नयी दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि जी-20 अंतररष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है और भारत विकासशील देशों एवं ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने के लिए इस मंच का उपयोग करने की इच्छा रखता है.
बिरला ने संसद भवन परिसर में जाम्बिया गणराज्य के नेशनल असेंबली की स्पीकर नेली बुटेटे काशुम्बा मुट्टी के नेतृत्व में आए एक शिष्टमंडल से मुलाकात के दौरान यह बात कही.
लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, बिरला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है जहां 90 करोड़ से अधिक मतदाता लोकसभा के 545 सदस्यों का चुनाव करते हैं तथा सदन में जनप्रतिनिधि, नागरिकों की आशाओं, आकांक्षाओं और अभावों को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं.
भारत के जी-20 समूह की अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जी-20 समूह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है और भारत विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के अहम मुद्दों को हल करने के लिए इस मंच का उपयोग करने की इच्छा रखता है.
बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारत पी-20 सम्मेलन (जी20 देशों के संसदों के अध्यक्षों) का आयोजन भी करने जा रहा है.
बिरला ने बताया कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा के अनुरूप भारत सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखता है और इसी आधार पर जी-20 का विषय थीम- ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ रखा गया है.
भारत की जी20 अध्यक्षता संबंधी प्राथमिकताएं समावेशी एवं व्यावहारिक : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को संसद में कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता संबंधी प्राथमिकताएं समावेशी एवं व्यावहारिक हैं तथा इनमें महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हेतु व्यापक क्षेत्र सम्मिलित हैं. विदेश मंत्री ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की जी20 अध्यक्षता संबंधी प्राथमिकताएं समावेशी एवं व्यावहारिक हैं तथा इनमें महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हेतु व्यापक क्षेत्र सम्मिलित हैं जिनमें समावेशी और अनुकूल विकास; हरित विकास और पर्यावरण हेतु जीवनशैली (मिशन लाइफ); प्रौद्योगिकीय परिवर्तन और सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना; बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार; महिलाओं के नेतृत्व में विकास तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव शामिल हैं.’’ भारत ने नवंबर में बाली में जी20 के वार्षिक शिखर सम्मेलन में इसकी अध्यक्षता ग्रहण की. भारत इस वर्ष के अंत में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से पहले कई कार्यक्रमों और बैठकों की मेजबानी कर रहा है.
जयशंकर ने कहा, ‘‘ हमारा प्रयास है कि वॉयस आॅफ ग्लोबल साउथ समिट से प्राप्त जानकारी की जी20 विचार-विमर्श सहित विश्व स्तर पर स्वीकार्यता हो.’’ उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ‘‘ग्लोबल साउथ’’ की आवाज को प्रखर बनाया है. उन्होंने कहा कि भारत ने 12-13 जनवरी, 2023 को एक विशिष्ट पहल के रूप में ‘‘यूनिटी आॅफ वॉइस, यूनिटी आॅफ पर्पज’’ विषय के तहत डिजिटल तरीके से दो दिवसीय विशेष सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें भारत सहित ‘ग्लोबल साउथ के 125 देशों ने भाग लिया.