भारत ने सबसे बड़े ऊर्जा संकट में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया: मोदी

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 04 Jul 2026 04:41 PM
भारत ने सबसे बड़े ऊर्जा संकट में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया: मोदी
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पचपदरा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत ने अपनी बेहतर नीतियों, ईंधन आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के दम पर दुनिया के सबसे बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक का सफलतापूर्वक सामना किया तथा इसका बोझ देश के नागरिकों पर बहुत कम पड़ा।

मोदी ने पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े। उन्होंने कहा कि देशवासी इस मुश्किल समय में जिस तरह से देश के साथ मजबूती से खड़े रहे, देश उसी विश्वास के भरोसे आगे बढ़ पाया है।

राजस्थान दौरे पर आए प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा के पचपदरा में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परिसर को राष्ट्र को सर्मिपत किया। साथ ही उन्होंने एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों का आॅनलाइन तरीके से शिलान्यास/उद्घाटन और लोकार्पण किया।
इस मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा संकट के दौरान अफवाहें फैलाई गईं, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, ओछी राजनीति की गई लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।

मोदी ने कहा कि व्यक्ति और देश का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। उन्होंने रिफाइनरी के उद्घाटन का जिक्र करते हुए कहा, ”आज का दिन साक्षी है कि भाजपा सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन-रात एक कर देते हैं।”

रिफाइनरी में दो महीने पहले हुए अग्निकांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बाद इतनी तेजी से काम पूरा कर लेना भी परिश्रम की पराकाष्ठा का उदाहरण है। मोदी ने कहा, ”आप सभी ने दिखा दिया है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी और अप्रत्याशित क्यों न हो, नया भारत अपने संकल्पों से न तो पीछे हटता है और न ही अपनी रफ्तार कम करता है।”

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ”बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं। लेकिन 21वीं सदी के इस सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और प्रयास भारी पड़े हैं।” मोदी ने कहा कि इस संकट के दौरान भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए… संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई और भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। उन्होंने कहा, ”भारत की ‘डिप्लोमेटिक पावर’ का सकारात्मक इस्तेमाल किया गया और तब जाकर भारत सकंट से उबर पाया है।”

उन्होंने कहा कि युद्ध के इसी समय में भारत की दूसरे देशों के साथ दोस्ती बहुत काम आई। उन्होंने कहा, ”जब यह संकट शुरू हुआ था, उससे पहले भारत 25-26 देशों से ईंधन का आयात करता था लेकिन संकट के समय भारत की कूटनीति का जलवा दिख गया और दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध इस संकट की घड़ी में बहुत काम आए।”

उन्होंने कहा, ”युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्रहित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। ‘नागरिक देवो भव?’ हमारा मंत्र है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक कीमतों में वृद्धि के कारण अप्रैल से जून के बीच तेल कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, लेकिन सरकार ने इसका बोझ खुद उठाया।

उन्होंने कहा, ”हमने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की और यह सुनिश्चित किया कि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।” प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थी। उन्होंने कहा, ”बहुत अफवाएं फैलाई गई, लोगों को डराया गया, भड़काया गया, राजनीति के खेल खेले गए। लेकिन जिनके इरादे गलत थे, वे सफल नहीं हो पाए।”

मोदी ने कहा, ”जो लोग भारत को असफल होते देखना चाह रहे हैं, इसके लिए भविष्यवाणी भी करने लग गए थे। वे आज निराशा की गर्त में पड़े होंगे।”भारत की बढ़ती ऊर्जा क्षमता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रिफाइंिनग क्षमता वाला देश बन चुका है और इस क्षमता का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने वैश्विक संघर्षों के कारण ईंधन और उर्वरक आपूर्ति में आई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की दीर्घकालिक नीतियों के कारण भारत इन व्यवधानों से सफलतापूर्वक उबर सका। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति या राष्ट्र का स्वाभिमान तभी ऊंचा रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 से 2023 के दौरान राजस्थान में कांग्रेस सरकार के समय पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का काम लगभग ठप पड़ा रहा। उन्होंने कहा,”कठिन से कठिन लगने वाले संकल्प भी सिद्ध हो जाते हैं अगर नीयत साफ हो। यही बड़ा अंतर भाजपा और कांग्रेस में है। राजस्थान में पानी से जुड़ी समस्या का समाधान इसका उदाहरण है।

कांग्रेस की सरकारों ने कभी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।” उन्होंने कहा,”भाजपा क्षेत्रवाद और बंटवारे की सियासत नहीं करती। भाजपा राष्ट्र प्रथम की भावना पर चलती है।”इससे पहले प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी की मुख्य नियंत्रण इकाई का अवलोकन कर शोधन प्रक्रिया, तकनीकों और उत्पादों की जानकारी ली और युवा कार्मिकों से संवाद किया। उन्होंने श्रमिकों से बातचीत किया और उनके साथ फोटो भी ंिखचवाई।

प्रधानमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रिफाइनरी परिसर में खेजड़ी का पौधा रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप ंिसह पुरी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी मौजूद थे।

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