नयी दिल्ली. कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार को देश को कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए नयी परियोजनाएं शुरू करने पर जोर दिया. उन्होंने साथ ही मौजूदा खनन कार्यों को बढ़ाने की बात भी कही. रेड्डी ने कहा कि देश की जीवाश्म ईंधन जरूरत को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सभी अनुषंगी कंपनियों को अपने वार्षिक लक्ष्य हासिल करने चाहिए.
कोयला मंत्रालय ने बयान में कहा कि उन्होंने इन प्रयासों को आगे बढ़ाने में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और वन मंजूरी में सहायता सहित सरकार के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया. घरेलू कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है. रेड्डी ने कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए नागपुर में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की इकाई वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के मुख्यालय का दौरा किया.
कोयला मंत्री ने झारखंड में 732 करोड़ रुपये की कोयला प्रबंधन परियोजनाओं की आधारशिला रखी
केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने झारखंड में 732 करोड़ रुपये की लागत वाली दो कोयला प्रबंधन परियोजनाओं की आधारशिला रखी. एक आधिकारिक बयान में सोमवार को यह जानकारी दी गई. कोयला प्रबंधन (हैंडलिंग) संयंत्र का इस्तेमाल कोयले के भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन के लिए किया जाता है.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कल सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड) के बोकारो और करगली क्षेत्र में कारो कोयला प्रबंधन संयंत्र और कोनार कोयला प्रबंधन संयंत्र की आधारशिला रखी.” सीसीएल कोल इंडिया लिमिटेड की एक इकाई है. ये दोनों संयंत्र कोयला खदान से रेल संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होंगे. इसके तहत खदानों से उत्पादित कोयले को निकटतम रेलवे र्सिकट तक ले जाने की व्यवस्था की जाएगी.