सशस्त्र बलों के लिए ‘संयुक्त संस्कृति’ विकसित करने की जरूरत : सीडीएस जनरल अनिल चौहान

जनरल मनोज पांडे ने सेना से हमेशा ही तैयार रहने का आह्वान किया

नयी दिल्ली. प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सोमवार को सशस्त्र बलों द्वारा एक ”संयुक्त कार्य संस्कृति” विकसित करने का आह्वान किया ताकि देश की समग्र युद्ध क्षमता को बढ़ाने वाली संरचनाएं बनाकर प्रत्येक सेना की क्षमताओं को एकीकृत किया जा सके.

जनरल चौहान तीनों सेनाओं के सम्मेलन ‘परिवर्तन चिंतन’ को संबोधित कर रहे थे. इसमें तीनों सेनाओं – थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच ”संयुक्तता और एकीकरण” को आगे बढ़ाने के लिए नये विचारों, पहल और सुधारों पर मंथन किया गया. अधिकारियों ने कहा कि सीडीएस जनरल चौहान ने भारत की सेनाओं को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने के मद्देनजर पारंपरिक सैन्य अवधारणाओं को नया दृष्टिकोण देने की आवश्यकता पर जोर दिया.

अपनी तरह के इस पहले सम्मेलन में मुख्य रूप से थिएटर कमान शुरू करने की सरकार की महत्वाकांक्षी पहल के कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल बदलाव करना है. रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने प्रत्येक सेना की विशिष्टता का सम्मान करते हुए सशस्त्र बलों के लिए एक संयुक्त संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और ‘चिंतन’ की शुरुआत की.”

जनरल मनोज पांडे ने सेना से हमेशा ही तैयार रहने का आह्वान किया

थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने सशस्त्र बल से ‘ब्लैक स्वान’ घटनाओं के लिए हमेशा तैयार रहने का सोमवार को आह्वान किया और किसी असमान्य घटना से आश्चर्यचकित नहीं होने को कहा. ‘ब्लैक स्वान’ घटनाएं अधिक प्रभाव उत्पन्न करने वाली ऐसी घटनाएं हैं, जिनके बारे में सामान्य परिस्थितियों में पहले से अनुमान लगाना मुश्किल होता है. जनरल पांडे ने राष्ट्रों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए प्रौद्योगिकी के महत्व को भी रेखांकित किया.

वेलिंगटन स्थित डिफेंस र्सिवसेज स्टाफ कॉलेज में एक संबोधन में, जनरल पांडे ने प्रौद्योगिकी के शस्त्रीकरण, विशेष रूप से सूचना से लेकर आपूर्ति श्रृंखला तक विभिन्न क्षेत्रों में इसके विस्तार को रेखांकित किया. जनरल पांडे ने खतरों का प्रभावी ढंग से आकलन करने, रणनीतियों को स्पष्ट करने, क्षमताओं की पहचान करने, नीतियां बनाने, तैयारी करने के लिए सेना के तीनों अंगों (थलसेना,वायुसेना और नौसेना) के बीच आपसी तालमेल के महत्व पर जोर दिया.

यहां सेना मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने अंतरिक्ष, साइबर, विद्युत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और सूचना प्रौद्योगिकी सहित नये क्षेत्रों में युद्ध के विस्तार पर भी चर्चा की. जनरल पांडे ने युद्ध के साजोसामान में तीव्र प्रौद्योगिकीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने युद्ध के मैदान को और जटिल, कड़ा मुकाबला वाला और घातक बना दिया है.

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