लोगों की बचत कम हुई, सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन की सच्चाई सबके सामने : कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने सोमवार को देश के आम लोगों की वित्तीय बचत में कमी आने का दावा किया और कहा कि सरकार के ‘आर्थिक कुप्रंधन’ की सच्चाई सबके सामने है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का हवाला दिया जिसमें दावा किया गया है कि परिवारों की वित्तीय बचत 47 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर चली गई है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि यह समाचार भारत की घरेलू बचत से जुड़ी गंभीर चिंताओं को सामने लाता है. उनका कहना था, ”अर्थशा्त्रिरयों ने कई मुद्दे उठाए हैं. बढ़ती महंगाई और कमाई में वृद्धि न होने के कारण परिवारों के पास बचत के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. बचत दर कई दशकों में सबसे निचले स्तर पर है.” रमेश ने कहा, ”कम बचत का मतलब है व्यापार और सरकारी निवेश के लिए कम पूंजी उपलब्ध होना. इस स्थिति में भारत को पैसे के लिए अस्थिर विदेशी पूंजी पर निर्भर रहना होगा. सभी निजी कर्ज में से होम लोन का हिस्सा पांच वर्षों में पहली बार 50 प्रतिशत से नीचे है. यह गंभीर चिंता का विषय है. यह दर्शाता है कि संकट घरेलू देनदारियों में वृद्धि से प्रेरित है.”

कांग्रेस महासचिव के अनुसार, ”बड़े पैमाने पर बाज.ार में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावट आई है जबकि बढ़ते कार ऋण की मदद से हाई-एंड कारें और एसयूवी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. ऐशो आराम की वस्तुओं पर ख.र्च बढ़ रहा है. दूसरी ओर अधिकांश लोगों को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए क.ज.र् लेना पड़ रहा है. यह अर्थव्यवस्था में गहरी और बढ़ती असमानता को दर्शाता है.”

उन्होंने आरोप लगाया, ”मोदी सरकार, विशेष रूप से वित्त मंत्रालय, इस मुद्दे को जितना चाहे घुमाने की कोशिश कर लें, लेकिन उसकी ग.लत प्राथमिकताओं और अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन की सच्चाई सबके सामने है.”

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