महाराष्ट्र सरकार ने मराठा को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया पर शिंदे समिति की रिपोर्ट स्वीकार की

फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा की निंदा की, कहा- 55 उपद्रवियों की पहचान की गई

मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने मराठवाड़ा क्षेत्र में मराठा को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया तय करने के लिए नियुक्त उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति की पहली रिपोर्ट मंगलवार को स्वीकार कर ली. एक आधिकारिक बयान से यह जानकारी मिली.

इसमें कहा गया है कि कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. कुनबी समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आरक्षण के लिए पात्र है. कुनबी कृषि से जुड़ा समुदाय है, जिसे महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है तथा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ प्राप्त है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया कि ओबीसी आयोग मराठा समुदाय के शैक्षिक और सामाजिक पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए नए आंकड़े एकत्र करेगा.

मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे के अनिश्चितकालीन अनशन और राज्य के कुछ हिस्सों में इस मांग को लेकर हिंसा की घटनाओं के बीच यह फैसला आया है. मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के बयान में कहा गया, ”न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे समिति की पहली रिपोर्ट सौंपी गई है. मराठा को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.” मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण देना सरकार की जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा, ”सरकार मराठा समुदाय को ऐसा आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है जो मजबूत और कानूनी अड़चनों को पार कर सकता है. आरक्षण अन्य समुदायों के कोटे में छेड़छाड़ किए बिना दिया जाएगा.” मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया कि मराठा आरक्षण की मांग से संबंधित कानूनी मुद्दों पर सरकार को सलाह देने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले, सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे और मारुति गायकवाड़ की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर होने पर समिति सरकार का मार्गदर्शन करेगी.

पिछले महीने, मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी प्रमाण पत्र देने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय करने को लेकर न्यायमूर्ति शिंदे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल का गठन किया गया था. इसमें समुदाय के ऐसे लोग हैं जिनके पूर्वजों को निजाम-काल के दस्तावेजों में कुनबी के रूप में संर्दिभत किया गया था.

पिछले सप्ताह समिति को 24 दिसंबर तक का विस्तार दिया गया था. इससे पहले, मुख्यमंत्री शिंदे ने जरांगे से फोन पर बात की और आश्वासन दिया कि मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र देने पर मंत्रिमंडल की बैठक में ठोस निर्णय लिया जाएगा. कार्यकर्ता की मांग है कि राज्य भर में मराठा को कुनबी प्रमाणपत्र दिया जाए.

फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा की निंदा की, कहा- 55 उपद्रवियों की पहचान की गई
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि अधिकारियों ने 50 से 55 लोगों की पहचान की है जो मौजूदा मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिंसक गतिविधियों में शामिल थे. उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

फडणवीस के पास गृह विभाग भी है. उन्होंने आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा और आगजनी की निंदा की, जिन्होंने सोमवार को बीड और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में आंदोलन के दौरान तीन विधायकों के अलावा कुछ स्थानीय नेताओं के आवासों या कार्यालयों को निशाना बनाया और एक नगर परिषद भवन में आग लगा दी. उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों ने बीड जिले में एक घर में आगजनी की कोशिश की, जहां परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, उन पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया जाएगा.

फडणवीस ने कहा, ”राज्य सरकार ने पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसक घटनाओं में शामिल 50 से 55 लोगों की पहचान की है. उन्होंने कुछ खास लोगों और एक खास समुदाय के सदस्यों के घरों पर हमला किया. कुछ विधायकों के घरों में आग लगा दी गई और होटलों के साथ-साथ कुछ संस्थानों को भी निशाना बनाया गया. यह बिल्कुल गलत है.”

फडणवीस ने कहा कि सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और उपद्रवियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा, ”एक घर को जलाने का प्रयास किया गया जब परिवार के कुछ सदस्य अंदर थे. मामले में पुलिस और गृह विभाग सख्त कार्रवाई करेगा. दोषियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आरोप लगाए जाएंगे. पुलिस मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी.” फडणवीस ने कहा कि शांतिपूर्वक विरोध करने वालों को कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन किसी भी रूप में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक प्रकाश सोलंकी और संदीप क्षीरसागर को आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिन्होंने बीड जिले में उनके घरों को आग लगा दी. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर जिले में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक के कार्यालय में तोड़फोड़ की.

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