जम्मू/श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 29 सीट जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. इस तरह उसने 2014 के चुनाव में मिली 25 सीट के अपने सर्वकालिक उच्चतम आंकड़े में सुधार किया है.
हालांकि, भाजपा को सबसे बड़ा झटका नौशेरा निर्वाचन क्षेत्र से उसके केंद्र शासित प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना की नेशनल कॉन्फ्रेंस के हाथों हार से मिला. इसके अलावा, पार्टी कश्मीर में किसी भी सीट पर जीत हासिल करने में विफल रही, जहां उसके लगभग दो दर्जन उम्मीदवारों में से अधिकांश की जमानत जब्त हो गई.
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन ने 48 सीट हासिल करके बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. इसमें से क्षेत्रीय दल को 42 सीट का बड़ा हिस्सा मिला. भाजपा ने इस बार 62 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिसका मुख्य जोर जम्मू क्षेत्र के पार्टी के मजबूत गढ़ पर था.
हालांकि, भाजपा राजौरी और पुंछ जिलों के पीर पंजाल क्षेत्र में पैठ बनाने की अपनी कोशिश में विफल रही, जहां उसने गुज्जर और पहाड़ी समुदाय से कई दलबदलुओं को मैदान में उतारा था. इनमें दो पूर्व मंत्रियों – चौधरी जुल्फिकार अली (बुधल) और सैयद मुश्ताक बुखारी (सूरनकोट) शामिल थे – जो क्रमश? 18,908 मतों और 10,428 मतों के बड़े अंतर से हार गए. संयोग से, 75 वर्षीय बुखारी का दो अक्टूबर को निधन हो गया. दो पूर्व मंत्रियों के अलावा रैना समेत चार पूर्व विधायक भी अपने प्रतिद्वंद्वियों से हार गए.
हालांकि, सात मंत्रियों समेत 12 पूर्व विधायकों ने सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा और ज़्यादातर ने अपनी सीट बरकरार रखीं. पार्टी के बाकी विजेता नये चेहरे हैं जिनमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी, एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और एक पूर्व नौकरशाह शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में चुनाव लड़ने के लिए सेवानिवृत्ति ली है. इसके अलावा एक महिला भी हैं, जिन्होंने नवंबर 2018 में एक आतंकवादी हमले में अपने पिता और चाचा को खो दिया था.
जम्मू कश्मीर भाजपा प्रमुख रैना नौशेरा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार सुरिंदर चौधरी से 7,819 मतों के अंतर से हार गए. रैना ने 2014 के विधानसभा चुनाव में यह सीट जीती थी. इसी प्रकार, पूर्व विधायक राजीव शर्मा छंब में कांग्रेस के बागी सतीश शर्मा से 6,929 मतों से, पूर्व विधायक जीवन लाल बनी में निर्दलीय उम्मीदवार रामेश्वर सिंह से 2,048 मतों से, पूर्व विधायक फकीर मोहम्मद खान नेशनल कान्फ्रेंस नेता नजीर अहमद खान से 1,132 मतों से तथा पूर्व विधान परिषद सदस्य विबोद कुमार कांग्रेस उम्मीदवार इफ्तकार अहमद से 1,404 मतों के अंतर से हार गए.
जम्मू कश्मीर भाजपा के उपाध्यक्ष सोफी यूसुफ श्रीगुफवारा-बिजबेहरा से केवल 3,716 वोट हासिल कर पाए, जहां विजयी नेशनल कान्फ्रेंस उम्मीदवार को 33,299 वोट मिले, उसके बाद पीडीपी की इल्तिजा मुफ्ती रहीं जिन्हें 23,529 वोट मिले. भाजपा के लिए चुनाव जीतने वाले अन्य प्रमुख लोगों में पूर्व मंत्रियों शाम लाल शर्मा, सुरजीत सिंह सलाथिया (सांबा), पवन कुमार गुप्ता (उधमपुर पश्चिम), देवेंद्र कुमार मन्याल (रामगढ़), राजीव जसरोटिया (जसरोटा), शक्ति राज परिहार (डोडा पश्चिम), चंद्र प्रकाश (विजयपुर) और सुनील शर्मा (पद्दर-नागसेनी) और पूर्व विधायकों देवेंद्र सिंह राणा (नगरोटा), कुलदीप राज दुबे (रियासी), दलीप सिंह (भद्रवाह), बलदेव राज शर्मा (श्री माता वैष्णो देवी) और रणबीर सिंह पठानिया (उधमपुर पूर्व) शामिल हैं.
देवेन्द्र सिंह राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेशनल कान्फ्रेंस के जोगिंदर सिंह (17,641) के खिलाफ 30,472 मतों के सर्वाधिक अंतर से जीत दर्ज की, जबकि स्लाथिया ने भी निर्दलीय उम्मीदवार रवीन्द्र सिंह (12,873) के खिलाफ 30309 मतों से जीत दर्ज की.
पिछले साल भाजपा में शामिल हुए दो बार के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने चेनानी विधानसभा क्षेत्र से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एवं पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह को 15,611 मतों से हराया. नेशनल पैंथर्स पार्टी (इंडिया) के अध्यक्ष सिंह, मनकोटिया के रिश्ते के भाई हैं.
भाजपा के दर्शन कुमार ने बसोहली निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दो बार के सांसद चौधरी लाल सिंह को 16,034 मतों के भारी अंतर से हराया, जबकि भाजपा के दो बार के विधायक गारू राम ने सुचेतगढ़ क्षेत्र से 11,141 मतों के अंतर से जीत हासिल की.
भाजपा उम्मीदवार अरविंद गुप्ता और सतीश कुमार शर्मा ने जम्मू पश्चिम और बिलावर क्षेत्रों से क्रमश? 22,127 और 21,388 मतों से जीत हासिल की.
