‘प्रसादम’ की घटना हिंदू भावनाओं पर ‘हमला’ है- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

मंदिरों में लड्डू की जगह इलायची दाना और मिश्री बांटें : साधु-संत

पटना/देहरादून/मुंबई. उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तिरुपति लड्डू ‘प्रसादम’ पर विवाद के बीच मंगलवार को कहा कि यह घटना हिंदू भावनाओं पर ‘हमला’ है. उन्होंने इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ ‘सख्त कार्रवाई’ की मांग की.

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, “यह घटना हिंदू भावनाओं पर हमला है…यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर हमला है. यह संगठित अपराध का हिस्सा है. यह हिंदू समुदाय के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात है…इसकी गहन जांच होनी चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.” उन्होंने कहा, “इसे विवाद कहना उचित नहीं है…यह उससे कहीं अधिक है. 1857 के विद्रोह के दौरान एक मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूस को मुंह से खोलने से मना कर दिया था, इससे देश में क्रांति आ गई थी. लेकिन आज इसे करोड़ों भारतीयों के मुंह में ठूंस दिया गया… यह कोई छोटी बात नहीं है. इस मामले की जांच में देरी नहीं होनी चाहिए.” देशव्यापी ‘गौ रक्षा यात्रा’ के तहत पटना पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हम हिंदू इस घटना को कभी नहीं भूल सकते. देश में गोहत्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने गोहत्या रोकने के लिए कानून बनाने की मांग की.

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि देश भर में गोहत्या पर प्रतिबंध लगे और इसे रोकने के लिए सख्त कानून बने. यह काफी परेशान करने वाली बात है कि देश में गोमांस का निर्यात दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. केंद्र सरकार को इस संबंध में सक्रिय कदम उठाने चाहिए.” उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने सरकारी आवास पर गायों के साथ खेलते हैं और मोरों को दाना खिलाते हैं और दूसरी तरफ देश में गोमांस का निर्यात बढ़ रहा है… यह बहुत चौंकाने वाला और परेशान करने वाला है.

मंदिरों में लड्डू की जगह इलायची दाना और मिश्री बांटें : साधु-संत

तिरुपति बालाजी मंदिर मे प्रसाद में मिलावट का मामला सामने आने के बाद साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने मंगलवार को कहा कि देशभर के मंदिरों में लड्डू आदि की जगह पारंपरिक रूप से भोग के रूप में चढ़ाए जाने वाले इलायची दाना और मिश्री एवं सूखे मेवे ही भक्तों में बांटे जाने चाहिए. परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि इस प्रकार का प्रसाद ही सभी मंदिरों में बांटा जाना चाहिए जब तक कि सरकार और मंदिरों का प्रबंधन प्रसाद में मिलाए जाने वाले घी की शुद्धता की गारंटी न ले.

उन्होंने कहा, ह्लपारंपरिक रूप से इलायची दाना, मिश्री और सूखे मेवे ही हिंदु देवी देवताओं को भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं. भक्तों में उन्हें बांटे जाने से प्रसाद में मिलावट की कोई आशंका नहीं रहेगी.ह्व आंध्र प्रदेश के तिरूपति बालाजी मंदिर में ‘प्रसादम’ में मिलावट पर नाराजगी जाहिर करते हुए महंत पुरी ने कहा कि इससे पूरी दुनिया में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने सुझाव दिया कि तिरूपति बालाजी मंदिर में मिलावटी ‘प्रसादम’ को अनजाने में ग्रहण कर चुके हिंदु अपने अपराधबोध से मुक्ति पाने के लिए गंगाजल या गौमूत्र को ग्रहण कर सकते हैं.

सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद के पैकेट पर चूहे होने का वीडियो आया सामने ; जांच शुरू

तिरुपति के लड्डू प्रसादम को लेकर जारी विवाद के बीच, यहां स्थित सिद्धिविनायक मंदिर के प्रसाद के पैकेट पर चूहे होने का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है. हालांकि, श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास (एसएसजीटी) ने आरोप से इनकार किया और कहा कि उसने मामले की जांच शुरू कर दी है.

शिवसेना नेता और एसएसजीटी अध्यक्ष सदा सर्वंकर ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”रोजाना लाखों लड्डू बांटे जाते हैं और जिस स्थान पर वे बनाए जाते हैं, वह स्वच्छ है. वीडियो में एक गंदा स्थान दिखायी दे रहा है. मैं देख सकता हूं कि यह मंदिर का नहीं है और वीडियो कहीं बाहर बनाया गया है.” कथित वीडियो में नीले रंग की एक ‘ट्रे’ में रखे लड्डू के पैकेट चूहों द्वारा कुतरे दिखायी दे रहे हैं.
सर्वंकर ने कहा, ”हम सीसीटीवी फुटेज खंगालेंगे और जांच के लिए एक डीसीपी (पुलिस उपायुक्त) रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा. दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.” इससे पहले, संवाददाता सम्मेलन में सर्वंकर ने कहा कि मंदिर यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करता है कि प्रसाद स्वच्छ स्थान पर तैयार किया जाए.

उन्होंने कहा, ”घी, काजू और अन्य सामग्री पहले जांच के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की प्रयोगशाला में भेजी जाती है और वहां से स्वीकृति के बाद इस्तेमाल की जाती है.” उन्होंने बताया कि पानी की भी प्रयोगशाला में जांच करायी जाती है. उन्होंने कहा, ”इसका मतलब है कि हम यह सुनिश्चित करने पर पूरा ध्यान देते हैं कि श्रद्धालुओं को दिए जाने वाला प्रसाद शुद्ध हो.”

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