
नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए मोदी सरकार पर कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि आंदोलनकारी किसानों की तरफ से धनखड़ द्वारा की जा रही भावुक अपीलों को सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है. धनखड़ राज्यसभा के सभापति भी हैं. उन्होंने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी. वह रविवार को 74 वर्ष के हो गए.
रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, “उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ आज 74 वर्ष के हो गए.” उन्होंने कहा, ” इस खुशी के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए, यह याद रखना होगा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन पूरी तरह से आश्चर्यजनक नहीं है कि मोदी सरकार, आंदोलनकारी किसानों की तरफ से उनकी भावुक अपीलों को नजरअंदाज करना जारी रखे हुए है.” इस महीने की शुरुआत में रमेश ने उपराष्ट्रपति की उस टिप्पणी का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा था, जिसमें धनखड़ ने कहा था कि किसानों को सहायता प्रदान करते समय मुद्रास्फीति पर भी विचार किया जाना चाहिए. रमेश ने पूछा था कि उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया.
धनखड़ ने अमेरिकी पैटर्न के आधार पर किसानों के लिए उर्वरक सब्सिडी में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की वकालत की थी, और मांग की थी कि विधायकों और सांसदों के वेतन की तरह ही कृषकों को वित्तीय सहायता प्रदान करते समय मुद्रास्फीति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी उपराष्ट्रपति को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं. खरगे ने ‘एक्स’ पर कहा, “मैं भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति माननीय जगदीप धनखड़ जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. ईश्वर उन्हें अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करे तथा संसदीय लोकतंत्र को बनाए रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटल रहे.”
प्रतिनिधिमंडल के लिए सरकार की ओर से चुने गए कांग्रेस नेता अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें
कांग्रेस ने रविवार को कहा कि वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विभिन्न देशों में भेजे जाने वाले राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा बनने से किसी को नहीं रोक रही है और सरकार के कहने पर जिन नेताओं के नाम इसमें शामिल किए गए हैं, उन्हें अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए तथा इस प्रक्रिया में योगदान देना चाहिए. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सरकार पर प्रतिनिधिमंडलों के लिए नेताओं के चयन की प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने और ”दुर्भावनापूर्ण इरादे” रखने का आरोप लगाया, क्योंकि पार्टी द्वारा नामित चार नेताओं में से केवल एक को ही प्रतिनिधिमंडल में जगह दी गई है.
पार्टी ने शनिवार को कहा कि सरकार ने उससे पाकिस्तान सर्मिथत आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए चार नेताओं के नाम देने को कहा था. कांग्रेस ने आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को नामित किया था. पार्टी के मुताबिक, इन चारों में से केवल शर्मा को ही विभिन्न देशों का दौरा करने वाले सात प्रतिनिधिमंडलों में शामिल किया गया है. चार कांग्रेसी नेता – शशि थरूर, मनीष तिवारी, अमर सिंह और सलमान खुर्शीद को सरकार ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है जो पार्टी द्वारा भेजी गई सूची का हिस्सा नहीं थे.
रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हमने जो चार नाम भेजे थे, उनमें से उन्होंने केवल एक नेता को शामिल किया. चार अन्य नाम सरकार ने जोड़े, जो वरिष्ठ सांसद और हमारी पार्टी के नेता हैं, उन्हें अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए और प्रतिनिधिमंडल में योगदान देना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है. इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए और इस संबंध में अधिक राजनीतिकरण उचित नहीं है.” रमेश ने कहा, ”कांग्रेस ने किसी को नहीं रोका है और प्रतिनिधिमंडल में शामिल हमारे सभी सांसद वहां जाएंगे और योगदान देंगे.” प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए थरूर के चयन पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई थी और सरकार पर ”शरारतपूर्ण” मानसिकता के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया था.
रमेश ने कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जोड़े गए चार नामों में एक पूर्व विदेश मंत्री भी शामिल हैं, जिन्हें विदेश नीति का अनुभव है. कांग्रेस ने राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के लिए उसके द्वारा मनोनीत चार नेताओं में से केवल एक को शामिल किए जाने पर कहा कि यह नरेन्द्र मोदी सरकार की ”पूर्ण निष्ठाहीनता” को साबित करता है और गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर उसके द्वारा की जा रही ”ओछी राजनीति” को दर्शाता है. विपक्षी पार्टी ने हालांकि कहा कि मोदी सरकार के कहने पर शामिल किए गए चार प्रमुख कांग्रेस सांसद/नेता प्रतिनिधिमंडल के साथ जाएंगे. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि में आतंकवाद से निपटने के भारत के संकल्प को सामने रखने के लिए दुनिया की राजधानियों में जाने वाले सात प्रतिनिधिमंडलों में 51 राजनीतिक नेता, सांसद और पूर्व मंत्री शामिल होंगे.
