नीतीश ने आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा नीत राजग से नाता तोड़ कर प्रदेश में महागठबंधन की सरकार के गठन के लिये राजद के साथ हाथ मिलाने के बाद बुधवार को राजभवन में रिकॉर्ड आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. कुमार के अलावा राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली, तेजस्वी को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में नामित किए जाने की संभावना है. आज रात एक अधिसूचना जारी होने की संभावना है जिसमें उन्हें उप मुख्यमंत्री के रूप में नामित किया जाएगा.

कुमार के कैबिनेट मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी . इससे पहले यह तय किया जायेगा कि महागठबंधन के तीन मुख्य घटकों – राजद, जदयू एवं कांग्रेस- के कोटे के मंत्रियों पर अंतिम फैसला किया जायेगा. एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि कुमार के पास गृह विभाग सहित सभी महत्वपूर्ण पद बरकरार रहने की संभावना है जबकि राजद को अधिकांश वे विभाग आवंटित किये जा सकते हैं, जो पहले भाजपा के पास थे.

उन्होंने कहा कि नए मंत्रिमंडल की संरचना के बारे में एक सैद्धांतिक सहमति बन गई है जिसमें कुमार की पार्टी जदयू, राजद और कांग्रेस से 35 या उससे अधिक सदस्य होने की संभावना है. राजभवन के बाहर, तथा कुमार और यादव के आवासों के बाहर जश्न का माहौल देखा गया . जदयू और राजद के सैकड़ों समर्थकों ने ढोल पीटकर, पटाखे फोड़कर और लड्डू बांटकर जश्न मनाया. राज्यपाल फागू चौहान से पद और गोपनीयता की शपथ लेने के तुरंत बाद पत्रकारों से बात करते हुए कुमार ने भाजपा के इस दावे को खारिज कर दिया कि नई सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेगी.

उन्होंने अपनी पूर्व सहयोगी भाजपा के बारे में कहा कि 2015 के विधानसभा चुनाव में 243 सदस्यीय विधानसभा में राजग को 50 से कम सीटें मिली थीं. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के राजभवन में उपस्थित नहीं रहने के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दावा किया कि उनके कोई निमंत्रण नहीं मिला था.

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘हम बिहार के लोगों को धोखा देने के बाद स्थापित की गई सरकार के गठन को किसी भी कीमत पर देखना पसंद नहीं करेंगे .’’ उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार को सहयोगी दलों को छोड़ने की आदत है. वह राजद के प्रति भी वफादार नहीं रहेंगे और लालू प्रसाद के खराब स्वास्थ्य का फायदा उठाकर उस पार्टी को तोड़ने की कोशिश करेंगे.’’

नयी सरकार के कार्यकाल पूरा नहीं करने के भाजपा के दावे को खारिज करते हुए कुमार ने कहा कि 2015 में जैसे हमलोग साथ थे, फिर हो गए और बिहार के हित में काम करेंगे . जदयू के खिलाफ रची गयी भाजपा की कथित साजिश की ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा, ‘‘2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू के साथ क्या हुआ था. मैं 2020 में मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता था. आप सभी साक्षी हैं कि तब से क्या हो रहा था . पार्टी के विधायक और उम्मीदवारों से पूछ लें, इस बारे में वे बता देंगे. सभी के लगातार इस बारे में बताने पर अंतत: मुझे लगा कि जब सभी की इच्छा है तो उनकी इच्छा का स्वागत करते हुए फिर 2015 की तरह साथ हो गए और अब साथ मिलकर बिहार के हित के लिए काम करेंगे.’’

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया, ‘‘हमारे लोगों ने उनका समर्थन किया और उनकी ओर से जदयू को हराने की कोशिश की गयी .’’ देश में आगामी आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरी कोई भी दावेदारी नहीं है .

यह पूछे जाने पर कि क्या वे देश में अब विपक्षी की राजनीति को मजबूत करेंगे, ‘‘नीतीश ने कहा कि निश्चित तौर पर करेंगे . एक बार पहले भी किया था . हम चाहेंगे कि सभी लोग मिलकर पूरी तरह से मजबूत हों . कुछ लोगों को लगता है विपक्ष खत्म हो जाएगा तो हमलोग भी अब आ ही गए हैं विपक्ष में .’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘2014 में जो (सत्ता में) आये 2024 के आगे रह पाएंगे या नहीं वह अपना समझें.’’ यह पूछे जाने पर कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच क्या अंतर है, नीतीश ने कहा, ‘‘अटल जी जितना प्रेम करते थे और मानते थे उसे हम कभी नहीं भूल सकते हैं. उस समय की बात ही कुछ और थी. बाद में फिर हम उधर गए, और जो कुछ होता रहा उस बारे में हमारे दल के लोगों से पूछ लीजिए.’’

पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी ंिसह का नाम लिए बिना कहा, ‘‘एक आदमी जिसे हमने सबकुछ का जिम्मा दे दिया था, उसके बारे में भी लोगों से पूछ लें…पार्टी की तरफ रहने के बजाए कहीं और दिमाग चलाते रहे .’’ आरसीपी ंिसह पर जदयू में रहते हुए भाजपा का ‘‘आदमी’’ होने का आरोप उनकी पार्टी लगाती रही है . इससे पहले सुशील मोदी ने यह भी दावा किया कि तेजस्वी यादव संख्यात्मक रूप से बड़ी पार्टी के नेता के रूप में ‘‘वास्तविक मुख्यमंत्री’’ के रूप में कार्य करने का प्रयास करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘‘उन पर राज्य के लोगों को 10 लाख सरकारी नौकरियों के वादे को पूरा करने का भी दबाव होगा. यह नीतीश को परेशान करेगा और आंतरिक विरोधाभास 2025 से पहले सरकार को गिरा देगा. कुमार ने हालांकि जोर देकर कहा कि नई सरकार ठीक चलेगी और बिहार के लोगों से किए गए सभी वादों को पूरा करेगी.

तेजस्वी से महागठबंधन की फिर से सरकार बनने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि असली गठबंधन और सरकार यही है .
उन्होंने कहा कि नीतीश जी देश हित और राज्य हित में निडरतापूर्वक एक बडा निर्णय लिया जिसे देश और राज्य को जरूरत थी . उन्होंने कहा कि हमलोगों ने समर्थन किया है और मजबूती के साथ बिहार को तरक्की के रास्ते उंचाईयों पर ले जाएंगे .

तेजस्वी ने कहा कि हमलोग समाजवादी विचारधारा के हैं और हमारे पुरखों की इस विरासत को कोई और आगे नहीं बढाएगा, भले ही हम पहले झगड़ते रहे हों पर जब समाजवाद पर खतरा आएगा, क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व को समाप्त करने की बात आएगी तथा देश की गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे को भंग करना चाहेगा तो हम उसे सहन नहीं कर पाएंगे.

तेजस्वी से उनके अपनी मंत्रिपरिषद की बैठक में रोजगार देने के वादे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमारी मुख्यमंत्री से चर्चा हुई है और एक महीने के भीतर बंपर रोजगार की घोषणा की जाएगी. बाद में राज्यसभा सदस्य सुशील ने यह भी दावा किया कि कुमार उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे और पार्टी द्वारा उनकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहने के बाद उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया.

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