मुंबई/नासिक. महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता अजीत पवार ने रत्नागिरी जिले में एक रिफाइनरी परियोजना के खिलाफ स्थानीय लोगों के प्रदर्शनों से संवेदनशीलता से निपटने की मंगलवार को मांग की और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाले जाने तक राज्य सरकार को सर्वेक्षण कार्य रोक देना चाहिए.
वहीं, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री और शिवसेना नेता उदय सामंत ने मंगलवार को नासिक में कहा कि रत्नागिरि जिले में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना के लिए बारसू गांव में भूमि का सुझाव तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया था और उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था.
पवार ने यहां जारी एक बयान में कहा, ‘‘लोकतंत्र में हर किसी को प्रदर्शन करने का अधिकार है. प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है. सरकार को स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और संवेदनशीलता दिखाते हुए मुद्दे से निपटना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ ंिशदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वार्ता के जरिये एक समाधान तलाशना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘तब तक सर्वेक्षण (रिफाइनरी परियोजना का) रोक देना चाहिए.’’ बयान में पवार ने कहा कि जिले के बारसू में रिफाइनरी परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन की ‘रिपोर्टिंग’ कर रहे पत्रकारों की आवाज दबाना भी रूकना चाहिए.
वहीं सामंत ने नासिक में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ 12 जनवरी, 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि राज्य सरकार रिफाइनरी के लिए 1,300 एकड़ जमीन तथा नाट्य (क्षेत्र) में अन्य 2,144 एकड़ जमीन उपलब्ध करा सकती है . उन्होंने इस परियोजना के लिए बारसू (में स्थल) का सुझाव दिया था.’’ उन्होंने यह भी दावा किया कि ठाकरे के पत्र में यह भी कहा गया था कि इस जमीन के 90 प्रतिशत हिस्से पर कोई बसावट या पेड़-पौधे नहीं हैं, इसलिए किसी पेड़-पौधे या मकान को अन्यत्र ले जाने की जरूरत ही नहीं है.
जब प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो मंत्री ने कहा कि किसानों पर (जमीन के लिए) कोई दबाव नहीं डाला जाएगा. उन्होंने दावा किया कि रिफाइनरी के लिए जरूरी 5000 एकड़ जमीन में करीब 2900 एकड़ जमीन के मालिकों ने पहले ही अपनी सहमति दे दी है. उन्होंने कहा कि रिफाइनरी परियोजना का अब बस इसलिए विरोध किया जा रहा है क्योंकि एकनाथ ंिशदे राज्य के मुख्यमंत्री हैं.
रत्नागिरी में रिफाइनरी परियोजना का विरोध कर रहीं करीब 30 महिलाएं हिरासत में
महाराष्ट्र के तटीय जिले रत्नागिरी के बारसू में प्रस्तावित तेल शोधन कारखाने (रिफाइनरी) का मंगलवार को विरोध कर रहीं 30 से अधिक महिलाओं को हिरासत में लिया गया है. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये महिलाएं सड़क पर लेटकर राज्य सरकार के वाहनों को प्रस्तावित परियोजना स्थल जाने से रोक रही थीं.
स्थानीय लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं. उन्हें आशंका है कि इस परियोजना से संवेदनशील तटीय कोंकण क्षेत्र की जैवविविधता को नुकसान होगा और उनके जीविकोपार्जन पर विपरीत असर होगा. इस बीच, विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आई है और उसने सरकार से तत्काल प्रदर्शनकारियों का ‘उत्पीड़न’ रोकने की मांग की है.
अधिकारियों ने बताया कि सरकारी टीम को मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर राजापुर के बारसू और सोलगांव में सर्वेक्षण का कार्य करना था लेकिन स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि तटीय जिले के स्थानीय लोग अरबों डॉलर की इस परियोजना के लिए मृदा सर्वेक्षण कार्य का विरोध कर रहे हैं. मंगलवार की सुबह विरोध प्रदर्शनों में कई महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और जिला प्रशासन के वाहनों को परियोजना स्थल पर जाने से रोकने के लिए सड़क पर लेट गईं.
अधिकारी ने बताया कि कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए सैकड़ों पुलिस र्किमयों को परियोजना स्थल पर तैनात किया गया है.
अधिकारी ने बताया कि रत्नागिरी के पुलिस अधीक्षक धनंजय कुलकर्णी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी किसी अनहोनी को रोकने के लिए मौके पर मौजूद हैं.