अस्पृष्यता विवाद पर पुजारियों ने कहा- मंत्री ने रस्मों को गलत समझा, किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Sep 2023 09:55 PM
अस्पृष्यता विवाद पर पुजारियों ने कहा- मंत्री ने रस्मों को गलत समझा, किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ
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कन्नूर. केरल के देवस्वओम मंत्री के. राधाकृष्णन के खिलाफ छुआछूत की कथित घटना को लेकर राज्य में वरिष्ठ पुजारियों के एक संगठन ने बुधवार को कहा कि मंत्री ने अनुष्ठान की रस्मों को गलत समझा और मंदिर में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ.
अखिल केरल तंत्री समाजम की राज्य समिति ने कहा कि जो पुजारी ‘देव पूजा’ करते हैं वे पूजा खत्म होने तक किसी को भी छू नहीं सकते चाहे वह ब्राह्मण हो या गैर ब्राह्मण.

संगठन ने इस विवाद पर आश्चर्य व्यक्त किया और पूछा कि कहीं इस मुद्दे पर विवाद खड़ा करने के पीछे कोई ”गलत इरादा” तो नहीं है. संगठन ने दावा किया कि ”तकनीकी रूप से घटना आठ महीने पुरानी है” और आरोप लगाया कि ”एक निष्छल कर्म” का इस्तेमाल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए किया जा रहा है. समाजम पारंपरिक वरिष्ठ पुजारियों का एक संघ है जो केरल के अधिकतर मंदिरों में पूजा पाठ एवं अनुष्ठान की रस्मों के निर्वहन पर फैसला करता है.

सवालों के घेरे में जो घटना है उसमें मंदिर के तंत्री (पारंपरिक वरिष्ठ पुजारी) की अनुपस्थिति के कारण पूजा कर रहे ‘मेलशांति’ (मुख्य पुजारी) को आखिरी समय में बुलाया गया और दीपक प्रज्ज्वलित के लिए कहा गया. पुजारियों की संस्था ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि दीपक प्रज्ज्वलित करने के बाद वह (पुजारी) पूजा पूरी करने के लिए वापस चले गए और इस रस्म को मौके पर मौजूद मंत्री ने छुआछूत समझ लिया.

वहीं, संगठन ने यह भी सवाल किया कि कहीं इस मुद्दे के पीछे कोई ”गलत मंशा” तो नहीं है क्योंकि ”घटना करीब आठ महीने पहले हुई थी” और विवाद अब हो रहा है. संगठन ने कहा कि केरल की संस्कृति में मंदिरों में स्वच्छता को शुद्ध रूप से आध्यात्मिक माना जाता है और दावा किया कि यह जाति-आधारित भेदभाव नहीं है.

संगठन ने कहा कि मालाबार देवस्वओम बोर्ड के तहत मंदिर में कार्यरत दो पुजारियों के खिलाफ महज जाति के आधार पर गंभीर मामला दर्ज किया गया है. इसने दावा किया कि हकीकत से अनजान कुछ लोग मंत्री के बयान के आधार पर मंदिर के मेलशांति और उनके समुदाय का अपमान कर रहे हैं.

पोस्ट में कहा गया, ”ऐसे लोग एक निष्छल कर्म की गलत व्याख्या करने और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. इसे केवल केरल में अस्पृश्यता की उपस्थिति का दावा करके सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने का एक कदम माना जा सकता है.” पुजारियों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने वाले ऐसे ”दुर्भावनापूर्ण” विवादों में शामिल न हों.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिवालय ने मंगलवार शाम इस घटना की निंदा की और कहा कि यह केरल के लिए शर्मनाक है. पार्टी ने कहा कि ऐतिहासिक कारणों से पैदा हुई सामाजिक असमानताएं अब भी प्रचलित हैं और सरकार उनका समाधान खोजने के लिए काम कर रही है. माकपा ने लोगों से ऐसी प्रथाओं के खिलाफ सतर्क रहने और इनका उन्मूलन करने का आग्रह किया.

अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा था कि एक मंदिर के दो पुजारियों ने मंदिर में उद्घाटन के अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर रखे मुख्य दीपक को जलाने के लिए लाए गए छोटे दीपक को उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय, उन्होंने खुद मुख्य दीपक जलाया और इसके बाद छोटा दीपक जमीन पर रख दिया, यह सोचकर कि वह इसे ले लेंगे.

मंत्री ने मंदिर के नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन समाचार चैनलों ने कन्नूर जिले के पय्यानूर में एक मंदिर में ”नाडापंडाल” के हालिया उद्घाटन के दृश्य प्रसारित किए, जिसमें मंत्री ने भाग लिया था. वीडियो में दिखता है कि पुजारी छोटा दीपक मंत्री को नहीं सौंपते और इसे जमीन पर रख देते हैं.

राधाकृष्णन ने बाद में कहा था कि जाति व्यवस्था कुछ लोगों के दिमाग में एक ”दाग” की तरह है और इसे तुरंत हटाना आसान नहीं है.
देवस्वओम मंत्री ने स्पष्ट किया था कि उनका इरादा इस घटना को विवाद में बदलने का नहीं था और उन्होंने सिर्फ लोगों को सामाजिक बुराई के बारे में जागरूक करने की कोशिश की थी. उन्होंने यह भी कहा कि भेदभाव केवल लोगों के प्रति दिखाया गया, पैसों के प्रति नहीं.
राधाकृष्णन ने यह भी संकेत दिया था कि वह अपने साथ हुए भेदभाव को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं.

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने कैबिनेट सहयोगी के साथ हुए कथित जातिगत भेदभाव की निंदा की थी और कहा था कि उनके साथ चर्चा के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. विजयन ने राधाकृष्णन के खुलासे को ”चौंकाने वाला” बताया था. केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने भी मंत्री के साथ कथित तौर पर भेदभाव करने वाले पुजारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी.

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर कोई वाइकोम सत्याग्रह के 100 साल बाद भी अस्पृश्यता को वापस लाने की कोशिश कर रहा है, तो इसे बहुत गंभीरता से लेना होगा और सरकार को संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी. राधाकृष्णन सत्तारूढ. माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग और देवस्वओम कल्याण मंत्री हैं. वह त्रिशूर जिले के चेलक्कारा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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