
जम्मू. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) में पहले बैच के प्रवेश पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रुख को लेकर सोमवार को कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि बिना योग्यता के एमबीबीएस सीट देने के किसी भी कदम के लिए उच्चतम न्यायालय की मंजूरी की आवश्यकता होगी. अब्दुल्ला ने कहा कि संविधान में एक शब्द है ‘धर्मनिरपेक्ष’ और अगर वे (भाजपा) देश को धर्मनिरपेक्ष नहीं रखना चाहते तो उन्हें सबसे पहले इस शब्द को संविधान से हटाना चाहिए.
अनंतनाग, राजौरी और पुंछ जिलों में सात चूना पत्थर खंडों की ई-नीलामी के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वह एसएमवीडीआईएमई की पहली सूची में एक विशेष समुदाय के अधिकतर उम्मीदवारों के चयन पर ‘हंगामे’ को समझने में विफल रहे.
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी लगभग 314 हेक्टेयर भूमि की ई-नीलामी में उपस्थित थे.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”जब विधानसभा ने माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विधेयक पारित किया था, तब यह कहां लिखा था कि किसी विशेष धर्म के छात्रों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा? उस समय कहा गया था कि प्रवेश धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि केवल योग्यता के आधार पर दिए जाएंगे.” एसएमवीडीआईएमई को इस वर्ष 50 एमबीबीएस सीट स्वीकृत की गई थीं. लेकिन, 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के लिए प्रथम बैच में एक विशेष समुदाय के 42 छात्रों को प्रवेश दिए जाने से विवाद छिड़ गया है. दक्षिणपंथी हिंदू समूहों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और नव-स्थापित संस्थान को ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ का दर्जा देने की मांग की है.