शगुन परिहार (किश्तवाड़) ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और पूर्व मंत्री सज्जाद किचलू (नेशनल कान्फ्रेंस) को 521 मतों के मामूली अंतर से हराया. पूर्व एसएसपी मोहन लाल ने अखनूर से 24,679 मतों के अंतर से जीत हासिल की, पूर्व कृषि निदेशक भरत भूषण कठुआ सीट से 12,117 मतों से और सुनील भारद्वाज (रामनगर) 9,306 मतों से विजयी हुए.
रवींद्र रैना जिनके नेतृत्व में भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रवींद्र रैना क्षेत्र में पार्टी के ‘पोस्टर ब्वॉय’ के रूप में जाने जाते हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 29 सीट के साथ अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है लेकिन वह स्वयं अपनी नौशेरा सीट बचाने में असफल रहे.
रैना ने नतीजे आने के बाद कहा,”मैंने जनादेश को स्वीकार कर लिया है. मैं उनके समर्थन के लिए उनका धन्यवाद करता हूं.” उनके नेतृत्व ने पार्टी को केंद्र शासित प्रदेश के जटिल राजनीतिक परिदृश्य को संभालने में मदद की है, विशेषतौर पर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित करने के बाद.
उन्होंने कई र्चिचत अभियानों का नेतृत्व किया है, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद और संघर्षविराम उल्लंघन के विरुद्ध.
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रैना को 27,250 वोट मिले और वह नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के सुरिंदर चौधरी से 7,819 मतों से हार गए. धरी को 35,069 मत मिले. रैना 10 साल पहले नौशेरा से विधायक चुने गए. उस चुनाव से पहले यह सीट कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था क्योंकि 1962 से लगातार आठ बार कांग्रेस ने इस सीट से जीत दर्ज की थी.
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में राजनीति में प्रवेश किया और एक युवा, तेजतर्रार नेता के रूप में तेजी से आपनी साख बनाई. वह कुपवाड़ा से कठुआ तक जनता के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की पहल के लिए जाने जाते हैं.
रैना की उम्र अब 47 साल है. वह 37 की उम्र में पहली बार नौशेरा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए. उन्हें 34 साल की उम्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा का नेतृत्व करने के लिए चुना गया. इस दौरान उन्होंने घाटी सहित पूरे जम्मू कश्मीर में युवाओं तक पहुंचने का प्रयास किया.
जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रमुख अक्सर अपनी चुनावी रैलियों के दौरान अपनी साधारण जीवन शैली को रेखांकित करते दिखे. हाल ही में नौशेरा में एक जनसभा के दौरान उन्होंने भीड़ को अपने कुर्ते की फटी जेब दिखाई. रैना ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति के रूप में केवल 1,000 रुपये नकद घोषित किए हैं, जिससे वे व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में सबसे गरीब उम्मीदवारों में से एक बन गए हैं. उन्होंने अपनी विधायक पेंशन को दान में देने का भी फैसला किया है.
उन्होंने चुनावी हलफनामा में बताया कि उनके पास बैंक में कोई बचत नहीं है, सोना, निवेश, कृषि या गैर-कृषि भूमि सहित किसी भी चल या अचल संपत्ति की खरीद नहीं की है और न ही उन्हें विरासत में कुछ मिली है. रैना ने घोषणा की कि उनके पास कोई घर या वाहन नहीं है. उन्होंने यह भी घोषित किया है कि उन पर कोई देनदारी नहीं है, उनके आयकर रिटर्न में पिछले पांच वर्षों में से प्रत्येक के लिए शून्य वार्षिक आय दिखाई गई है.
रैना विज्ञान में स्नातक और मानवाधिकार में स्नातकोत्तर हैं और उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत आरएसए के प्रचारक के रूप में की और जम्मू क्षेत्र में खासतौर पर सीमावर्ती जिले राजौरी और पुंछ में जमीनी स्तर पर काम किया. आतंकवाद प्रभावित समुदायों तक पहुंचने की उनकी पहल को परिवर्तनकारी कदम माना जाता है, जिससे जम्मू-कश्मीर के दूरदराज, ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच उनकी छवि और स्वीकार्यता बढ़ी.
आरएसएस में शामिल होने से पहले, उन्होंने 2000 में कुछ समय के लिए मर्चेंट नेवी में काम किया. हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पूरा समय सामाजिक कार्यों और सार्वजनिक सेवा को सर्मिपत कर दिया. नौशेरा से 2014 में जीतने के बाद 41 वर्ष की आयु में, उन्हें 2018 में जम्मू और कश्मीर भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इसी के साथ वह इस पद को संभालने वाले सबसे युवा नेताओं में से एक बन गए. अपने बढ़ते राजनीतिक कद के बावजूद, भाजपा नेता का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा. उन्होंने माता वैष्णो देवी के नाम पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सदस्यता की शपथ ली, जिस पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई.
रैना को पूर्वववर्ती विधानसभा में भाजपा के सबसे मुखर विधायकों में से एक माना जाता था, जो अक्सर राज्य विधानसभा में पाकिस्तान विरोधी नारे लगाते थे. उन्होंने 2015 में तब सुर्खियां बटोरीं जब उन्होंने विधानसभा में निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद से हाथापाई की कोशिश की, जब उन्होंने एमएलए हॉस्टल में ‘बीफ पार्टी’ आयोजित की थी. रैना का जन्म 31 जनवरी 1977 को राजौरी जिले के नौशेरा इलाके के सीमावर्ती गांव लम्बेरी में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता पुष्प दत्त रैना सेवानिवृत्त स्कूल प्रधानाध्यापक हैं, जबकि उनके छोटे भाई सुनील रैना सेना में सेवारत हैं. उनकी मां गृहिणी हैं.