सांसदों के अनुरोध पर निर्धारित समय से पहले स्थगित किया गया मानसून सत्र : जोशी

नयी दिल्ली. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि संसद का मानसून सत्र चार नहीं बल्कि दो दिन पहले स्थगित किया गया और यह निर्णय विभिन्न सांसदों के अनुरोध को देखते हुए लिया गया था. अनुरोध करने वालों में विपक्षी दलों के सांसद भी शामिल थे.

कांग्रेस ने सोमवार को खत्म हुए संसद के मानसून सत्र को ‘निराशाजनक’ करार दिया है. इसके बाद जोशी ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और कहा कि विपक्ष का एजेंडा केवल व्यवधान डालना और बहिष्कार करना था. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विपक्ष इस सत्र को 12 अगस्त की तय अवधि तक चलाना चाहता था, लेकिन सत्तापक्ष की तरफ से कोई उत्सुकता नजर नहीं आई.

जोशी ने कहा, ‘‘मानसून सत्र चार दिन पहले नहीं स्थगित किया गया, जैसा दावा किया जा रहा है, बल्कि निर्धारित तिथि से दो दिन पहले स्थगित किया गया. यह फैसला विपक्ष सहित विभिन्न सांसदों के अनुरोध के बाद किया गया.’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष ध्यानाकर्षण, नियम 377, शून्यकाल और प्रश्नकाल के माध्यम से कोई भी मुद्दा उठा सकता था. उन्होंने कहा कि लेकिन महंगाई पर चर्चा के बाद वे मंत्री के जवाब के दौरान वाकआउट कर गए जबकि शुरूआत से ही वे महंगाई पर चर्चा की मांग कर रहे थे.

उन्होंने कहा, “चर्चा तो विपक्ष का प्रोपेगेंडा था लेकिन उनका एजेंडा व्यवधान और बहिष्कार था.” जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर सदन के अंदर कांग्रेस के हंगामे का जिक्र करते हुए, मंत्री ने कहा, “कथित भ्रष्ट चलन से जुड़े एक परिवार के व्यक्तिगत मुद्दों को संसद का समय बर्बाद कर पार्टी का मुद्दा बनाया जा रहा है. उनकी रुचि लोक हित के बदले एक परिवार की रक्षा में अधिक है.’’ प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े एक धनशोधन मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछताछ ऐसे समय की थी, जब संसद का सत्र चल रहा था. इसी मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी जून में पूछताछ की गई थी.

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