
मुंबई. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संविदा के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती के लिए सरकारी आदेश को रद्द करने की शुक्रवार को घोषणा की और कहा कि पिछली महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार ने अल्पकालिक आधार पर कर्मचारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया था. विपक्षी दलों द्वारा संविदा के आधार पर भर्ती के मुद्दे पर एकनाथ शिंदे सरकार पर निशाना साधने के बीच उनकी यह घोषणा सामने आई है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि इस कदम से विभिन्न विभागों में वंचित समुदायों के लोगों को अवसर नहीं मिल पायेंगे. फडणवीस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संविदा के आधार पर पहली भर्ती 2003 में की गई थी जब कांग्रेस-राकांपा सरकार सत्ता में थी. उन्होंने कहा कि सुशील कुमार शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के तहत शिक्षा विभाग में पहली बार संविदा के आधार पर कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया था.
उन्होंने कहा, ”हम ये नहीं चाहते. पाप उन्होंने (एमवीए सरकार) किया है और इसके लिए हमें दोषी ठहराया जा रहा है. मैंने इस संबंध में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से चर्चा की है. हमने संविदा के आधार पर नियुक्ति पर सरकारी आदेश (जीआर) को समाप्त करने का फैसला किया है.”
उन्होंने कहा, ”नौ सूचीबद्ध एजेंसियों के माध्यम से संविदा पर कर्मचारियों को नियुक्त करने का निर्णय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार द्वारा लिया गया था.” फडणवीस ने कहा कि इन नौ कंपनियों को पिछली (एमवीए) सरकार द्वारा सूचीबद्ध किया गया था. उन्होंने कहा, ”क्योंकि हम इसे स्वीकार नहीं करते, इसलिए हमने इसे रद्द कर दिया है.” राज्य के पूर्व गृह मंत्री एवं राकांपा नेता शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने कहा कि सरकार को विपक्ष के दबाव के कारण निर्णय रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
फडणवीस ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस विशेष जीआर के लागू होने से पहले विभिन्न विभागों द्वारा संविदा के आधार पर की गई कर्मचारियों की भर्ती जारी रहेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा युवाओं को भड़काने का जानबूझकर प्रयास किया गया.



