
गुरुग्राम/कोलकाता. उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को आध्यात्म, ध्यान और अंत: जागरण में निहित भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर जोर दिया और संतों, ऋषियों और मुनियों के गहन योगदान को याद किया जिनकी तपस्या व ध्यान साधना ने भारत के शाश्वत ज्ञान को आकार दिया है.
राधाकृष्णन ने ये बातें गुरुग्राम में ब्रह्माकुमारी के ‘ओम शांति रिट्रीट सेंटर’ (ओएसआरसी) के रजत जयंती वर्ष समारोह की शुरुआत करते हुए कही. उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस केंद्र के समारोह में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की जिसकी स्थापना 24 वर्ष पहले ब्रह्माकुमारी के आध्यात्मिक दृष्टिकोण से हुई थी और अब यह अपनी सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने केंद्र के शांति और ध्यान के संदेश की ओर आर्किषत होने वाले वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, प्रशासकों, राजनेताओं जैसे पेशेवरों की विविधता की सराहना की.
उन्होंने कहा कि राजयोग और विपश्यना जैसी परंपराएं इस बात के महत्व को इंगित करती है कि सच्ची शक्ति और स्पष्टता भीतर से ही उभरती है. राधाकृष्णन ने इस आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने और भारत तथा विदेशों में लाखों लोगों को मन की शांति और पवित्रता की ओर मार्गदर्शन करने के लिए ब्रह्माकुमारी की सराहना की. उन्होंने ब्रह्माकुमारी को दुनिया के सबसे बड़े महिला-नेतृत्व वाले आध्यात्मिक संगठन के रूप में उभरने के लिए बधाई दी. उपराष्ट्रपति ने आध्यात्म, ध्यान और अंत: जागरण में निहित भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि अमृत काल में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक विकसित भारत-2047 की कल्पना की है, जहां आर्थिक विकास, आंतरिक स्थिरता, प्रसन्नता और शांति एक-दूसरे के पूरक हों. उन्होंने कहा कि आज के तेज गति से बदल रहे संसार में ध्यान को एक आवश्यक जीवन कौशल के रूप में अपनाया जाना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति ओम शांति रिट्रीट सेंटर की दृढ़ प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल मिशन लाइफ के साथ तालमेल की भी सराहना की.
उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति ओम शांति रिट्रीट सेंटर की दृढ़ प्रतिबद्धता और मिशन लाइफ के साथ समन्वय की भी सराहना की – यह एक ऐसी पहल है जो लोगों को ग्रह-समर्थक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है. उन्होंने केंद्र की हरित पहलों की भी सराहना की जिनमें एक मेगावाट का हाइब्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन प्रणालियां, बायोगैस और सीवेज शोधन संयंत्र, हरित रसोई, नि:शुल्क पौध नर्सरी और कल्प तरु परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण शामिल हैं.
उपराष्ट्रपति ने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान तथा सभी क्षेत्रों में कर्मयोग को बढ़ावा देने वाली अन्य सामाजिक पहलों में ब्रह्माकुमारी के योगदान की सराहना की. हाल ही में लखनऊ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा ब्रह्माकुमारी के वार्षिक अभियान ‘‘विश्व एकता और विश्वास के लिए राजयोग ध्यान’’ के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने विश्वास व्यक्त किया कि रजत जयंती वर्ष सेवा के नए मार्ग खोलेगा, सामाजिक साझेदारी को और गहरा करेगा और आध्यात्मिक पहुंच को बढ़ाएगा.
इस अवसर पर हरियाणा सरकार के पर्यावरण एवं वन तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह तथा ब्रह्माकुमारी के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे.
कोलकाता में विशाल गीता पाठ समारोह में लाखों लोगों ने भाग लिया
पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों से साधुओं एवं साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने कोलकाता के ‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड’ में आयोजित भगवद गीता पाठ समारोह में भाग लिया. कार्यक्रम के आयोजकों ने यह जानकारी दी. आयोजकों ने बताया कि भगवा वस्त्र पहने भिक्षुओं ने कार्यक्रम स्थल पर गीता की प्रतियों से एक स्वर में श्लोक पढ़ा.
इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के पूर्व प्रमुख सुकांत मजूमदार, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्र पॉल सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया. इसी के साथ स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा धीरेंद्र शास्त्री सहित प्रमुख धार्मिक हस्तियां भी समारोह में शामिल हुई.
‘पंच लाखो कोंठे गीता पाठ’ (एक साथ पांच लाख गीता पाठ) नामक इस कार्यक्रम का आयोजन सनातन संस्कृति संसद द्वारा किया गया जो विभिन्न मठों और हिंदू धार्मिक संस्थानों के भिक्षुओं और आध्यात्मिक नेताओं का एक समूह है. बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं सहित उत्साही भीड़ ने शंखनाद और जयघोष के बीच भगवान कृष्ण का नाम जपते हुए जयकारे लगाए. राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने सभा को संबोधित करते हुए भगवद् गीता का पाठ किया तथा शांति और अहिंसा की बात की. प्रदीप्तानंद महाराज ने कहा कि लाखों की संख्या में लोगों का एकत्रित होना स्वत?स्फूर्त था और इसमें किसी राजनीतिक दल की कोई भूमिका नहीं थी.
प्रदीप्तानंद महाराज ने कहा, “प्रशासन के एक वर्ग के असहयोग के बावजूद पांच लाख से अधिक लोग प्रेम और भक्ति के कारण भगवद् गीता का पाठ करने और सनातन हिंदू धर्म को बचाने के लिए स्वेच्छा से आए.” पॉल ने कहा, “गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, यह भारत के सभी 140 करोड़ लोगों के लिए है.” आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की आध्यात्मिक विरासत को जागृत करना और धर्मग्रंथों के माध्यम से सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि इसे (कार्यक्रम) राज्य और संभवत? देश में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक गीता पाठ बताया जा रहा है.
भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे, क्योंकि आयोजकों ने पांच लाख लोगों के भाग लेने का अनुमान जताया था. विशाल आयोजन स्थल पर तीन बड़े मंच बनाए गए थे और मध्य कोलकाता में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. आध्यात्मिक नेतृत्व गीता मनीषी महामंडल के स्वामी ज्ञानानंदजी महाराज ने किया. जानकारी के मुताबिक, यह आयोजन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ की तर्ज पर एक मस्जिद की नींव रखे जाने के एक दिन बाद सामने आया. दिसंबर 2023 में लोकसभा चुनाव से पहले ‘ब्रिगेड’ में इसी तरह का ‘एक लाख स्वर’ वाला गीता पाठ कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसके ठीक दो साल बाद आज यानी रविवार को ‘पंच लाखो कोंठे गीता पाठ’ नामक इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया.



