
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत का बढ़ता प्रभाव यह सुनिश्चित करेगा कि विश्व व्यवस्था में संपूर्ण संतुलन स्वतंत्रता, खुलापन, पारर्दिशता और नियम आधारित व्यवस्था के पक्ष में बना रहे. ‘निक्की एशिया फ्यूचर ऑफ एशिया फोरम’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए जयशंकर की यह टिप्पणी चीन के आर्थिक अधिपत्य रखने वाला देश बनने का प्रयास करने के बीच आई है.
जयशंकर ने कहा कि विश्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है जो भू-राजनीति, भू-अर्थव्यवस्था और भू-प्रौद्योगिकीय विकास द्वारा संचालित हो रहा तथा एशिया एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र के इस परिर्वतन का हिस्सा रहने के साथ, विश्व व्यवस्था वर्तमान में तनाव का सामना कर रही है.
उन्होंने कहा, ”लेकिन हम जो कुछ देख रहे हैं वह महज परिवर्तन नहीं है, बल्कि कहीं अधिक जोखिम भी लिया जा रहा है. यूक्रेन में संघर्ष, पश्चिम एशिया में हिंसा तथा एशिया एवं हिंद-प्रशांत में अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौतों का असम्मान किये जाने में यह नजर आ रहा है.” विदेश मंत्री ने कहा कि शायद कहीं अधिक चिंता पैदा करने वाले इसके आर्थिक आयाम हैं. उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला चुनौती, वैश्वीकरण से उत्पन्न अत्यधिक सकेंद्रण और राष्ट्रों द्वारा आर्थिक वर्चस्व का इस्तेमाल जोर पकड़ रहा है.
मंत्री ने कहा कि समान रूप से प्रौद्योगिकी चुनौती भी महत्वपूर्ण है जिसने अंतर-निर्भरता के एक नये स्तर का निर्माण किया है जिसके परिणामस्वरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इले्ट्रिरक व्हीकल (ईवी), हरित एवं स्वच्छ प्रौद्योगिकियों ने उम्मीद एवं चिंता बढ़ाई है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कई आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण बन गई है. जयशंकर ने कहा कि भारत का एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरना एशिया में बहुध्रुवीयता को मजबूत करने के लिए जरूरी है जो बहुध्रुवीय विश्व के लिए आवश्यक है.
उन्होंने कहा, ”भारत का बढ़ता प्रभाव यह सुनिश्चित करेगा कि विश्व व्यवस्था में संपूर्ण संतुलन स्वतंत्रता, खुलापन, पारर्दिशता और नियम आधारित व्यवस्था के पक्ष में बना रहे.” उन्होंने उल्लेख किया, ”समान रूप से, इसकी जिम्मेदारी की अधिक भावना और अधिक योगदान भी एक अंतर पैदा कर रहा है. भारतीय नौसेना के पोत वर्तमान में लाल सागर में संचालित हो रहे हैं ताकि समुद्री नौवहन की सुरक्षा की जा सके.”
किर्गस्तिान में भारतीय छात्रों की भलाई के लिए उपाय किए जाएं : छात्र संगठन ने जयशंकर से कहा
जम्मू-कश्मीर के एक छात्र संगठन ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि किर्गस्तिान में भारतीय छात्रों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए तुरंत ”सक्रिय कदम” उठाए जाएं. हाल में भीड़ ने राजधानी बिश्केक में विदेशी छात्रों को निशाना बनाया था, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं.
‘जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ ने अपने पत्र में यह भी कहा कि वहां पढ़ने वाले कश्मीर के छात्र घटना के बाद ”अपने वतन लौटने का इंतजार कर रहे हैं.” इस बीच, किर्गस्तिान में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि बिश्केक में स्थिति ”शांतिपूर्ण बनी हुई है.” दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”हालांकि, भारतीय मेडिकल छात्रों के अनुरोध पर, दूतावास उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक छात्रों के परिवहन की व्यवस्था करने के लिए इस देश के मेडिकल विश्वविद्यालयों के साथ संपर्क बनाए हुए है.” छात्र संगठन ने अपने पत्र में कहा कि कई कश्मीरी छात्र और उनके अभिभावकों ने ”परेशान करने वाली कई घटनाओं के बाद अपना डर और चिंता व्यक्त करते हुए हमसे संपर्क किया है.”



