
पटना. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद द्वारा बाबासाहेब आंबेडकर का ‘अपमान’ किया जाना ‘कोई छोटी गलती’ नहीं है और यह ‘दलितों के प्रति अनादर की मानसिकता’ को दर्शाता है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष ने यह टिप्पणी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में की. यह बैठक बिहार में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आयोजित की जा रही है.
सिंह ने कहा, ”लालू प्रसाद ने अपने पैरों के पास बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर रखवाई थी. यह कोई छोटी गलती नहीं थी, बल्कि (यह) दलितों के प्रति अनादर की मानसिकता को दर्शाती है… बिहार को उन लोगों ने धोखा दिया है, जो समाजवाद की आड़ में अपने सामंती रवैये को छिपाते रहे हैं.” पूर्व मुख्यमंत्री प्रसाद उस वीडियो क्लिप को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं, जिसमें आंबेडकर की तस्वीर उनके पैरों के पास देखी गई थी. यह उस दिन की घटना है जब लोग राजद प्रमुख को 78वें जन्मदिन पर बधाई देने उनके आवास पर आए थे.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले महीने सीवान जिले में एक रैली में राजद सुप्रीमो पर निशाना साधते हुए कहा था कि उन्हें ”बिहार और देश के लोग कभी माफ नहीं करेंगे”. हालांकि राजद ने स्पष्टीकरण दिया था कि तस्वीर एक समर्थक के हाथ में थी और भ्रम की स्थिति के लिए ‘कैमरे के कोण’ को जिम्मेदार ठहराया था.
इससे पहले, भाजपा बिहार इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बैठक शुरू होने से पहले कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का अपमान करने के कारण लालू प्रसाद के खिलाफ पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा. सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि एक घंटे से अधिक लंबा भाषण दिया. उन्होंने प्रसाद पर ”कर्पूरी ठाकुर का शिष्य होने का दावा करने” लेकिन निजी तौर पर उनके (ठाकुर के) खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करके अपनी दोहरी मानसिकता प्रर्दिशत करने का आरोप लगाया.
रक्षा मंत्री ने दावा किया, ”मैं इसे मुद्दा नहीं बना रहा हूं, (बल्कि) इसका उल्लेख वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी पुस्तक ‘ब्रदर्स बिहारी’ में विस्तार से किया है.” केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”जब लालू प्रसाद सत्ता में थे, तो उन्होंने कर्पूरी ठाकुर की याद में कुछ भी करने की जहमत नहीं उठाई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के इस महान सपूत को भारत रत्न से सम्मानित किया.” भाजपा नेता ने कहा, ”हम अतीत के बारे में बात करते रहते हैं ताकि युवा पीढ़ी राजद-कांग्रेस गठबंधन की बकवास बातों में न फंस जाए. उन्हें (युवाओं को) यह बताने की जरूरत है कि कैसे लालटेन (राजद का चुनाव चिह्न) ने अंधेरे को दूर करने के बजाय घरों में आग लगा दी.”
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दशकों में जब भी राज्य में जद (यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार रही, तब बिहार ने ”अभूतपूर्व सफलता” हासिल की है. सिंह ने कहा, ”इस अवधि में न केवल आर्थिक विकास हुआ, बल्कि बिहार ने अपना खोया हुआ गौरव भी हासिल करना शुरू कर दिया. अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने कभी बिहार को भारत का अभिशाप कहा था, लेकिन बाद में इसकी (राज्य की) बदलाव की कहानी पर ध्यान देना पड़ा.”
भाजपा की बिहार इकाई ने विपक्ष के वक्फ विरोधी रुख की आलोचना करते हुए प्रस्ताव पारित किया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बिहार इकाई ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर लालू प्रसाद की राजद नीत महागठबंधन की “तुष्टीकरण की राजनीति” की आलोचना की. महागठबंधन अप्रैल में प्रभावी हुए वक्फ अधिनियम का विरोध कर रहा है. रक्षा मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की मौजूदगी में यहां हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी ने दो पन्नों का राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया. इसके अलावा एक ‘विजय संकल्प प्रस्ताव’ भी पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में “लालू (प्रसाद) और उनके सहयोगी हमें नहीं हरा सकते”.
राजनीतिक प्रस्ताव में “मोदी सरकार के 11 वर्ष” पर विस्तार से चर्चा की गई. प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि “हम लालू यादव और महागठबंधन की तुष्टीकरण की राजनीति का विरोध करते हैं”. प्रस्ताव में राजद सुप्रीमो के बेटे तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेताओं कन्हैया कुमार व इमरान प्रतापगढ़ी की आलोचना की गई, जिन्होंने कुछ दिन पहले वक्फ अधिनियम के विरोध में यहां आयोजित एक रैली में भाग लिया था.
प्रस्ताव में कहा गया, “इन नेताओं ने वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कही. यह कानून संसद से पारित हो चुका है और इनका रुख संविधान विरोधी है. उनका रुख तुष्टीकरण की राजनीति के अनुरूप है, जो पसमांदा समुदाय के लिए बहुत नुकसानदेह है, जो सदियों से उत्पीड़न के शिकार रहे हैं.” पसमांदा एक व्यापक शब्द है जिसमें पिछड़े, दलित और आदिवासी मुसलमान शामिल हैं, जिन्हें भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन लुभाने की कोशिश कर रहा है.
प्रस्ताव में कहा गया है, “भाजपा समाज के किसी भी वर्ग के कल्याण से कभी समझौता नहीं करेगी. वक्फ संशोधन अधिनियम देश में हो रहे सामाजिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था. इसका लाभ आने वाली पीढि.यों को मिलेगा. हम इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हैं.” प्रस्ताव में 50 साल पहले लगाए गए आपातकाल का भी जिक्र किया गया और आरोप लगाया गया कि “(इंदिरा गांधी के) नारे ‘गरीबी हटाओ’ के पीछे कई पीढि.यों का जीवन बर्बाद हो गया. मोदी के नेतृत्व में ही 27 करोड़ लोग गरीबी से उबरने में सफल हुए हैं.” प्रस्ताव में राजनाथ सिंह की इस बात के लिए भी सराहना की गई कि उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करके चीन को उसकी धरती पर रहते हुए आतंकवाद के प्रति दोहरे मानदंडों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया.
‘विजय संकल्प प्रस्ताव’ में कहा गया, “यह प्रस्ताव माता सीता को सर्मिपत है. बिहार सरकार ने उनके जन्म स्थान पुनौरा धाम के विकास के लिए 882 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व की बात है. अयोध्या में राम मंदिर के बाद सीता माता का मंदिर हमारी प्राचीन विरासत का एक और भव्य प्रतीक होगा.” ‘विजय संकल्प प्रस्ताव’ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन के तहत बिहार में आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया, इसके अलावा जाति जनगणना के लिए केंद्र की मंजूरी की ओर इशारा किया गया, जो राज्य में एक भावनात्मक मुद्दा रहा है.



