
कोलकाता. उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बेरोजगार हुए शिक्षकों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ‘नौकरी की सुरक्षा के झूठे वादे’ करने का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारी शिक्षक, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोमवार शाम छह बजे की समयसीमा तक बेदाग उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करने और योग्य शिक्षकों की पहचान करने में विफल रहने के कारण एसएससी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है. इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों से काम पर लौटने का आग्रह किया था और उन्हें आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार उनके वेतन का ध्यान रखेगी. शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने भी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे ऐसा कुछ भी न करें, जिससे राज्य सरकार द्वारा न्यायालय में दायर की जाने वाली समीक्षा याचिका कमजोर हो जाए.
एसएससी कार्यालय के सामने धरने पर बैठे मालदा जिले के रहने वाले प्रभावित शिक्षक समीरुल इस्लाम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मुख्यमंत्री ने हमें दागी और बेदाग उम्मीदवारों की सूची के बारे में आशंकित न होने को कहा. उन्होंने कहा कि सरकार इसका ध्यान रखेगी. 22 अप्रैल को किए गए वादे के अनुसार, एसएससी वेबसाइट पर बेदाग उम्मीदवारों की सूची डालने में विफल रहने के बाद, क्या उनकी कोई विश्वसनीयता बची है?.” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केवल समय खराब करने की कोशिश कर रही है, ताकि आंदोलन खत्म हो जाए.
दक्षिण दिनाजपुर जिले के बेरोजगार शिक्षक दीपांकर भौमिक ने वेतन पर रोक नहीं लगाने के ममता बनर्जी के बयान पर कहा, “उन्होंने (ममता बनर्जी ने) जो दावा किया है, वह न्यायिक जांच में टिक नहीं पाएगा. तीन अप्रैल को शीर्ष अदालत के आदेश में निरस्तीकरण के बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति तक हमारी नौकरी जारी रखने के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा. हम उनके खोखले वादों पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं हैं.”
काम पर लौटें, दागी और बेदाग लोगों की सूची सरकार पर छोड़ दें: ममता ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों से कहा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद अपनी नौकरी गंवाने वाले प्रदर्शनकारी शिक्षकों से मंगलवार को काम पर लौटने का आग्रह किया और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके वेतन का ध्यान रखेगी. उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद अपनी नौकरी गंवा चुके हजारों शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं. साल्ट लेक में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) मुख्यालय के बाहर मंगलवार को उनका प्रदर्शन जारी रहा.
ममता बनर्जी ने कहा, ह्लआपको इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि कौन दागी है और कौन नहीं. आपको केवल इस बात की चिंता करने की जरूरत है कि क्या आपके पास नौकरी है या नहीं और क्या आपको समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं. दागी और बेदाग शिक्षकों की पहचान करने वाली सूची सरकार और अदालतों के पास है.” बनर्जी ने मिदनापुर में एक प्रशासनिक कार्यक्रम में कहा, ”हम आश्वासन देते हैं कि आपकी नौकरी अभी सुरक्षित है और आपको आपका वेतन मिलेगा. कृपया अपने स्कूलों में वापस जाएं और कक्षाएं फिर से शुरू करें. मैंने कल रात से कई बार इस बारे में बात की है. हम आपके साथ हैं.” मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरी गंवाने वाले ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ के कर्मचारियों के लिए एक पुर्निवचार याचिका भी उच्चतम न्यायालय में दायर की जाएगी और ह्लतब तक हम पर अपना विश्वास बनाए रखेंह्व.
बनर्जी ने प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों को आगाह किया कि वे उन्हें भड़काने की कोशिश कर रहे लोगों के झांसे में नहीं आएं.
उन्होंने कहा, ”अगर मैं कोलकाता में होती तो कुछ सैकंड में इस मुद्दे का समाधान कर देती. जो लोग आपको उकसा रहे हैं, उनके झांसे में नहीं आएं. इसके बाद राज्य सरकार को देखने दें.” उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में ऐसे घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ”उन राज्यों में बड़ी संख्या में लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं और फिर कभी नौकरी वापस नहीं मिली. यहां ऐसा नहीं होने दें.” आंदोलनकारी उन करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में से हैं, जिनकी नियुक्तियों को शीर्ष अदालत ने 2016 की भर्ती प्रक्रिया में ह्लव्यापक अनियमितताओंह्व का हवाला देते हुए 3 अप्रैल को अमान्य कर दिया था.
चिलचिलाती धूप में 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने डब्ल्यूबीएसएससी मुख्यालय को घेर लिया, और अधिकारियों के प्रवेश और निकास को अवरुद्ध कर दिया है. इन अधिकारियों में आयोग के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार भी शामिल थे, जो कल शाम से इमारत के अंदर हैं. आंदोलनकारी शिक्षक मांग कर रहे हैं कि आयोग उन उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित करे जिन्हें योग्यता के आधार पर भर्ती किया गया था, और जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत देकर नियुक्ति पाई थी.



