उदयनिधि के सनातन धर्म वाले बयान की ‘गांधी परिवार’ द्वारा निंदा नहीं करना समर्थन के समान : प्रह्लाद जोशी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 06 Sep 2023 10:48 PM
उदयनिधि के सनातन धर्म वाले बयान की ‘गांधी परिवार’ द्वारा निंदा नहीं करना समर्थन के समान : प्रह्लाद जोशी
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नयी दिल्ली/हैदराबाद. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार को अगर वास्तव में सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान में विश्वास है तो उन्हें द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी की निंदा करनी चाहिए क्योंकि उनकी चुप्पी विवादास्पद टिप्पणियों का समर्थन करने के समान होगी.

जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों का समर्थन किया है. उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से इन टिप्पणियों की निंदा किए जाने की मांग की. विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनमें अन्य धर्मों की आलोचना करने का ‘साहस’ नहीं है, भले ही उनमें सदियों से बहुत कम सुधार दिखा है.

जोशी ने हिंदू धर्म में सुधारों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सनातन धर्म में कई चीजें बदल गई हैं. उन्होंने कहा, “कई धर्म हैं जो अब भी नहीं बदले हैं लेकिन आपके पास उनके बारे में एक शब्द भी बोलने का साहस नहीं है.” उदयनिधि ने हाल ही में सनातन धर्म को खत्म करने का आह्वान किया था. उन्होंने इसे समाज में असमानता और विभाजन को बढ़ावा देने के लिए दोषी ठहराया था और इसकी तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी.

जोशी ने कहा, “मैं राहुल गांधी और संसद सत्र पर राजनीति करने की कोशिश कर रहीं सोनिया गांधी से पूछना चाहूंगा कि अगर आप वास्तव में सर्वधर्म समभाव में रुचि रखते हैं तो आपको उदयनिधि स्टालिन के बयान की निंदा करनी चाहिए. अन्यथा देश को विश्वास हो जाएगा कि आप उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं.”

‘सनातन धर्म’ विवाद पर जावड़ेकर ने कहा, उदयनिधि को माफी मांगते हुए इस्तीफा देना चाहिए

तमिलनाडु के मंत्री एवं द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म’ को खत्म करने की कथित टिप्पणी की निंदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को मांग की कि उन्हें अपनी टिप्पणी के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए और मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी देना चाहिए.

द्रमुक की गठबंधन सहयोगी कांग्रेस पार्टी पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के एक सदस्य की टिप्पणी के बारे में अपना रुख बताना चाहिए.

भाजपा के तेलंगाना प्रभारी जावड़ेकर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे और द्रमुक मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जो कहा यह न केवल ‘सनातन धर्म’ का अपमान है, बल्कि इससे सभी धर्मों और देश के लोगों का अपमान हुआ है. हमारी संस्कृति हमें सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाती है लेकिन एक धर्म के खिलाफ जहर/नफरत उगलना निंदनीय है.” तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने गत शनिवार को सनातन धर्म को कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू के समान बताया था और कहा था कि ऐसी चीजों का सिर्फ विरोध नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उन्हें नष्ट कर देना चाहिए.

इस टिप्पणी की निंदा करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि राहुल गांधी अपनी चुप्पी तोड़ें और इस पर कांग्रेस का रुख बताएं. उन्होंने सवाल किया, ”क्या सनातन धर्म का अपमान कांग्रेस को स्वीकार्य है?” भाजपा नेता ने कहा, ”लोग आस्था के साथ जीते हैं और वह (उदयनिधि) इतने अडिग हैं…’सनातन धर्म’ की तुलना कोरोना वायरस और डेंगू से कर रहे हैं…उन्होंने सभी आस्तिकों को ठेस पहुंचाई है. लोग उनका नाम भी ले सकते हैं लेकिन हम अपनी गरिमा बनाए रखते हैं.”

जावड़ेकर ने कहा, ”पूरे देश में लोग उदयनिधि की टिप्पणी से नाराज हैं और उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए और इस्तीफा भी देना चाहिए. उन्हें माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लोकतांत्रिक तरीके से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.” इस मुद्दे पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए जावड़ेकर ने सवाल किया, “आप (राहुल गांधी) गठबंधन में हैं और चुप क्यों हैं?” भाजपा नेता ने यह भी टिप्पणी की कि “महात्मा गांधी की कांग्रेस अलग थी जबकि राहुल गांधी की कांग्रेस बहुत अलग है.” देश का नाम ‘इंडिया’ से बदलकर ‘भारत’ करने के प्रस्ताव पर जावड़ेकर ने कहा कि विवाद अनावश्यक है क्योंकि ‘भारत’ देश का मूल नाम है और संविधान में लिखा है. उनका इशारा भारत के संविधान में उल्लिखित शब्द “इंडिया, दैट इज. भारत…” की ओर था.

उन्होंने कहा कि जो लोग किसी भी देश पर विजय प्राप्त करते हैं वे सबसे पहले स्थानों के नाम बदलते हैं. जावड़ेकर ने कहा, ”उन्होंने (ब्रिटिशों ने) शहरों के नाम कोलकाता, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम और मुंबई (क्रमश? कलकत्ता, मद्रास, त्रिवेंद्रम और बंबई के लिये) बदले. यह सब प्रभुत्व का संकेत था. हमें उस औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आना होगा. भारत हमारा है. लोग ‘भारत माता की जय’ कहते हैं.”’ जावड़ेकर ने कहा कि इसलिए किसी को भी नाम पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने दावा किया कि देश का नाम ‘इंडिया’ से ‘भारत’ करने के कथित प्रस्ताव का “चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है.” जावड़ेकर ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही अपने भाषणों में कह चुके हैं कि उनके द्वारा दिए गए ‘पंच प्रण’ में से एक मंत्र देश को औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर लाना रहा है और वही व्यक्त किया जा रहा है. आज, हर कोई प्रेसीडेंट आफ भारत कहता है. तो, इसमें गलत क्या है.” जावड़ेकर ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि संविधान में ‘भारत’ नाम का उल्लेख है.

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