कांग्रेस महासचिव रमेश ने शनिवार देर रात जारी एक बयान में कहा, ”16 मई की सुबह, मोदी सरकार ने कांग्रेस पार्टी से चार सांसदों/नेताओं के नाम मांगे, जिन्हें पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की स्थिति को दुनिया के सामने रखने के लिए विदेश भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडलों में शामिल किया जाना था. कांग्रेस संसदीय दल की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने 16 मई को दोपहर 12 बजे तक चार नाम संसदीय कार्य मंत्री को लिखित रूप में भेज दिए थे.” उन्होंने कहा था, ”आज देर रात (17 मई) इन सभी प्रतिनिधिमंडलों की आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है. अत्यंत खेदजनक है कि कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सुझाए गए चार नामों में से केवल एक को ही शामिल किया गया है.”
कोविड से हुई मौत के आंकड़ों में ‘अंतर’ को लेकर कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना
कांग्रेस ने कोविड-19 से हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़ों और नागरिक पंजीकरण प्रणाली के आंकड़ों के बीच कथित अंतर को लेकर रविवार को केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सरकार से यह उम्मीद करना बहुत ज्यादा होगा कि वह अपने असंवेदनशील और मूर्खतापूर्ण निर्णयों पर कोई पछतावा या शर्म प्रकट करेगी, लेकिन जब इतिहास लिखा जाएगा तो इस घृणित कृत्य को अवश्य दर्ज किया जाएगा. कांग्रेस महासचिव व संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि पांच साल से ज्यादा समय पहले दुनिया कोविड-19 से तहस-नहस हो गई थी.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “उसी समय यह साफ हो गया था कि भारत ने इस महामारी की वजह से ऐसी तबाही देखी है जैसी हमने एक सदी से भी अधिक समय में नहीं देखी थी.” रमेश ने आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूरों के संकट से लेकर वैक्सीन की बनावटी कमी तक, सामूहिक मौतों और ऑक्सीजन की भारी कमी से लेकर प्रधानमंत्री की बंगाल में चुनावी प्रचार करने की जिद तक- महामारी के दौरान मोदी सरकार की सबसे क्रूर और अमानवीय हरकतें देखने को मिली.
उन्होंने कहा, “हमें हमेशा से यह पता था कि सरकार ने कोविड-19 से हुई मौतों को सुनियोजित तरीके से कम करके बताया है, लेकिन अब यह सामने आया है कि सिर्फ 2021 में पूरे भारत में 20 लाख अतिरिक्त मौतें हुई.” कांग्रेस महासचिव ने कहा, “इनमें से अधिकतर मौतें कोविड-19 महामारी की वजह से हुई. और यह 20 लाख का अनुमान आधिकारिक रूप से दर्ज की गई 3.3 लाख मौतों से लगभग छह गुना अधिक है.” उन्होंने नागरिक पंजीकरण प्रणाली डेटा का हवाला देते हुए एक ग्राफ भी साझा किया.
रमेश ने दावा किया कि कोविड महामारी से हुई मौतों की संख्या को कम करके दिखाने में प्रधानमंत्री का गृह राज्य गुजरात अव्वल रहा – वहां गुजरात सरकार द्वारा स्वीकार की गई संख्या से 33 गुना अधिक मौतें दर्ज की गईं. उन्होंने कहा, “इस सरकार से यह उम्मीद करना बहुत ज्यादा होगा कि वह अपने असंवेदनशील और मूर्खतापूर्ण निर्णयों पर कोई पछतावा या शर्म प्रकट करेगी -लेकिन जब इतिहास लिखा जाएगा, तो इस घृणित कृत्य को अवश्य दर्ज किया जाएगा.” इस महीने की शुरुआत में, आधिकारिक सूत्रों ने कहा था कि 2020-2021 के लिए भारत में कुल मृत्यु दर अपेक्षित मौतों से 9.3 प्रतिशत अधिक थी. यह आंकड़ा अमेरिका, इटली और रूस से कम था.



