोस्त थे, उन्होंने उनसे कतार से बाहर निकलकर आगे जाने के लिए कहा लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया.” उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी इतने बड़े उद्योगपति की ऐसी विनम्रता देखकर हैरान रह गए.

दुनिया की सैर का मेरा सपना पूरा करने में रतन टाटा ने की थी मदद : पूर्व पत्रकार

पूर्व पत्रकार विष्णुदास चापके ने 2016 में दुनिया की यात्रा करने का फैसला किया, तो उन्होंने ‘क्राउडफंडिंग’ (लोगों से छोटी छोटी आर्थिक मदद) का सहारा लिया. लेकिन यह यात्रा लगातार चुनौतीपूर्ण होती गई क्योंकि उन्हें पैसे की कमी का सामना करना पड़ा और उन्हें इसे बीच में ही रद्द करने का भी विचार आया. लेकिन उन्होंने रतन टाटा की उदारतापूर्ण मदद की बदौलत दुनिया भर में यात्रा करने का अपना सपना पूरा किया. चापके ने बृहस्पतिवार को टाटा के निधन के बाद उन्हें याद करते हुए यह किस्सा साझा किया. चापके उन अनगिनत लोगों में से एक हैं जिनके जीवन में रतन टाटा के परमार्थ कार्यों ने उजाला किया.

चापके ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”रतन टाटा की उदारतापूर्ण मदद के कारण ही मेरी यात्रा पूरी हो सकी.” उन्होंने कहा, ”भारत ने एक ऐसा बेटा खो दिया है जो कुछ अलग करने की हिम्मत दिखा रहे आम लोगों के सपनों को पूरा कर रहा था.” चापके ने कहा कि वह चिली में थे और वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे थे, तभी टाटा ट्रस्ट्स से आए एक फोन कॉल ने उनका मनोबल बढ़ाया और उनकी यात्रा को गति दी.

रतन टाटा के दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को गौरवान्वित किया: स्वदेशी जागरण मंच

स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने बृहस्पतिवार को दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने हमेशा भारत को गौरवान्वित किया. एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि वह युवा उद्यमियों के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के ‘स्वदेशी’ आंदोलन के अग्रदूत थे. उन्होंने कहा, ”स्वतंत्रता से पहले के ‘स्वदेशी’ बड़े इस्पात उद्योग की विरासत को आगे कायम रखते हुए रतन टाटा का जीवन न केवल हमारे देश में बल्कि दुनियाभर में उभरते उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है.”

कपिल देव ने रतन टाटा की विनम्रता को याद किया

भारत के 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने प्रतिष्ठित उद्योगपति रतन टाटा को उनकी विनम्रता और जानवरों के प्रति प्रेम के लिए याद करते हुए कहा कि वह स्वतंत्रता के बाद की देश की शीर्ष 10 हस्तियों में शामिल रहेंगे. कपिल ने गोल्फ के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ”स्वतंत्रता के बाद से अगर हमें 10 महान हस्तियों को चुनना है तो वह इसमें नीचे नहीं बल्कि सबसे ऊपर होंगे. उन्होंने एक उदाहरण पेश किया कि कैसे एक उद्योग बनाया जाना चाहिए और यह भी अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए. ” कपिल ने कहा, ”मैं उनसे कई बार मिला हूं. उनका ‘सेंस ऑफ ‘ूमर’ बहुत अच्छा था और उन्हें जानवरों से बहुत प्यार था, मुझे सबसे ज्यादा यही पसंद था. उनकी मानवता और विनम्रता ने उन्हें ऐसा बनाया. आप हमेशा अच्छे लोगों को याद रखते हैं. और उन्होंने देश के लिए जो किया, उनके उद्योग ने जो किया उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. ”

सबसे नैतिकता वाले व्यक्तियों में से एक, रतन टाटा का योगदान हमेशा कायम रहेगा: सीओएआई

रतन टाटा सबसे नैतिकता वाले व्यक्तित्वों में से एक थे और समाज और उससे आगे उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा. सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक एस पी कोचर ने बृहस्पतिवार को यह बात कही. सीओएआई के महानिदेशक ने कहा कि टाटा एक दूरदर्शी, एक सच्चे राष्ट्रवादी, एक चतुर व्यवसायी और सबसे बढ़कर, दूसरों के प्रति बहुत सहानुभूति रखने वाले महान इंसान थे.

उन्होंने कहा, ”वह भारत में अपने कद के सबसे नैतिक व्यक्तियों में से एक थे. उन्हें हमेशा एक ऐसी अग्रणी हस्ती के रूप में याद किया जाएगा और सम्मानित किया जाएगा, जिनके देश के औद्योगिक परिदृश्य और परोपकारी प्रयासों पर प्रभाव को हमेशा याद किया जाएगा.”  कोचर ने कहा, ”उनके योगदान ने देश के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है, जिससे भारत को वैश्विक मंच पर एक ताकत बनने में मदद मिली है.”

टाटा अपने आप में एक संस्थान थे: जी. पी. हिंदुजा

हिंदुजा समूह के चेयरमैन जी. पी. हिंदुजा ने बृहस्पतिवार को कहा कि रतन टाटा न केवल भारत के अग्रणी और महानतम कारोबारी दिग्गज थे, बल्कि वह अपने आप में एक संस्थान थे. उन्होंने कहा, ” रतन टाटा न केवल भारत के अग्रणी और महानतम कारोबारी दिग्गज थे, बल्कि वह अपने आप में एक संस्थान थे. रतन ने टाटा विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाकर इसमें कई चिरस्थायी अध्याय जोड़े.” रतन टाटा को भारत की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व बताते हुए हिंदुजा ने कहा, ” वह हमेशा उन अनगिनत भारतीयों में जीवित रहेंगे, जिन्हें उन्होंने अपने पेशेवर और परोपकारी कार्यों से प्रभावित किया.”

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