आम्बेडकर के महिला सशक्तीकरण के भाव का विस्तार है नारी शक्ति वंदन अधिनियम: मुख्यमंत्री यादव

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 14 Apr 2026 03:19 PM
आम्बेडकर के महिला सशक्तीकरण के भाव का विस्तार है नारी शक्ति वंदन अधिनियम: मुख्यमंत्री यादव
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इंदौर: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ”21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय” करार देते हुए मंगलवार को कहा कि विधायी निकायों में आधी आबादी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले इस कानून के जरिये नरेन्द्र मोदी सरकार संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आम्बेडकर के महिला सशक्तीकरण के भाव को आगे बढ़ा रही है।

यादव, आम्बेडकर की 135वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली महू पहुंचे और संविधान निर्माता के सम्मान में बनाए गए स्मारक में उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को मिलने वाले प्रसूति अवकाश, गुजारे भत्ते के हक और माता-पिता की संपत्ति में अधिकार के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आम्बेडकर ने हमेशा महिला सशक्तीकरण के लिए काम किया।

उन्होंने कहा, ”महिला सशक्तीकरण को लेकर आम्बेडकर के इस भाव को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने जा रहे हैं। इससे आधी आबादी को इन विधायी निकायों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल होगा।” यादव ने कहा कि 21वीं शताब्दी के इस सबसे बड़े निर्णय को आम्बेडकर जयंती से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आम्बेडकर ने देश की आजादी से पहले से सामाजिक समरसता की दिशा में काम करते हुए वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और आजादी के बाद ऐसे संविधान की रचना की जिसमें समाज के सभी तबकों को समान अधिकार दिए गए। यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आम्बेडकर को एक लोकसभा चुनाव में जीतने नहीं दिया था और इसके लिए देश की सबसे पुरानी पार्टी को पश्चाताप करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”कांग्रेस ने आम्बेडकर के साथ कदम-कदम पर छल किया। बाबा साहब की आत्मा कांग्रेस के नेताओं को कभी माफ नहीं करेगी।” संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के पारित हो जाने से लोकसभा में सीट की संख्या बढकर 816 हो जाएगी जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो पाता। इसका मतलब यह था कि यदि वर्तमान कानून यथावत रहता है, तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी, इसलिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए बजट सत्र में तीन दिन की बैठक अलग से बुला रही है।

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