पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच घातक झड़पों के बाद दूसरे दिन भी सीमाएं बंद

पाकिस्तान में सुरक्षाकर्मियों और कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, पुलिसकर्मी सहित पांच की मौत

पेशावर/इस्लामाबाद. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पिछले सप्ताह हुईं घातक झड़पों के बाद द्विपक्षीय व्यापार के लिए सोमवार को दूसरे दिन भी सीमाएं बंद रहीं और सैकड़ों लोग फंसे रहे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. शनिवार रात अफगान बलों ने कई पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला किया, जिसके बाद झड़पें शुरू हुईं. अफगानिस्तान के अधिकारियों ने दावा किया कि अफगान जमीनी और हवाई क्षेत्र का बार-बार उल्लंघन किए जाने के जवाब में उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया.

पाकिस्तान की सेना ने कम आंकड़े देते हुए कहा कि सीमा पर जवाबी गोलीबारी में उसके 23 सैनिक मारे गए और तालिबान से जुड़े 200 से अधिक आतंकवादीह्व ढेर हो गए. सऊदी अरब समेत विभिन्न देशों ने दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है.
अधिकारियों ने कहा कि डूरंड रेखा के नाम से जाने वाली 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा पर रविवार के बाद से गोलीबारी होने की सूचना नहीं है. अफगानिस्तान ने कभी डूरंड रेखा को मान्यता नहीं दी है. यह स्पष्ट नहीं है कि सीमा कब से खुलेगी.

सरकारी अधिकारी इम्तियाज अली ने बताया कि हालांकि दक्षिण-पश्चिमी चमन सीमा क्रॉसिंग व्यापार के लिए बंद है, फिर भी अधिकारियों ने रविवार से वहां फंसे लगभग 1,500 अफगान नागरिकों को पैदल लौटने की अनुमति दे दी. पाकिस्तान के तोरखम में एक प्रमुख उत्तर-पश्चिमी क्रॉसिंग सोमवार को सभी प्रकार की यात्रा और व्यापार के लिए बंद रही. स्थानीय व्यापारियों के प्रतिनिधि मुजीब उल्ला ने इस बंद की पुष्टि की.

अवैध रूप से रह रहे विदेशियों पर कार्रवाई के कारण पाकिस्तान छोड़ने की तैयारी कर रहे अफगान शरणार्थियों ने बताया कि वे रविवार से तोरखम क्रॉसिंग पर इंतजार कर रहे हैं. गुल रहमान नामक एक शरणार्थी ने कहा कि वह रविवार को तोरखम में इंतजार करते रहे और फिर अपने परिवार के साथ उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर लौट गए. उन्होंने कहा, “मेरे जैसे सैकड़ों लोग आस-पास के इलाकों में चले गए हैं या पेशावर वापस आ रहे हैं.” उन्होंने कहा कि वह तोरखम सीमा के फिर से खुलने का इंतजार करेंगे.

पाकिस्तान में सुरक्षाकर्मियों और कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, पुलिसकर्मी सहित पांच की मौत
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सोमवार को एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह के हजारों सदस्यों और सुरक्षार्किमयों के बीच हुई झड़प में एक पुलिसकर्मी समेत कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए. यह जानकारी पुलिस ने दी. तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने शुक्रवार को लाहौर से अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास तक मार्च करने तथा गाजा के लोगों के समर्थन में धरना देने की घोषणा की थी.

समूह ने गाजा के लिए ऐसे समय में विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है जब युद्ध समाप्त हो चुका है और युद्ध विराम पर सहमति बन चुकी है तथा गाजा के लोग शांति का जश्न मना रहे हैं. प्रदर्शनकारी ग्रैंड ट्रंक (जीटी) रोड पर लाहौर से लगभग 40 किलोमीटर दूर मुर्दिके तक पहुंचने में सफल रहे, जहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जबकि उनके नेताओं ने अधिकारियों के साथ बातचीत की. प्रदर्शनकारियों को समझाने की सारी कोशिशें परोक्ष तौर पर नाकाम रहीं और पुलिस ने सड़क खाली कराने और दंगाइयों को तितर-बितर करने के लिए एक अभियान शुरू किया.

पुलिस के अनुसार, यह अभियान लगभग पांच घंटे तक चला और सोमवार तड़के समाप्त हुआ जबकि कील लगे डंडो, ईंट, पेट्रोल बम और यहां तक कि बंदूकों से लैस प्रदर्शनकारियों की कानून प्रवर्तन र्किमयों के साथ लगातार झड़प हुई. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और 48 घायल हो गए, जिनमें से 17 को गोली लगी है.” उन्होंने बताया कि एक नागरिक और तीन प्रदर्शनकारी भी मारे गए हैं, जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं.

पंजाब पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने 40 सरकारी और निजी वाहनों में आग लगा दी, जबकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया. सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में घटनास्थल पर कई जले हुए वाहन दिखायी दे रहे हैं. टीएलपी समर्थक अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए और इस्लामाबाद से लाहौर जाने वाले एम2 मार्ग को लाहौर के पास फैजपुर, काला शाह और बाबू साबू में जाम कर दिया. पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, पेशावर से इस्लामाबाद जाने वाला एम1 मार्ग खुला है, लेकिन इस पर भारी यातायात फिलहाल प्रतिबंधित है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button