राजस्थान, मप्र, छत्तीसगढ़ को लेकर ‘अति आत्मविश्वास’ हमें ले डूबा : कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख

'लालच और सत्ता की लालसा' के चलते हारी कांग्रेस : विजयन

गुवाहाटी/लखनऊ/त्रिशूर/पटना. कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार को कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में पार्टी ‘अति आत्मविश्वास’ की वजह से हारी. उन्होंने तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लड़ने के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि सभी जगह से भाजपा की हार के संकेत मिल रहे थे, लेकिन वे तब भी जीत के लिए प्रयासरत रहे.

यहां पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बोरा ने कहा, ”विधानसभा चुनावों के नतीजे हमारे लिए संकेत हैं कि हमें अति आत्मविश्वासी नहीं होना चाहिए.” उन्होंने कहा कि इन राज्यों के कांग्रेस नेताओं के साथ बातचीत के दौरान उनसे इस बात की भनक तक नहीं लगी कि पार्टी विधानसभा चुनाव हार भी सकती है.

उन्होंने कहा, ”हमें इसका श्रेय भाजपा को देना होगा क्योंकि ऐसा कहा जा रहा था कि वे हार रहे हैं, लेकिन उन्होंने अंत तक लड़ाई लड़ी. लेकिन हमने (कांग्रेस) सोचा कि हम जीत चुके हैं.” बोरा ने कहा, ”यह असम में हमारे लिए (अति आत्मविश्वासी नहीं होना) भी एक सबक है.” कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव के नतीजों को लेकर निराश नहीं होने को कहा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का जबरदस्त तरीके से वापसी करने का इतिहास रहा है. उन्होंने कहा, ”चुनाव में चाहे जीत हो या हार लेकिन हमारी विचारधारा की लड़ाई जारी रहेगी.”

चुनाव परिणाम जो भी होंगे, राजनीतिक दल उन्हें स्वीकार करेंगे: अखिलेश यादव

विधानसभा चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अच्छे प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि नतीजे जो भी होंगे, राजनीतिक दल उन्हें स्वीकार करेंगे.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जैसी बड़ी पार्टी से मुकाबला करना हैं तो बहुत तैयारी करनी होगी .

यादव ने सोमवार को वाराणसी में कहा,” राजनीति में हम लोग निराश नहीं हैं, लोकतंत्र में ऐसे परिणाम आते रहते हैं. मान लीजिए जिस लोकसभा क्षेत्र में मैं बैठा हूं, वहां पांच लाख वोटों से भारतीय जनता पार्टी जीत जाती है. इसका मतलब यह नही है कि सबका साथ, सबका विकास और सबका सम्मान हो रहा हो. अभी भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो निराश हैं. जिन्हें उम्मीद थी, उनकी उम्मीद टूटी है.” उन्होंने कहा, “राजनीति में परिणाम आते हैं और जो भी परिणाम आयेंगे, कोई भी राजनीतिक दल हो, उन्हें वह स्वीकार करेगा . लेकिन लड़ाई लंबी है, जिन लोगों को भारतीय जनता पार्टी जैसी बड़ी पार्टी से मुकाबला करना है, उन्हें बहुत तैयारी करनी पड़ेगी . बहुत अनुशासन में रहकर उन चीजों का मुकाबला करना पड़ेगा. हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में परिणाम भिन्न होंगे .”

‘लालच और सत्ता की लालसा’ के चलते हारी कांग्रेस : विजयन
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि उसका ”लालच और सत्ता की लालसा” हिंदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनावों में उसकी हार की वजह है. विजयन ने कहा कि कांग्रेस ने सोचा कि वह अपने दम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जीत सकती है और इसलिए उसने भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने के वास्ते इन राज्यों में ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवेलपमेंट इन्क्लूसिव एलायंस) गठबंधन के अन्य दलों के साथ हाथ नहीं मिलाया.

उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”अगर उन्होंने अन्य दलों के साथ हाथ मिलाया होता तो यह नतीजा नहीं होता. वे लालची थे और उन्हें सत्ता की लालसा थी. वे सब कुछ अपने लिए चाहते थे. इसके कारण उन राज्यों में ऐसी स्थिति पैदा हुई. अगर हर कोई एकजुट होता तो परिणाम पूरी तरह अलग होता.” विजयन उन सवालों का जवाब दे रहे थे कि तीन राज्यों में कांग्रेस की करारी हार की क्या वजह रही, जिनमें से राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसकी सरकार थी.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता कमलनाथ के समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन करने के खिलाफ रहने के कारण वहां पार्टी की हार हुई. उन्होंने कहा कि सपा का राज्य के कुछ हिस्सों में प्रभाव था. मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सपा के साथ सीटों के बंटवारे का प्रस्ताव रखा था लेकिन कमलनाथ इसके खिलाफ थे.

उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में भी यही हुआ और कांग्रेस ने अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ मिलकर काम करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि इसके कारण मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को बेहद कम अंतर से अपनी दो सीटें गंवानी पड़ी.
यह पूछने पर कि क्या वाम दल को जीत के लिए कांग्रेस की आवश्यकता है, इस पर विजयन ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि क्या माकपा को कांग्रेस की जरूरत है. उन्होंने कहा, ”मुद्दा भाजपा को हराने का था. उसके लिए हम सभी को एकजुट होने की आवश्यकता है.”

विजयन ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में भी अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस की हार का कारण रहा. उन्होंने यह भी कहा कि कमलनाथ ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान कथित तौर पर कुछ गैर-धर्मनिरपेक्ष टिप्पणियां कीं जिसने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार में योगदान दिया.

कांग्रेस ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अकेले चुनाव लड़ने की गलती की:जदयू

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने सोमवार को कहा कि उसकी सहयोगी कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में ”इंडिया” गठबंधन के साझेदारों के साथ कोई तालमेल नहीं कर अकेले चुनाव लड़कर गलती की. जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधानपरिषद सदस्य नीरज कुमार ने भी इन राज्यों में कांग्रेस की हार के लिए भाजपा की ”सांप्रदायिक उन्माद” की कथित राजनीति का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में विफलता को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, ”यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि आपका राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन है, लेकिन आप राज्यों में अलग-अलग चुनाव लड़ना चाहते हैं.” नीरज ने कहा कि केवल बैठकें करने और जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं दिखाने से ‘इंडिया’ इतना बनावटी लगने लगता है कि लोग उससे जुड़ नहीं पा रहे हैं. विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक जदयू ने मध्य प्रदेश में पांच सीट पर और उतनी ही सीट एक अन्य असंतुष्ट सहयोगी समाजवादी पार्टी ने भी चुनाव लड़ा था .

नीरज ने जातिगत जनगणना और ओबीसी का केवल उल्लेख करने तथा पिछड़े राज्यों को विशेष दर्जा देने, वंचित जातियों के लिए कोटा बढ़ाने और कानूनी अडचनों में बचने के लिए इसे नौवीं अनुसूची में डालने की बिहार की मांग को ठीक ढंग से नहीं उठाए जाने के के लिए कांग्रेस से नाराजगी व्यक्त की. जदयू नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में इन चीजों का उल्लेख किया जाना चाहिए था . उनका कहना था कि बिहार में जो शुरू किया गया है उसकी अन्य राज्यों में भी जरूरत है.

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