
विशाखापत्तनम. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि नौसेना की भूमिका केवल समुद्र की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा का भी एक प्रमुख स्तंभ है, क्योंकि तेल, प्राकृतिक गैस जैसी भारतीय ऊर्जा आवश्यकताएं काफी हद तक क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर करती हैं. पहलगाम आतंकवादी हमले के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि देश ने सीमा पार सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर प्रभावी और सटीक जवाब दिया.
पूर्वी नौसेना कमान में दो बहुउद्देशीय स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि के जलावतरण के बाद सिंह ने कहा कि भारत कभी भी आक्रामक विस्तारवाद में विश्वास नहीं करता है और पूरी दुनिया जानती है कि उसने पहले कभी किसी देश पर हमला नहीं किया. हालांकि, जब इसकी सुरक्षा पर हमला होता है, तो भारत जानता है कि कैसे जवाब देना है.
सिंह ने कहा, ”यहां की भू-रणनीतिक स्थिति ऐसी है कि ये हमारे आर्थिक विकास को भी सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती है. हमारी ऊर्जा जरूरतें, तेल, प्राकृतिक गैस, सभी काफी हद तक इस क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर हैं. इसलिए, नौसेना की भूमिका केवल समुद्र की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का भी एक प्रमुख स्तंभ है.” रक्षा मंत्री ने दो नये युद्धपोतों के बारे में कहा कि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत, पहुंच और लचीलापन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
उन्होंने कहा, “आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि का जलावतरण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सपने के सच होने जैसा है. मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ये दोनों युद्धपोत देश की सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होंगे.” उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना न केवल तटीय क्षेत्रों की रक्षा करती है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और समृद्धि भी बनाए रखती है.
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले पर राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी. इस हमले में भारतीय पर्यटक मारे गए थे. उन्होंने कहा, ”हमारे निर्दोष लोगों पर हमला हमारे लिए एक चुनौती थी, लेकिन भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिये इसका प्रभावी और सटीक जवाब दिया. भारत ने आतंकी ढांचे को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया. रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं कहना चाहता हूं कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, बस रुका हुआ है.”
राजनाथ ने विशाखापत्तनम में दो बहुउद्देशीय स्टील्थ फ्रिगेट का जलावतरण किया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यहां भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान में दो बहुउद्देशीय स्टील्थ फ्रिगेट, आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को शामिल किया. इन युद्धपोतों के डिजाइन और हथियारों में उल्लेखनीय सुधार किया गया है और इन्हें समुद्री सुरक्षा तंत्र में एक महत्वपूर्ण वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है.
उदयगिरि और हिमगिरि भारतीय नौसेना के नवीनतम अत्याधुनिक ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत बने हैं और इनका जलावतरण ऐसा पहला अवसर है जब दो अलग-अलग शिपयार्ड में निर्मित अग्रिम पंक्ति के दो जंगी पोतों को एक साथ जलावतरण समारोह में शामिल किया गया. यह घटनाक्रम भारत के पूर्वी तट के बढ़ते समुद्री महत्व को रेखांकित करता है.
दोनों फ्रिगेट भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा आंतरिक रूप से डिजाइन किए गए हैं, और विशेष रूप से, उदयगिरि युद्धपोत डिज.ाइन ब्यूरो द्वारा डिज.ाइन किया गया 100वां जहाज है, जो स्वदेशी युद्धपोत डिज.ाइन के पांच दशकों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक उदयगिरि और हिमगिरि, परियोजना 17 (शिवालिक) श्रेणी के मध्यम आकार के अनुवर्ती पोत हैं, और दोनों जहाजों में डिजाइन, स्टील्थ (रडार की पहुंच से बच निकलने की क्षमता), हथियार और सेंसर प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जो गहन समुद्री परिस्थितियों में मिशनों की पूरी शृंखला को अंजाम देने में सक्षम हैं.
भारतीय नौसेना ने सोमवार देर रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “दो अत्याधुनिक लड़ाकू प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गए हैं, जिससे समुद्र में भारत की ताकत और मजबूत होगी….” उदयगिरि, प्रोजेक्ट 17ए का दूसरा जहाज है और इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा किया गया है. हिमगिरि, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित पहला पी17ए जहाज है. दोनों ही युद्धपोत पहले के डिजाइनों की तुलना में बेहद अत्याधुनिक हैं.
उदयगिरि को शुरुआत के बाद निर्मित होने वाला अपनी श्रेणी का सबसे तेज जहाज होने का गौरव भी प्राप्त है, जो भारतीय शिपयार्ड द्वारा अपनाई गई मॉड्यूलर निर्माण पद्धति का परिणाम है. करीब 6,700 टन वजनी पी17ए श्रेणी के फ्रिगेट अपने पूर्ववर्ती शिवालिक श्रेणी के फ्रिगेट्स की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत बड़े हैं. इनमें अधिक सुव्यवस्थित संरचना और कम रडार प्रतिबिंब (रडार क्रॉस सेक्शन) जैसी उन्नत विशेषताएं शामिल की गई हैं. इनमें भारतीय निर्माताओं द्वारा विकसित उन्नत हथियारों और सेंसरों को भी शामिल किया गया है. इन पोत के हथियारों के समूह में सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76 मिमी एमआर तोप और 30 मिमी और 12.7 मिमी ‘क्लोज-इन’ हथियार प्रणालियों का संयोजन शामिल है.
सेल ने भारतीय नौसेना को दो युद्धपोत के लिए विशेष इस्पात की आपूर्ति की
सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि. (सेल) ने भारतीय नौसेना के दो नए युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि के लिए लगभग 8,000 टन विशेष इस्पात की आपूर्ति की है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इन दोनों जहाजों को आज, 26 अगस्त, 2025 को विशाखापत्तनम में आयोजित एक समारोह के दौरान नौसेना में शामिल किया गया. सेल ने भारतीय नौसेना के इन दोनों उन्नत युद्धपोत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
कंपनी ने अपने बोकारो, भिलाई और राउरकेला इस्पात संयंत्र से खास किस्म की इस्पात की चादरें और प्लेट्स बनाईं तथा उन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) को दिया.
रक्षा क्षेत्र के लिए देश को जिस विशेष इस्पात की ज़रूरत होती है, उसे बनाने में सेल ने बड़ी मदद की है. इससे भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम हुई है. यह कदम सीधे तौर पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी सरकारी योजनाओं से जुड़ा है.
अकेले राउरकेला इस्पात संयंत्र ने टैंक, युद्धपोत और मिसाइल के लिए एक लाख टन से ज़्यादा विशेष इस्पात दिया है.



