खेडकर को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने में कोई गलती नहीं पायी गयी : अस्पताल प्राधिकारी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 24 Jul 2024 07:28 PM
खेडकर को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने में कोई गलती नहीं पायी गयी : अस्पताल प्राधिकारी
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पुणे/नयी दिल्ली. भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की प्रशिक्षु अधिकारी पूजा खेडकर को सात प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जारी करने वाले पुणे के समीप स्थित एक सिविल अस्पताल ने अपनी जांच में पाया कि प्रमाणपत्र नियमों के अनुसार था और इसे जारी करने में कोई गलती नहीं हुई. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी.

पुणे शहर के समीप पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) द्वारा संचालित यशवंतराव चह्वाण मेमोरियल (वाईसीएम) हॉस्पिटल ने अगस्त 2022 में खेडकर को यह प्रमाणपत्र जारी किया था. खेडकर पर विकलांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण में हेरफेर करने सहित धोखाधड़ी कर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा पास करने का आरोप है. खेडकर द्वारा यूपीएससी में जमा कराए विभिन्न प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच की जा रही है.

अधिकारियों ने पहले बताया था कि खेडकर ने 2022 में अपने बाएं अंग के घुटने के जोड़ के बारे में विकलांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था. वह चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल आयीं और कई विभागों द्वारा उनकी जांच की गयी. 24 अगस्त 2022 को जारी प्रमाणपत्र में कहा गया कि उनके घुटने में सात प्रतिशत विकलांगता है.

वाईसीएम के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले ने अस्पताल के आर्थोपेडिक और फिजियोथेरेपी विभाग से एक रिपोर्ट मांगी थी. जिला कलेक्टरेट ने एक पत्र लिखकर अस्पताल से यह जांच करने को कहा था कि क्या खेडकर को विकलांगता प्रमाणपत्र जारी करने में कोई गलती हुई है. जिला प्राधिकारियों ने यह भी कहा था कि अगर कोई गलती पायी जाती है तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराए. जिला कलेक्टरेट ने यह भी कहा था कि अगर इसमें कोई गिरोह शामिल पाया जाता है तो दंडनीय कार्रवाई की जाए.

डॉ. वाबले ने कहा, ”पिछले हफ्ते, हमें पुणे जिलाधिकारी कार्यालय से यह पत्र मिला, जिसके बाद हमने अस्पताल के आर्थोपेडिक और फिजियोथेरेपी विभाग से एक रिपोर्ट मांगी. सोमवार को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, खेडकर को नियमानुसार सात फीसदी का लोकोमोटर विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया.” उन्होंने कहा, ”लेकिन यह प्रमाणपत्र शिक्षा या नौकरी में कोई सुविधा प्राप्त करने में कोई मदद नहीं करेगा. उस प्रमाणपत्र का कोई महत्व नहीं है.” डॉ. वाबले ने कहा कि जांच के अनुसार, कोई भी गलत कार्य में लिप्त नहीं पाया गया.

पूजा खेडकर मामले में दिव्यांगों के प्रति ‘पूर्वाग्रह वाली’ टिप्पणी पर अफसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग

गैर सरकारी संगठन ‘डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज’ ने दिव्यांगों के प्रति सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भेदभावपूर्ण या पूर्वाग्रह वाली टिप्पणी करने के लिए तेलंगाना कैडर की नौकरशाह स्मिता सभरवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है. ‘डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज’ ने कहा है कि ऐसी टिप्पणी सामाजिक न्याय और दिव्यांगता अधिकारों के सिद्धांतों को कमजोर करती है.

यह विवाद सभरवाल की कई पोस्ट से उत्पन्न हुआ है, जिनमें उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं (एआईएस) में दिव्यांगों के लिए कोटा की आवश्यकता पर सवाल उठाया था और सवाल किया था कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) और रक्षा बलों जैसे कुछ क्षेत्रों में ऐसा आरक्षण क्यों लागू नहीं किया गया है. उन्होंने सरकारी अधिकारियों की तुलना पायलट और सर्जन से की तथा सवाल किया कि क्या एयरलाइन कंपनियां किसी दिव्यांग व्यक्ति को नौकरी पर रखेंगी या फिर क्या कोई व्यक्ति किसी दिव्यांग सर्जन पर भरोसा करेगा.

सभरवाल ने अपनी पोस्ट में कहा, ”चूंकि यह बहस जोर पकड़ रही है – दिव्यांगों के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए, क्या एयरलाइन किसी दिव्यांग पायलट को नौकरी पर रखती है? या आप किसी दिव्यांग सर्जन पर भरोसा करेंगे? एआईएस (आईएएस/आईपीएम/आईएफओएस) की प्रकृति क्षेत्र में कार्य, लंबे समय तक काम, लोगों की शिकायतों को सीधे सुनना है, जिसके लिए शारीरिक फिटनेस की आवश्यकता होती है.” उन्होंने पोस्ट में कहा, “इस प्रमुख सेवा को इस आरक्षण की आवश्यकता क्यों है?” ‘डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज’ समूह के सदस्य डॉ. सतेंद्र सिंह ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि सभरवाल की टिप्पणी “दिव्यांगों के प्रति कथित तौर पर भेदभावपूर्ण या पूर्वाग्रह” को प्रतिबिंबित करती है, जो सरकार द्वारा प्रचारित समावेशी लोकाचार के विपरीत है.

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