
देहरादून. हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक और उसके बेटे अब्दुल मोईद के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है. पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि हिंसा के संबंध में पांच और दंगाइयों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि ताजा गिरफ्तारियों के साथ आठ फरवरी को शहर में एक मदरसे को ध्वस्त करने के बाद हुई पथराव और आगजनी की घटनाओं के संबंध में पकड़े गए दंगाइयों की कुल संख्या 42 हो गई है.
मलिक ने मदरसे का निर्माण कराया था और इसे ध्वस्त करने का पुरजोर विरोध किया था. उसे झड़पों का मुख्य साजिशकर्ता बताया जाता है. अब्दुल मलिक और उसके बेटे सहित नौ ‘वांछित दंगाइयों’ के पोस्टर भी शहर के विभिन्न स्थानों पर चस्पा किए गए हैं और जनता से उनके बारे में कोई भी जानकारी पुलिस के साथ साझा करने का अनुरोध किया गया है. मलिक और उसके बेटे के अलावा, ‘वांछित दंगाइयों’ में तस्लीम, वसीम, अयाज, रईस, शकील अंसारी, मौकीन और जिया उल रहमान शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि उसकी टीम उपद्रवियों को पकड़ने के लिए हर संभव स्थानों पर छापेमारी कर रही है.
अधिकारियों ने हिंसा के केंद्र रहे शहर के बनभूलपुरा इलाके में शुक्रवार को कुछ घंटे के लिए सशर्त ढील दी. हालांकि, इलाके में इंटरनेट सेवा आठवें दिन भी बंद रही. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को शहर के बनभूलपुरा इलाके में अलग-अलग अवधि के लिए कफ्र्यू में ढील दी थी.
बनभूलपुरा में अवैध रूप से बनाए गए एक मदरसे को ढहाने के बाद आठ फरवरी को इलाके में हिंसा भड़क गई थी. स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के र्किमयों और पुलिस पर पथराव किया था और पेट्रोल बम फेंके थे जिसके कारण कई पुलिसर्किमयों को एक थाने में शरण लेनी पड़ी थी जिसे भीड़ ने बाद में आग के हवाले कर दिया था. पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी और पुलिस एवं पत्रकारों सहित 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे.
हल्द्वानी हिंसा लंबे समय से जारी सांप्रदायिक तनाव की परिणति : तथ्य अन्वेषी टीम की रिपोर्ट
नागरिक अधिकार समूहों के नेतृत्व वाली तथ्य अन्वेषण टीम ने दावा किया है कि आठ फरवरी को हल्द्वानी को हिला देनी वाली हिंसक घटनाएं आकस्मिक नहीं थीं बल्कि लंबे समय से विभाजनकारी बयान और नीतियों की वजह से पैदा हो रहे सांप्रदायिक तनाव की परिणति थी.
हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में मदरसा की अवैध इमारत को गिराने को लेकर आठ फरवरी को हिंसा भड़क गई थी. हिंसा के दौरान स्थानीय लोगों ने नगर निगम र्किमयों और पुलिस पर पत्थरबाजी की थी और पेट्रोल बम से हमला किया था. इसकी वजह से कई पुलिस कर्मी शरण लेने के लिए थाना पहुंचे जिसे भीड़ ने आग के हवाले कर दिया. पुलिस के मुताबिक हिंसा में छह ‘दंगाइयों’की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक घायल हुए जिनमें पुलिस कर्मी और मीडिया कर्मी भी शामिल हैं.
पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक और उसके बेटे अब्दुल मोइद के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है. वहीं, पांच और दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है. नागरिक समाज तथ्य अन्वेषण टीम ने बुधवार को हल्द्वानी का दौरा किया था जिसमें एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और कारवां-ए-मोहब्बत के सदस्य शामिल थे.
टीम की रिपोर्ट में दावा किया गया कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद अधिकारियों ने सील मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने का कदम उठाया, जिससे मुस्लिम समुदाय में नाराजगी फैल गई. रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही यह निवासियों और कानून प्रवर्तकों के बीच झड़पों में तब्दील हो गई. रिपोर्ट में चश्मदीदों की गवाही के हवाले से आरोप लगाया कि पुलिस बल ने तलाशी व हिरासत में लेने के दौरान अंधाधुंध गोलीबारी, क्रूरता सहित अत्यधिक बल प्रयोग किया.
रिपोर्ट में लंबे समय तक कफ्र्यू लगाने और इंटरनेट बंद करने की आलोचना की गई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इससे पहले से ही असुरक्षित निवासियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. इसमें कहा गया है कि आठ फरवरी को सीधे तौर पर हिंसा से प्रभावित इलाकों में कफ्र्यू लगा है जिसकी वजह से टीम के सदस्यों के लिए सीधे तौर पर प्रभावित लोगें से मिलना और बात करना संभव नहीं हुआ.
रिपोर्ट में कहा गया, ”हमने जिला प्रशासन के सदस्यों से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने या तो कोई जवाब नहीं दिया या हमें बताया कि वे बहुत व्यस्त थे और इसलिए हमसे मिलने में असमर्थ थे.” इसमें कहा, ”इसलिए, यह एक अंतरिम रिपोर्ट है जो बड़ी संख्या में नागरिक समाज के सदस्यों, पत्रकारों, लेखकों और वकीलों से बातचीत पर आधारित है. कुछ प्रभावित व्यक्तियों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की गई, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बात की.”



