
नयी दिल्ली. सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि विपक्षी दलों के सांसदों ने एप्पल की ओर से उन्हें भेजे गए चेतावनी के संदेश का जो मुद्दा उठाया था उसकी जांच सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन ने शुरू कर दी है. उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में कंपनी को नोटिस भी भेजा गया है.
यह कदम इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस सप्ताह की शुरुआत में एप्पल के उपकरणों की सुरक्षा को लेकर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि सरकार चाहती है कि एप्पल यह स्पष्ट करे कि क्या उसके उत्पाद सुरक्षित है और 150 से अधिक देशों में लोगों को ”चेतावनी के संदेश” क्यों भेजे गए,खासतौर पर तब जब कि कंपनी लगातार दावा करती है कि उसके उत्पाद निजता को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.
चंद्रशेखर ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार चेतावनी संबंधी संदेशों की जांच कराएगी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार पर विपक्ष के आरोपों को स्पष्ट तौर पर खारिज किया और कहा ”बाध्यकारी आलोचक” ध्यान भटकाने की राजनीति में लगे हुए हैं, क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति नहीं बर्दाश्त कर पा रहे हैं.” आईटी सचिव ने बृहस्पतिवार को इस बात की पुष्टि की कि एप्पल को नोटिस भेजा गया है.
कृष्णन ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ”सीईआरटी-इन ने अपनी जांच शुरू कर दी है…वे (एप्पल) इस जांच में सहयोग करेंगे.” भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम या सीईआरटी-इन कंप्यूटर सुरक्षा से संबंधित घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है. यह पूछे जाने पर कि क्या एप्पल को नोटिस भेजा गया है? उन्होंने कहा, ‘हां’. एप्पल ने इस संबंध में पीटीआई-भाषा की ओर से भेजे गए ईमेल का कोई जबाव नहीं दिया.
विपक्ष के कई नेताओं ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें उनके आईफोन में ‘सरकार प्रायोजित सेंधमारी के प्रयास’ के बारे में एप्पल से चेतावनी संदेश मिला है तथा इस कथित हैकिंग के प्रयास के लिए सरकार जिम्मेदार है. केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और कहा कि सरकार इसकी गहन जांच कराएगी.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी नेता केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत एवं टी एस सिंहदेव, शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसी तरह का संदेश मिला है.
एप्पल ने 31अक्टूबर को एक बयान में कहा था कि वह विपक्षी दलों के कुछ सांसदों को भेजे गए चेतावनी संदेश को किसी विशिष्ट सरकार-प्रायोजित हमलावरों से नहीं जोड़ती और वह इस बारे में जानकारी नहीं दे सकती है कि ऐसी चेतावनियों का कारण क्या है.
कंपनी ने कहा, ”एप्पल खतरे की सूचनाओं के लिए किसी विशिष्ट सरकार-प्रायोजित हमलावर को जिम्मेदार नहीं ठहराता.”
एप्पल ने कहा कि सरकार प्रायोजित हमलावर ”आर्थिक और तकनीकी रूप से बहुत मजबूत होते हैं और उनके हमले समय के साथ विकसित होते हैं.” कंपनी ने कहा, ”ऐसे हमलों का पता लगाना खतरे के खुफिया संकेतों पर निर्भर करता है जो अक्सर अधूरे होते हैं. यह संभव है कि एप्पल के खतरे संबंधी कुछ सूचनाएं गलत चेतावनी हो सकती हैं या कुछ हमलों का पता नहीं चल पाता.” इस बीच, सूत्रों ने कहा कि एप्पल ने लगभग 150 देशों में उन व्यक्तियों को चेतावनी संबंधी सूचनाएं भेजी हैं, जिनके अकाउंट हैं.



