मामले के मुख्य बिंदु और गंभीर आरोप
1. व्यक्तिगत अधिकारों के इस्तेमाल का आरोप: याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन अधिकारों और शक्तियों का व्यक्तिगत रूप से प्रयोग किया, जो कानूनन पूरे तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
2. सर्वसम्मति का अभाव और धारा 18 का उल्लंघन: चुनाव आयोग अधिनियम 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए याचिकाओं में कहा गया है कि मतभेद की स्थिति में बहुमत का फैसला ही मान्य होता है। कथित तौर पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
3. फॉर्म-6 और SIR में बिना कानूनी प्रक्रिया बदलाव: याचिकाओं में चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 के सॉफ्टवेयर में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बिना पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए सॉफ्टवेयर में शर्तें जोड़ी गईं।
4. गोवा और पश्चिम बंगाल के प्रकरण: गोवा में योग्य मतदाताओं की बहाली में सॉफ्टवेयर की खामियों और पश्चिम बंगाल में लाखों अपीलों से जुड़े मुद्दों का भी याचिका में उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग का रुख: इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग का कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान टिप्पणियों और मतों में अंतर होना एक सामान्य प्रक्रिया है और आयोग द्वारा जारी सभी आदेश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं।